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Bilaspur News: झंडूता थाना में दर्ज एससी-एसटी एक्ट का मामला रद्द
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Wed, 18 Mar 2026 11:57 PM IST
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लोक अदालत ने एफआईआर की कैंसिलेशन रिपोर्ट स्वीकार की
जांच में आरोप साबित नहीं, शिकायतकर्ता ने भी केस आगे बढ़ाने से किया इनकार
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा, निष्पक्ष जांच के बाद नहीं बनता कोई मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले के झंडूता थाना में दर्ज एससी-एसटी एक्ट से जुड़े एक मामले को राष्ट्रीय लोक अदालत में सुनवाई के बाद रद्द कर दिया गया। अदालत ने पुलिस द्वारा प्रस्तुत कैंसिलेशन रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए संबंधित एफआईआर को निरस्त करने के आदेश जारी किए हैं।
मामले के अनुसार वर्ष 2025 में शिकायत दर्ज करवाई गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि एक व्यक्ति मकान में सेफ्टी वॉल निर्माण का कार्य करवा रहा था। इसी दौरान कुछ लोग मौके पर पहुंचे और काम बंद करने को कहा। आरोप था कि इस दौरान गाली-गलौज की गई, जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया गया और जान से मारने की धमकी दी गई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान पुलिस टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया, मौके का नक्शा तैयार किया और फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी के जरिए साक्ष्य एकत्र किए। इसके अलावा गवाहों के बयान भी दर्ज किए गए। विस्तृत जांच के बाद पुलिस इस निष्कर्ष पर पहुंची कि मामले में कोई आपराधिक तत्व सिद्ध नहीं होता है, जिसके चलते अदालत में कैंसिलेशन रिपोर्ट पेश की गई।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी पाया कि शिकायतकर्ता को आपत्ति दर्ज कराने का पूरा अवसर दिया गया, लेकिन उसने स्पष्ट रूप से कहा कि वह इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहता। उसने जांच से संतुष्टि जताते हुए कैंसिलेशन रिपोर्ट पर कोई आपत्ति नहीं दी। सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद अदालत ने पुलिस की रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए एफआईआर को रद्द करने के आदेश जारी किए। साथ ही मामले से संबंधित फाइल पुलिस अधीक्षक को भेजने और रिकॉर्ड को अभिलेखागार में सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए।
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जांच में आरोप साबित नहीं, शिकायतकर्ता ने भी केस आगे बढ़ाने से किया इनकार
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा, निष्पक्ष जांच के बाद नहीं बनता कोई मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले के झंडूता थाना में दर्ज एससी-एसटी एक्ट से जुड़े एक मामले को राष्ट्रीय लोक अदालत में सुनवाई के बाद रद्द कर दिया गया। अदालत ने पुलिस द्वारा प्रस्तुत कैंसिलेशन रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए संबंधित एफआईआर को निरस्त करने के आदेश जारी किए हैं।
मामले के अनुसार वर्ष 2025 में शिकायत दर्ज करवाई गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि एक व्यक्ति मकान में सेफ्टी वॉल निर्माण का कार्य करवा रहा था। इसी दौरान कुछ लोग मौके पर पहुंचे और काम बंद करने को कहा। आरोप था कि इस दौरान गाली-गलौज की गई, जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया गया और जान से मारने की धमकी दी गई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान पुलिस टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया, मौके का नक्शा तैयार किया और फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी के जरिए साक्ष्य एकत्र किए। इसके अलावा गवाहों के बयान भी दर्ज किए गए। विस्तृत जांच के बाद पुलिस इस निष्कर्ष पर पहुंची कि मामले में कोई आपराधिक तत्व सिद्ध नहीं होता है, जिसके चलते अदालत में कैंसिलेशन रिपोर्ट पेश की गई।
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सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी पाया कि शिकायतकर्ता को आपत्ति दर्ज कराने का पूरा अवसर दिया गया, लेकिन उसने स्पष्ट रूप से कहा कि वह इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहता। उसने जांच से संतुष्टि जताते हुए कैंसिलेशन रिपोर्ट पर कोई आपत्ति नहीं दी। सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद अदालत ने पुलिस की रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए एफआईआर को रद्द करने के आदेश जारी किए। साथ ही मामले से संबंधित फाइल पुलिस अधीक्षक को भेजने और रिकॉर्ड को अभिलेखागार में सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए।