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Bilaspur News: मानसून से पहले स्वारघाट-नेरचौक फोरलेन को सुरक्षित बनाने की कवायद तेज
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sun, 21 Jun 2026 11:29 PM IST
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बरसात की तैयारियों को लेकर फोरलेन पर थापना के पास की गई कटिंग। संवाद
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बरसात की तैयारी
26 संवेदनशील स्थलों पर चल रहा काम, रेड जोन क्षेत्रों में पहाड़ों को काट रही मशीनरी
एनएचएआई का दावा- रेड जोन और स्लाइडिंग क्षेत्रों को बरसात से पहले सुरक्षित बनाने की कोशिश
9 माइल क्षेत्र के स्थायी समाधान के लिए पुल और ग्रेविलॉफ्ट वॉल का भेजा है प्रस्ताव
मनाली तक संवेदनशील स्थलों के उपचार की योजना भी प्रक्रिया में
सरोज पाठक
बिलासपुर।
कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर मानसून से पहले 26 संवेदनशील स्थलों को सुरक्षित करने का प्रयास
बिलासपुर। मानसून का मौसम करीब आते ही कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर यात्रियों की चिंता बढ़ गई है। यह चिंता स्वारघाट से नेरचौक के बीच भूस्खलन और स्लाइडिंग जोन को लेकर है। पिछले वर्षों में इस खंड पर कई बार पत्थर गिरने और सड़क बंद होने की घटनाएं हुई थीं।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने इस बार बरसात से पहले अधिकतर संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित बनाने का दावा किया है। स्वारघाट से नेरचौक के बीच 26 से अधिक संवेदनशील स्थान चिह्नित किए गए हैं। इन स्थलों पर भूस्खलन और मलबा आने का खतरा बना रहता है। स्थायी उपचार और सुरक्षा कार्यों के लिए विस्तृत अनुमान तैयार हैं। कई स्थानों पर पहाड़ी सुरक्षा और ढलान स्थिरीकरण का काम जारी है। अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्रों में पहाड़ों की कटिंग अंदर तक की जा रही है। विभाग का लक्ष्य है कि अधिकतर कार्य मानसून से पहले पूरे हो जाएं। कुछ कार्यों की स्वीकृतियां अभी प्रक्रिया में हैं।
बता दें कि पिछले मानसून के दौरान मैहला, टाली, बलोह टोल, 9 माइल, जालोगी, थलौट, कुछ टनल एप्रोच क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित रहे थे। कई बार यातायात बाधित हुआ और सड़क बहाली में घंटों से लेकर महीनों लग गए थे। इसी को देखते हुए इस बार इन स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए जा रहे हैं। विशेष रूप से 9 माइल क्षेत्र में दीर्घकालिक समाधान के लिए पुल निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके अलावा घाटी की ओर ग्रेविलॉफ्ट वॉल बनाने की योजना भी बनाई गई है। इन कार्यों के लिए विस्तृत अनुमान तैयार कर स्वीकृति के लिए भेजा गया है।
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मनाली तक के संवेदनशील स्थलों पर भी नजर
एनएचएआई के अनुसार स्वारघाट-नेरचौक खंड के अलावा पंडोह से मनाली तक के संवेदनशील स्थलों के उपचार की योजना भी तैयार की गई है। संबंधित प्रस्ताव फिलहाल एनएचएआई मुख्यालय में समीक्षा और अनुमोदन प्रक्रिया में है। मंजूरी मिलने के बाद इन क्षेत्रों में भी चरणबद्ध तरीके से स्थायी सुरक्षा कार्य शुरू किए जाएंगे।
मशीनरी और आपात टीमें रहेंगी तैनात
प्राधिकरण का कहना है कि हिमालयी क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं की संभावना को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता, लेकिन मानसून के दौरान सड़क को अधिकतम समय तक चालू रखने के लिए आवश्यक मशीनरी, तकनीकी टीमों और आपातकालीन संसाधनों की तैनाती सुनिश्चित की जा रही है। किसी भी भूस्खलन या सड़क अवरोध की स्थिति में तत्काल बहाली के लिए विशेष व्यवस्था रहेगी।
प्रभावित क्षेत्रों में उपचार कार्य
स्वारघाट-नेरचौक खंड के अलावा मनाली तक 38 बाढ़ एवं भूस्खलन प्रभावित स्थल हैं। जालोगी और थलौट जैसे क्षेत्रों में उपचार कार्य ठेकेदारों को दिए गए हैं। यहां प्रतिधारण दीवार, ढलान स्थिरीकरण और जल निकासी सुधार जैसे काम शुरू हुए हैं। इनसे भारी बारिश में सड़क और यात्रियों को नुकसान से बचाया जा सकेगा। पिछले मानसून में मैहला, 9 माइल, जालोगी और थलौट सबसे ज्यादा प्रभावित रहे थे।
दीर्घकालिक समाधान और तैयारी
9 माइल क्षेत्र के लिए पुल निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया गया है। घाटी की ओर ग्रेविलॉफ्ट दीवार बनाने की योजना भी बनाई गई है। पंडोह से मनाली तक के संवेदनशील स्थलों के उपचार की योजना भी प्रक्रिया में है। प्राधिकरण मानसून के दौरान सड़क को चालू रखने के लिए मशीनरी और आपात टीमें तैनात करेगा। परियोजना निदेशक पीआईयू मंडी वरुण चारी के अनुसार, लक्ष्य वैज्ञानिक एवं स्थायी उपचार करना है।
कोट
यात्रियों को किसी भी दुर्घटना, सड़क अवरोध या आपात स्थिति में राष्ट्रीय राजमार्ग हेल्पलाइन 1033, स्थानीय पुलिस, जिला प्रशासन अथवा परियोजना नियंत्रण कक्ष से संपर्क किया जा सकता है। इसका लक्ष्य केवल अस्थायी मरम्मत नहीं, बल्कि कीरतपुर-मनाली फोरलेन के सभी संवेदनशील और भूस्खलन प्रभावित स्थलों का वैज्ञानिक एवं स्थायी उपचार करना है, ताकि भविष्य में मानसून के दौरान यातायात बाधित होने की घटनाओं को न्यूनतम किया जा सके। प्राधिकरण बरसात से पहले पूरे मार्ग को सुरक्षित करने में जुटा है।
वरुण चारी, परियोजना निदेशक पीआईयू मंडी
26 संवेदनशील स्थलों पर चल रहा काम, रेड जोन क्षेत्रों में पहाड़ों को काट रही मशीनरी
एनएचएआई का दावा- रेड जोन और स्लाइडिंग क्षेत्रों को बरसात से पहले सुरक्षित बनाने की कोशिश
9 माइल क्षेत्र के स्थायी समाधान के लिए पुल और ग्रेविलॉफ्ट वॉल का भेजा है प्रस्ताव
मनाली तक संवेदनशील स्थलों के उपचार की योजना भी प्रक्रिया में
सरोज पाठक
बिलासपुर।
कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर मानसून से पहले 26 संवेदनशील स्थलों को सुरक्षित करने का प्रयास
बिलासपुर। मानसून का मौसम करीब आते ही कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर यात्रियों की चिंता बढ़ गई है। यह चिंता स्वारघाट से नेरचौक के बीच भूस्खलन और स्लाइडिंग जोन को लेकर है। पिछले वर्षों में इस खंड पर कई बार पत्थर गिरने और सड़क बंद होने की घटनाएं हुई थीं।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने इस बार बरसात से पहले अधिकतर संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित बनाने का दावा किया है। स्वारघाट से नेरचौक के बीच 26 से अधिक संवेदनशील स्थान चिह्नित किए गए हैं। इन स्थलों पर भूस्खलन और मलबा आने का खतरा बना रहता है। स्थायी उपचार और सुरक्षा कार्यों के लिए विस्तृत अनुमान तैयार हैं। कई स्थानों पर पहाड़ी सुरक्षा और ढलान स्थिरीकरण का काम जारी है। अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्रों में पहाड़ों की कटिंग अंदर तक की जा रही है। विभाग का लक्ष्य है कि अधिकतर कार्य मानसून से पहले पूरे हो जाएं। कुछ कार्यों की स्वीकृतियां अभी प्रक्रिया में हैं।
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बता दें कि पिछले मानसून के दौरान मैहला, टाली, बलोह टोल, 9 माइल, जालोगी, थलौट, कुछ टनल एप्रोच क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित रहे थे। कई बार यातायात बाधित हुआ और सड़क बहाली में घंटों से लेकर महीनों लग गए थे। इसी को देखते हुए इस बार इन स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए जा रहे हैं। विशेष रूप से 9 माइल क्षेत्र में दीर्घकालिक समाधान के लिए पुल निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके अलावा घाटी की ओर ग्रेविलॉफ्ट वॉल बनाने की योजना भी बनाई गई है। इन कार्यों के लिए विस्तृत अनुमान तैयार कर स्वीकृति के लिए भेजा गया है।
मनाली तक के संवेदनशील स्थलों पर भी नजर
एनएचएआई के अनुसार स्वारघाट-नेरचौक खंड के अलावा पंडोह से मनाली तक के संवेदनशील स्थलों के उपचार की योजना भी तैयार की गई है। संबंधित प्रस्ताव फिलहाल एनएचएआई मुख्यालय में समीक्षा और अनुमोदन प्रक्रिया में है। मंजूरी मिलने के बाद इन क्षेत्रों में भी चरणबद्ध तरीके से स्थायी सुरक्षा कार्य शुरू किए जाएंगे।
मशीनरी और आपात टीमें रहेंगी तैनात
प्राधिकरण का कहना है कि हिमालयी क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं की संभावना को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता, लेकिन मानसून के दौरान सड़क को अधिकतम समय तक चालू रखने के लिए आवश्यक मशीनरी, तकनीकी टीमों और आपातकालीन संसाधनों की तैनाती सुनिश्चित की जा रही है। किसी भी भूस्खलन या सड़क अवरोध की स्थिति में तत्काल बहाली के लिए विशेष व्यवस्था रहेगी।
प्रभावित क्षेत्रों में उपचार कार्य
स्वारघाट-नेरचौक खंड के अलावा मनाली तक 38 बाढ़ एवं भूस्खलन प्रभावित स्थल हैं। जालोगी और थलौट जैसे क्षेत्रों में उपचार कार्य ठेकेदारों को दिए गए हैं। यहां प्रतिधारण दीवार, ढलान स्थिरीकरण और जल निकासी सुधार जैसे काम शुरू हुए हैं। इनसे भारी बारिश में सड़क और यात्रियों को नुकसान से बचाया जा सकेगा। पिछले मानसून में मैहला, 9 माइल, जालोगी और थलौट सबसे ज्यादा प्रभावित रहे थे।
दीर्घकालिक समाधान और तैयारी
9 माइल क्षेत्र के लिए पुल निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया गया है। घाटी की ओर ग्रेविलॉफ्ट दीवार बनाने की योजना भी बनाई गई है। पंडोह से मनाली तक के संवेदनशील स्थलों के उपचार की योजना भी प्रक्रिया में है। प्राधिकरण मानसून के दौरान सड़क को चालू रखने के लिए मशीनरी और आपात टीमें तैनात करेगा। परियोजना निदेशक पीआईयू मंडी वरुण चारी के अनुसार, लक्ष्य वैज्ञानिक एवं स्थायी उपचार करना है।
कोट
यात्रियों को किसी भी दुर्घटना, सड़क अवरोध या आपात स्थिति में राष्ट्रीय राजमार्ग हेल्पलाइन 1033, स्थानीय पुलिस, जिला प्रशासन अथवा परियोजना नियंत्रण कक्ष से संपर्क किया जा सकता है। इसका लक्ष्य केवल अस्थायी मरम्मत नहीं, बल्कि कीरतपुर-मनाली फोरलेन के सभी संवेदनशील और भूस्खलन प्रभावित स्थलों का वैज्ञानिक एवं स्थायी उपचार करना है, ताकि भविष्य में मानसून के दौरान यातायात बाधित होने की घटनाओं को न्यूनतम किया जा सके। प्राधिकरण बरसात से पहले पूरे मार्ग को सुरक्षित करने में जुटा है।
वरुण चारी, परियोजना निदेशक पीआईयू मंडी