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Bilaspur News: खामोश दुनिया को मिली आवाज, अब सुन और बोल सकेंगे मासूम
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एम्स बिलासपुर में 11 बच्चों का सफल कोक्लीयर इम्प्लांट
विश्व श्रवण दिवस पर कार्यक्रम, विशेषज्ञों ने शुरुआती जांच को बताया जीवन रक्षक
संस्थान के ईएनटी विभाग में न्यूरो-ऑटोलॉजी,स्कल बेस सर्जरी जैसी विश्वस्तरीय सुविधाएं शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो रहे एम्स बिलासपुर ने मंगलवार को विश्व श्रवण दिवस पर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। संस्थान के बी-ब्लॉक में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों में सुनने की अक्षमता की पहचान और उनके समय पर उपचार के प्रति समाज को जागरूक करना रहा।
कार्यक्रम के दौरान संस्थान के ईएनटी विभाग की एक बड़ी सफलता साझा की गई। विभागाध्यक्ष डॉ. सुदेश कुमार ने जानकारी दी कि संस्थान ने अब तक 11 ऐसे बच्चों का सफल कोक्लीयर इम्प्लांट ऑपरेशन किया है, जो जन्म से ही सुनने और बोलने में असमर्थ थे। अब ये बच्चे न केवल ध्वनि सुन पा रहे हैं, बल्कि उनके वाक और भाषा विकास की राह भी आसान हो गई है। यह पूरा कार्यक्रम संस्थान के कार्यकारी निदेशक, लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. दलजीत सिंह, एवीएसएम, वीएसएम (सेवानिवृत्त) के कुशल मार्गदर्शन और संरक्षण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर संस्थान के शीर्ष अधिकारियों प्रो. रूपाली पार्लेवार (डीन, एकेडमिक्स), डॉ. अनुपम पाराशर (डीन, रिसर्च) और डॉ. निधि पुरी (डीन, एग्जामिनेशन) ने अपनी विशेष उपस्थिति दर्ज कराई। इस वर्ष विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से निर्धारित थीम कम्युनिटी से क्लासरूम तक रही है। सभी बच्चों के लिए श्रवण देखभाल पर चर्चा करते हुए डीन अकादमिक प्रो. रूपाली पार्लेवार ने कहा कि यदि सामुदायिक और स्कूल स्तर पर बच्चों की समय-समय पर जांच की जाए, तो उनके शैक्षणिक और सामाजिक भविष्य को सुरक्षित किया जा सकता है। समय पर हस्तक्षेप न होने से बच्चों के भाषा विकास और आत्मविश्वास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
एम्स बिलासपुर का ईएनटी विभाग अब अत्याधुनिक ओटोलॉजी सेवाओं का केंद्र बन चुका है। विभाग की टीम में विभागाध्यक्ष डॉ. सुदेश कुमार, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुमीत अंगराल, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नेहा चौहान, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. निधिन दास के जो विशेष रूप से न्यूरो-ऑटोलॉजी में प्रशिक्षित हैं शामिल हैं। संस्थान में उपलब्ध प्रमुख जांच एवं सर्जरी सुविधाओं में नियोनेटल हियरिंग स्क्रीनिंग, ऑडियोलॉजिकल सेवाएं, टाइम्पैनोप्लास्टी, मास्टोइडेक्टोमी, ओसीकुलोप्लास्टी, स्टेप्स सर्जरी और मिडिल ईयर व लैटरल स्कल बेस की एडवांस सर्जरी शामिल हैं। मरीजों के लिए सोमवार से शनिवार तक सुबह से शाम तक सेवाएं उपलब्ध हैं। कार्यक्रम के दौरान उन बच्चों के लिए विशेष मनोरंजक और संवादात्मक गतिविधियां आयोजित की गईं, जिनका कोक्लीयर इम्प्लांट सफल रहा है। इन गतिविधियों का उद्देश्य बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाना और उनके परिवारों के साथ समन्वय मजबूत करना था। बच्चों को सामान्य बच्चों की तरह खेलते और संवाद करते देख उनके माता-पिता भावुक हो उठे। कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) दलजीत सिंह ने प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि एम्स बिलासपुर क्षेत्र के हर बच्चे तक समावेशी, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण श्रवण स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो रहे एम्स बिलासपुर ने मंगलवार को विश्व श्रवण दिवस पर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। संस्थान के बी-ब्लॉक में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों में सुनने की अक्षमता की पहचान और उनके समय पर उपचार के प्रति समाज को जागरूक करना रहा।
कार्यक्रम के दौरान संस्थान के ईएनटी विभाग की एक बड़ी सफलता साझा की गई। विभागाध्यक्ष डॉ. सुदेश कुमार ने जानकारी दी कि संस्थान ने अब तक 11 ऐसे बच्चों का सफल कोक्लीयर इम्प्लांट ऑपरेशन किया है, जो जन्म से ही सुनने और बोलने में असमर्थ थे। अब ये बच्चे न केवल ध्वनि सुन पा रहे हैं, बल्कि उनके वाक और भाषा विकास की राह भी आसान हो गई है। यह पूरा कार्यक्रम संस्थान के कार्यकारी निदेशक, लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. दलजीत सिंह, एवीएसएम, वीएसएम (सेवानिवृत्त) के कुशल मार्गदर्शन और संरक्षण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर संस्थान के शीर्ष अधिकारियों प्रो. रूपाली पार्लेवार (डीन, एकेडमिक्स), डॉ. अनुपम पाराशर (डीन, रिसर्च) और डॉ. निधि पुरी (डीन, एग्जामिनेशन) ने अपनी विशेष उपस्थिति दर्ज कराई। इस वर्ष विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से निर्धारित थीम कम्युनिटी से क्लासरूम तक रही है। सभी बच्चों के लिए श्रवण देखभाल पर चर्चा करते हुए डीन अकादमिक प्रो. रूपाली पार्लेवार ने कहा कि यदि सामुदायिक और स्कूल स्तर पर बच्चों की समय-समय पर जांच की जाए, तो उनके शैक्षणिक और सामाजिक भविष्य को सुरक्षित किया जा सकता है। समय पर हस्तक्षेप न होने से बच्चों के भाषा विकास और आत्मविश्वास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
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एम्स बिलासपुर का ईएनटी विभाग अब अत्याधुनिक ओटोलॉजी सेवाओं का केंद्र बन चुका है। विभाग की टीम में विभागाध्यक्ष डॉ. सुदेश कुमार, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुमीत अंगराल, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नेहा चौहान, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. निधिन दास के जो विशेष रूप से न्यूरो-ऑटोलॉजी में प्रशिक्षित हैं शामिल हैं। संस्थान में उपलब्ध प्रमुख जांच एवं सर्जरी सुविधाओं में नियोनेटल हियरिंग स्क्रीनिंग, ऑडियोलॉजिकल सेवाएं, टाइम्पैनोप्लास्टी, मास्टोइडेक्टोमी, ओसीकुलोप्लास्टी, स्टेप्स सर्जरी और मिडिल ईयर व लैटरल स्कल बेस की एडवांस सर्जरी शामिल हैं। मरीजों के लिए सोमवार से शनिवार तक सुबह से शाम तक सेवाएं उपलब्ध हैं। कार्यक्रम के दौरान उन बच्चों के लिए विशेष मनोरंजक और संवादात्मक गतिविधियां आयोजित की गईं, जिनका कोक्लीयर इम्प्लांट सफल रहा है। इन गतिविधियों का उद्देश्य बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाना और उनके परिवारों के साथ समन्वय मजबूत करना था। बच्चों को सामान्य बच्चों की तरह खेलते और संवाद करते देख उनके माता-पिता भावुक हो उठे। कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) दलजीत सिंह ने प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि एम्स बिलासपुर क्षेत्र के हर बच्चे तक समावेशी, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण श्रवण स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा।