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Bilaspur News: याद आता है वो गुजरा हुआ जमाना से लूटी वाहवाही

Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 07 Apr 2026 11:59 PM IST
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ब्राइट फ्यूचर स्कूल में हुई कल्याण कला मंच की मासिक बैठक और संगोष्ठी
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। ब्राइट फ्यूचर पब्लिक स्कूल कंदरौर में कल्याण कला मंच बिलासपुर की मासिक बैठक एवं संगोष्ठी हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंच की अध्यक्ष तृप्ता कौर मुसाफिर ने की, जबकि महासचिव बाबू राम धीमान ने मंच संचालन किया। विशिष्ट अतिथियों में डॉ. लेखराम शर्मा, गोदावरी ठाकुर, हमीद खान, और डॉ. अनेक राम संख्यान ने शिरकत की। सबसे पहले बुद्धि सिंह चंदेल ने याद आता है वो गुजरा हुआ जमाना, आचार्य जगदीश सहोता ने मैं नहीं मेरा नहीं ये जग है, कर्मवीर कंडेरा ने तू छड़या कहदा मुंडे ने फेहर ला लया, लश्करी राम ने महलां दे थाले थाले जानदेया ओ जवाना, रविंद्र शर्मा ने बहादुरपुर धार के भाई क्या कहने, तेज राम तेजस ने मुझसे काफिर को तेरे, श्याम सुंदर सहगल ने कभी हंसी आए तो कभी रोना, जीतराम सुमन ने छड़ी दे सौना टाइम माडा आया ओ, हमीद खान ने जिनके होंठों पे हंसी का पैगाम नहीं, धर्म चंद धीमान ने मशाल की लौ है करता, बृज लाल लखनपाल ने हु नी से दो चार गल्ला रचना प्रस्तुत की।
शिव नाथ सहगल ने सुंदर गीत सुहानी रात ढल चुकी न जाने तुम कब आओगे सुनाकर सभी को भाव-विभोर कर दिया। रामपाल डोगरा ने आंखों का चित्रण करती कविता, पूजा कुमारी ने गीत सावन आया बादल छाए, सुशील पुंडीर परिंदा ने कविता मौसम हुआ बेमौसम जनाब, राकेश मनहास ने गीत सोचेंगे तुम्हें प्यार करें या ना करें, स्कूली छात्र मनीष ने साथिया बेलिया तेरे बिन गीत प्रस्तुत किया। कैप्टन सुरेंद्र शर्मा ने कविता में कला कल्याण हूं मैं बाबा जी का मंच हूं, अमरनाथ धीमान ने बीता जमाना याद रहा सह लिया सब जो तुमने कहा, मंच के महासचिव बाबू राम धीमान ने पहाड़ी में दामीं घाटी की सुरीली बोली में कविता, मंच की प्रधान तृप्ता कौर मुसाफिर ने पंजाबी में मैंनों भेज देवो धरम साल उत्ते भजां गा सत करतार, मंच के निदेशक सुरेंद्र मिन्हास ने क्या मेरा शहर फिर से मुस्कुराएगा कविता सुनाई। मंचासीन विशिष्ट अतिथियों में सर्वप्रथम डॉ. अनेक राम संख्यान ने हम यूं ही तेरी तस्वीर बनाते रहेंगे गाकर भाव-विभोर कर दिया। उसके बाद गोदावरी ठाकुर ने मंच की गतिविधियों की तारीफ करते हुए उन्हें सम्मानित करने के लिए धन्यवा0द किया।
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डॉ. लेखराम शर्मा ने कहलूरी शब्दों के विलुप्त होने की आशंका व्यक्त करते हुए बुद्धिजीवियों से अनुरोध किया कि अपने बच्चों से आम बोलचाल में पहाड़ी में बात करें। साथ ही उन्होंने कहलूर की बोली पर मंच के प्रयासों की प्रशंसा की और अपनी रचना दादे रा किरडू बाबे जो, सुनाकर खूब तालियां बटोरीं। ब्राइट फ्यूचर पब्लिक स्कूल के एमडी सुरेंद्र ठाकुर ने सभी का धन्यवाद किया। कहलूरी धाम का भी आयोजन किया गया।
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