{"_id":"6a4659ff135832b43308145e","slug":"crackdown-on-sellers-of-adulterated-unsafe-food-items-dc-bilaspur-news-c-92-1-ssml1001-162884-2026-07-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"मिलावटी, असुरक्षित खाद्य पदार्थ बेचने वालों पर कसेंगे शिकंजा : डीसी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मिलावटी, असुरक्षित खाद्य पदार्थ बेचने वालों पर कसेंगे शिकंजा : डीसी
विज्ञापन
बचत भवन में आयोजित जिला स्तरीय खाद्य सुरक्षा सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता करते उपायुक्त।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बोले-तीन बार से अधिक इस्तेमाल किए तेल पर होगी कार्रवाई
होटल-ढाबों व स्ट्रीट फूड विक्रेताओं की होगी सघन जांच
दूध, पनीर, मिठाई, मसाले, तले खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग बढ़ाएं
आठ माह में 58 नमूने जांचे, छह फेल, 21 मामलों में 6.86 लाख रुपये जुर्माना
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले में अब मिलावटी और असुरक्षित खाद्य पदार्थ बेचने वालों पर प्रशासन सख्ती करेगा। होटल, रेस्तरां, ढाबों और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं के यहां नियमित निरीक्षण के साथ औचक जांच भी तेज की जाएगी। खासकर बार-बार इस्तेमाल होने वाले खाद्य तेल की जांच पर विशेष फोकस रहेगा। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ये निर्देश उपायुक्त राहुल कुमार ने बचत भवन में आयोजित जिला स्तरीय खाद्य सुरक्षा सलाहकार समिति की बैठक में दिए। उन्होंने कहा कि लोगों के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। जिले में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। उपायुक्त ने खाद्य सुरक्षा विभाग को निर्देश दिए कि दूध, पनीर, मिठाइयों, खाद्य तेल, मसालों, फिश फ्राई, पकोड़ों, समोसों सहित सभी तले हुए खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग बढ़ाई जाए, ताकि मिलावट और घटिया गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।
उन्होंने कहा कि एफएसएसएआई के दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी भी व्यावसायिक प्रतिष्ठान में एक ही खाद्य तेल का तीन बार से अधिक उपयोग नहीं किया जा सकता। ऐसा तेल स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है और कैंसर, हृदय रोग सहित अन्य बीमारियों का जोखिम बढ़ा देता है।
विज्ञापन
बैठक में विभाग ने बताया कि 30 जून 2026 तक जिले में 7,439 खाद्य व्यवसाय संचालकों का पंजीकरण तथा 419 लाइसेंस सक्रिय हैं। पिछले आठ महीनों में 75 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर 58 खाद्य नमूने जांच के लिए भेजे गए। इनमें से छह नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए, जिन पर नियमानुसार कार्रवाई की गई। इसी अवधि में 21 मामलों का निपटारा कर 6.86 लाख रुपये का जुर्माना भी वसूला गया।
बैठक में बताया कि पिछले आठ महीनों में फूड सेफ्टी ट्रेनिंग एंड सर्टिफिकेशन कार्यक्रम के तहत 252 खाद्य व्यवसाय संचालकों, मिड-डे मील और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया गया। जिले में अब तक 2,829 लोगों को खाद्य सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
विज्ञापन
होटल-ढाबों व स्ट्रीट फूड विक्रेताओं की होगी सघन जांच
दूध, पनीर, मिठाई, मसाले, तले खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग बढ़ाएं
आठ माह में 58 नमूने जांचे, छह फेल, 21 मामलों में 6.86 लाख रुपये जुर्माना
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले में अब मिलावटी और असुरक्षित खाद्य पदार्थ बेचने वालों पर प्रशासन सख्ती करेगा। होटल, रेस्तरां, ढाबों और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं के यहां नियमित निरीक्षण के साथ औचक जांच भी तेज की जाएगी। खासकर बार-बार इस्तेमाल होने वाले खाद्य तेल की जांच पर विशेष फोकस रहेगा। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ये निर्देश उपायुक्त राहुल कुमार ने बचत भवन में आयोजित जिला स्तरीय खाद्य सुरक्षा सलाहकार समिति की बैठक में दिए। उन्होंने कहा कि लोगों के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। जिले में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। उपायुक्त ने खाद्य सुरक्षा विभाग को निर्देश दिए कि दूध, पनीर, मिठाइयों, खाद्य तेल, मसालों, फिश फ्राई, पकोड़ों, समोसों सहित सभी तले हुए खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग बढ़ाई जाए, ताकि मिलावट और घटिया गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि एफएसएसएआई के दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी भी व्यावसायिक प्रतिष्ठान में एक ही खाद्य तेल का तीन बार से अधिक उपयोग नहीं किया जा सकता। ऐसा तेल स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है और कैंसर, हृदय रोग सहित अन्य बीमारियों का जोखिम बढ़ा देता है।
विज्ञापन
बैठक में विभाग ने बताया कि 30 जून 2026 तक जिले में 7,439 खाद्य व्यवसाय संचालकों का पंजीकरण तथा 419 लाइसेंस सक्रिय हैं। पिछले आठ महीनों में 75 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर 58 खाद्य नमूने जांच के लिए भेजे गए। इनमें से छह नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए, जिन पर नियमानुसार कार्रवाई की गई। इसी अवधि में 21 मामलों का निपटारा कर 6.86 लाख रुपये का जुर्माना भी वसूला गया।
बैठक में बताया कि पिछले आठ महीनों में फूड सेफ्टी ट्रेनिंग एंड सर्टिफिकेशन कार्यक्रम के तहत 252 खाद्य व्यवसाय संचालकों, मिड-डे मील और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया गया। जिले में अब तक 2,829 लोगों को खाद्य सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण दिया जा चुका है।