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Bilaspur News: राष्ट्रीय लोक अदालत में मुआवजे का मामला सुलझा, 6 लाख रुपये देने के आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Wed, 18 Mar 2026 11:23 PM IST
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अदालत से
एमएसीटी बिलासपुर में समझौते के आधार पर निपटारा 45 दिन में भुगतान न करने पर 9 प्रतिशत ब्याज देना होगा
स्वेच्छा से हुआ समझौता मान्य, आश्रितों में तय अनुपात में बांटी जाएगी राशि
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) बिलासपुर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में एक मुआवजा दावा आपसी सहमति से सुलझा लिया गया। लोक अदालत के समक्ष पेश किए गए इस मामले में दोनों पक्षों के बीच समझौता होने पर अदालत ने बीमा कंपनी को मृतक के आश्रितों को 6 लाख रुपये की एकमुश्त मुआवजा राशि देने के आदेश जारी किए हैं।
यह मामला सुलह के लिए राष्ट्रीय लोक अदालत में रखा गया था, जहां दोनों पक्षों ने विवाद को आपसी सहमति से समाप्त करने पर सहमति जताई। सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी की ओर से अदालत को अवगत कराया गया कि कंपनी समझौते के तहत 6 लाख रुपये की राशि पूर्ण और अंतिम निपटान के रूप में देने के लिए तैयार है। अदालत ने पाया कि पक्षों के बीच हुआ समझौता स्वेच्छा, निष्पक्षता और बिना किसी दबाव या प्रलोभन के किया गया है, जो विधिसम्मत है। इस आधार पर अदालत ने समझौते को स्वीकार करते हुए दावा याचिका का निपटारा कर दिया।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि बीमा कंपनी को यह मुआवजा राशि आदेश की प्रति प्राप्त होने के 45 दिनों के भीतर अदा करनी होगी। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर भुगतान नहीं किया जाता है, तो याचिकाकर्ताओं को याचिका दायर करने की तिथि से लेकर राशि के भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित पूरी राशि वसूलने का अधिकार होगा। मृतक के आश्रितों के बीच मुआवजा राशि का बंटवारा भी तय कर दिया गया है। आदेश के अनुसार पत्नी को 70 प्रतिशत, माता को 5 प्रतिशत, दो पुत्रों को 10-10 प्रतिशत और पुत्री को 5 प्रतिशत हिस्सा प्रदान किया जाएगा।
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यह मामला सुलह के लिए राष्ट्रीय लोक अदालत में रखा गया था, जहां दोनों पक्षों ने विवाद को आपसी सहमति से समाप्त करने पर सहमति जताई। सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी की ओर से अदालत को अवगत कराया गया कि कंपनी समझौते के तहत 6 लाख रुपये की राशि पूर्ण और अंतिम निपटान के रूप में देने के लिए तैयार है। अदालत ने पाया कि पक्षों के बीच हुआ समझौता स्वेच्छा, निष्पक्षता और बिना किसी दबाव या प्रलोभन के किया गया है, जो विधिसम्मत है। इस आधार पर अदालत ने समझौते को स्वीकार करते हुए दावा याचिका का निपटारा कर दिया।
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अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि बीमा कंपनी को यह मुआवजा राशि आदेश की प्रति प्राप्त होने के 45 दिनों के भीतर अदा करनी होगी। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर भुगतान नहीं किया जाता है, तो याचिकाकर्ताओं को याचिका दायर करने की तिथि से लेकर राशि के भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित पूरी राशि वसूलने का अधिकार होगा। मृतक के आश्रितों के बीच मुआवजा राशि का बंटवारा भी तय कर दिया गया है। आदेश के अनुसार पत्नी को 70 प्रतिशत, माता को 5 प्रतिशत, दो पुत्रों को 10-10 प्रतिशत और पुत्री को 5 प्रतिशत हिस्सा प्रदान किया जाएगा।