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Bilaspur News: ईद-उल-फितर आज, जिलेभर की 34 मस्जिदों में होगी नमाज
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Fri, 20 Mar 2026 05:40 PM IST
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रमजान के 30 रोजों के बाद मनाया जाएगा खुशी का त्योहार
फितराना देकर जरूरतमंदों को शामिल करने की अपील
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। रमजान के 30 रोजे और विशेष इबादतों के पूर्ण होने के बाद मुस्लिम समुदाय शनिवार को ईद-उल-फितर का त्योहार पूरे उत्साह, श्रद्धा और भाईचारे के साथ मनाएगा। यह इस्लाम धर्म का एक प्रमुख और पवित्र त्योहार है, जो त्याग, संयम, दान और सामाजिक समरसता का संदेश देता है।
ईद-उल-फितर को खुशी और इनाम का दिन माना जाता है। पूरे रमजान के दौरान रोजेदारों द्वारा रखे गए रोजों और की गई इबादतों के बदले इस दिन अल्लाह तआला अपनी रहमतें और सवाब अता करते हैं। इस अवसर पर फितराना (दान) देने की विशेष परंपरा है, जिसके माध्यम से जरूरतमंद और गरीब तबके के लोग भी ईद की खुशियों में बराबरी से शामिल हो सकें। धार्मिक मान्यता है कि फितराना अदा किए बिना ईद की खुशी अधूरी मानी जाती है। ईद के दिन अदा की जाने वाली विशेष नमाज इसका मुख्य आकर्षण होती है। इस नमाज में समाज के सभी वर्गों के लोग अमीर-गरीब, छोटे-बड़े एक साथ इकट्ठा होकर अल्लाह की इबादत करते हैं और आपसी गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाते हैं। यह पर्व सामाजिक एकता, भाईचारे और सौहार्द का प्रतीक माना जाता है। जिले में ईद-उल-फितर के अवसर पर 34 मस्जिदों में नमाज अदा की जाएगी। मुख्य रूप से बिलासपुर की जामा मस्जिद, डियारा मस्जिद, घुमारवीं और बरठीं स्थित मस्जिदों में बड़ी संख्या में नमाजी जुटेंगे। नमाज का समय सुबह 10 से 10:30 बजे तक निर्धारित किया गया है। मस्जिदों में नमाज को लेकर सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
ईद के मौके पर घरों में विशेष पकवान बनाए जाते हैं, जिनमें मीठी सेवइयां, खीर, जर्दा, बिरयानी और कोरमा प्रमुख रूप से शामिल हैं। लोग एक-दूसरे के घर जाकर मुबारकबाद देते हैं और आपसी रिश्तों को मजबूत करते हैं। ईद-उल-फितर की शुरुआत पैगम्बर मोहम्मद द्वारा 624 ईस्वी में मदीना से की गई थी। तब से यह त्योहार पूरे विश्व में मुस्लिम समुदाय द्वारा श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। जिला मुस्लिम वेलफेयर कमेटी के प्रधान नसीम मोहम्मद, अरशाद शेख, हुसैन अली तथा प्रदेश अध्यक्ष अबीब खान ने प्रदेशवासियों को ईद-उल-फितर की मुबारकबाद देते हुए कहा कि सभी लोग इस पर्व को आपसी प्रेम, शांति और सद्भाव के साथ मनाएं तथा जरूरतमंदों की सहायता कर उन्हें भी खुशियों में शामिल करें।
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फितराना देकर जरूरतमंदों को शामिल करने की अपील
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। रमजान के 30 रोजे और विशेष इबादतों के पूर्ण होने के बाद मुस्लिम समुदाय शनिवार को ईद-उल-फितर का त्योहार पूरे उत्साह, श्रद्धा और भाईचारे के साथ मनाएगा। यह इस्लाम धर्म का एक प्रमुख और पवित्र त्योहार है, जो त्याग, संयम, दान और सामाजिक समरसता का संदेश देता है।
ईद-उल-फितर को खुशी और इनाम का दिन माना जाता है। पूरे रमजान के दौरान रोजेदारों द्वारा रखे गए रोजों और की गई इबादतों के बदले इस दिन अल्लाह तआला अपनी रहमतें और सवाब अता करते हैं। इस अवसर पर फितराना (दान) देने की विशेष परंपरा है, जिसके माध्यम से जरूरतमंद और गरीब तबके के लोग भी ईद की खुशियों में बराबरी से शामिल हो सकें। धार्मिक मान्यता है कि फितराना अदा किए बिना ईद की खुशी अधूरी मानी जाती है। ईद के दिन अदा की जाने वाली विशेष नमाज इसका मुख्य आकर्षण होती है। इस नमाज में समाज के सभी वर्गों के लोग अमीर-गरीब, छोटे-बड़े एक साथ इकट्ठा होकर अल्लाह की इबादत करते हैं और आपसी गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाते हैं। यह पर्व सामाजिक एकता, भाईचारे और सौहार्द का प्रतीक माना जाता है। जिले में ईद-उल-फितर के अवसर पर 34 मस्जिदों में नमाज अदा की जाएगी। मुख्य रूप से बिलासपुर की जामा मस्जिद, डियारा मस्जिद, घुमारवीं और बरठीं स्थित मस्जिदों में बड़ी संख्या में नमाजी जुटेंगे। नमाज का समय सुबह 10 से 10:30 बजे तक निर्धारित किया गया है। मस्जिदों में नमाज को लेकर सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
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ईद के मौके पर घरों में विशेष पकवान बनाए जाते हैं, जिनमें मीठी सेवइयां, खीर, जर्दा, बिरयानी और कोरमा प्रमुख रूप से शामिल हैं। लोग एक-दूसरे के घर जाकर मुबारकबाद देते हैं और आपसी रिश्तों को मजबूत करते हैं। ईद-उल-फितर की शुरुआत पैगम्बर मोहम्मद द्वारा 624 ईस्वी में मदीना से की गई थी। तब से यह त्योहार पूरे विश्व में मुस्लिम समुदाय द्वारा श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। जिला मुस्लिम वेलफेयर कमेटी के प्रधान नसीम मोहम्मद, अरशाद शेख, हुसैन अली तथा प्रदेश अध्यक्ष अबीब खान ने प्रदेशवासियों को ईद-उल-फितर की मुबारकबाद देते हुए कहा कि सभी लोग इस पर्व को आपसी प्रेम, शांति और सद्भाव के साथ मनाएं तथा जरूरतमंदों की सहायता कर उन्हें भी खुशियों में शामिल करें।