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गौरवशाली विरासत को संजोने में संस्कृत महाविद्यालयों की अहम भूमिका : धर्माणी
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राजकीय संस्कृत महाविद्यालय डंगार में मनाया वार्षिक समारोह
-शैक्षणिक, खेलकूद गतिविधियों में अव्वल रहे विद्यार्थियों को किया पुरस्कृत
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी (बिलासपुर)। भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का आधार संस्कृत भाषा रही है। वेद, उपनिषद, पुराण, रामायण, महाभारत, आयुर्वेद, ज्योतिष और दर्शन जैसे अनमोल ग्रंथ संस्कृत में ही रचे गए हैं। इस गौरवशाली विरासत को संजोने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने में संस्कृत महाविद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह बात तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने राजकीय संस्कृत महाविद्यालय डंगार के वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह में कही।
महाविद्यालय में मंगलवार को वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह मनाया गया। मुख्यातिथि मंत्री राजेश धर्माणी ने शैक्षणिक, खेलकूद एवं अन्य गतिविधियों में अव्वल रहे विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। मुख्यातिथि ने कहा कि संस्कृत महाविद्यालय केवल भाषा का शिक्षण ही नहीं करते हैं बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्म, नैतिक मूल्यों और परंपराओं का भी संरक्षण करते हैं। संस्कृत महाविद्यालयों में छात्रों को व्याकरण, साहित्य, वेद, वेदांग, न्याय, मीमांसा, दर्शन, कर्मकांड, ज्योतिष और योग जैसे विषयों का गहन अध्ययन कराया जाता है। संस्कृत महाविद्यालयों में शिक्षा का वातावरण अनुशासित, शांत और आध्यात्मिक होता है। उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ अन्य गतिविधियों में भी बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया ताकि उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।
राजेश धर्माणी ने कहा कि डंगार पंचायत में विकास कार्यों पर लगभग साढ़े पांच करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। उन्होंने महाविद्यालय प्रशासन की मांगों को लेकर कहा कि उन्हें आने वाले समय में पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। इस मौके पर महाविद्यालय के प्रधानाचार्य संदीप, संस्था के संस्थापक डॉ. दीनानाथ, पूर्व सचिव संस्कृत अकादमी डॉ. केशवानंद कौशल, मनोहर लाल, सतपाल महाजन, राकेश सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
इन्हें किया सम्मानित
प्राक शास्त्री प्रथम वर्ष में प्रथम शुभम, द्वितीय अनु कुमारी और तृतीय दीक्षा, प्राक शास्त्री द्वितीय वर्ष में प्रथम आशीष, द्वितीय इशिता, तृतीय राहुल, शास्त्री प्रथम वर्ष में प्रथम विशाल कुमार, द्वितीय तनु कुमारी, तृतीय सुनीता देवी, शास्त्री द्वितीय वर्ष में प्रथम वर्षा, द्वितीय अंकिता, तृतीय कनिका, शास्त्री तृतीय वर्ष में प्रथम वर्षा, द्वितीय पलक, तृतीय अर्पणा अभिनव, दीक्षा, अदिति, हंसराज, ऋतुकमल को सम्मानित किया गया। खेलकूद में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए शिवम को सम्मानित किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए शिवानी को सम्मानित किया। महाविद्यालय में प्रियांशु को सर्वश्रेष्ठ छात्र और कनिका को सर्वश्रेष्ठ छात्रा चयनित किया गया।
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-शैक्षणिक, खेलकूद गतिविधियों में अव्वल रहे विद्यार्थियों को किया पुरस्कृत
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी (बिलासपुर)। भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का आधार संस्कृत भाषा रही है। वेद, उपनिषद, पुराण, रामायण, महाभारत, आयुर्वेद, ज्योतिष और दर्शन जैसे अनमोल ग्रंथ संस्कृत में ही रचे गए हैं। इस गौरवशाली विरासत को संजोने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने में संस्कृत महाविद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह बात तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने राजकीय संस्कृत महाविद्यालय डंगार के वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह में कही।
महाविद्यालय में मंगलवार को वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह मनाया गया। मुख्यातिथि मंत्री राजेश धर्माणी ने शैक्षणिक, खेलकूद एवं अन्य गतिविधियों में अव्वल रहे विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। मुख्यातिथि ने कहा कि संस्कृत महाविद्यालय केवल भाषा का शिक्षण ही नहीं करते हैं बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्म, नैतिक मूल्यों और परंपराओं का भी संरक्षण करते हैं। संस्कृत महाविद्यालयों में छात्रों को व्याकरण, साहित्य, वेद, वेदांग, न्याय, मीमांसा, दर्शन, कर्मकांड, ज्योतिष और योग जैसे विषयों का गहन अध्ययन कराया जाता है। संस्कृत महाविद्यालयों में शिक्षा का वातावरण अनुशासित, शांत और आध्यात्मिक होता है। उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ अन्य गतिविधियों में भी बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया ताकि उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।
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राजेश धर्माणी ने कहा कि डंगार पंचायत में विकास कार्यों पर लगभग साढ़े पांच करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। उन्होंने महाविद्यालय प्रशासन की मांगों को लेकर कहा कि उन्हें आने वाले समय में पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। इस मौके पर महाविद्यालय के प्रधानाचार्य संदीप, संस्था के संस्थापक डॉ. दीनानाथ, पूर्व सचिव संस्कृत अकादमी डॉ. केशवानंद कौशल, मनोहर लाल, सतपाल महाजन, राकेश सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
इन्हें किया सम्मानित
प्राक शास्त्री प्रथम वर्ष में प्रथम शुभम, द्वितीय अनु कुमारी और तृतीय दीक्षा, प्राक शास्त्री द्वितीय वर्ष में प्रथम आशीष, द्वितीय इशिता, तृतीय राहुल, शास्त्री प्रथम वर्ष में प्रथम विशाल कुमार, द्वितीय तनु कुमारी, तृतीय सुनीता देवी, शास्त्री द्वितीय वर्ष में प्रथम वर्षा, द्वितीय अंकिता, तृतीय कनिका, शास्त्री तृतीय वर्ष में प्रथम वर्षा, द्वितीय पलक, तृतीय अर्पणा अभिनव, दीक्षा, अदिति, हंसराज, ऋतुकमल को सम्मानित किया गया। खेलकूद में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए शिवम को सम्मानित किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए शिवानी को सम्मानित किया। महाविद्यालय में प्रियांशु को सर्वश्रेष्ठ छात्र और कनिका को सर्वश्रेष्ठ छात्रा चयनित किया गया।