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Bilaspur News: जिले में धुंध का सितम, फोरलेन पर विजिबिलिटी हुई 20 मीटर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Thu, 15 Jan 2026 11:46 PM IST
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फोरलेन पर वीरवार सुबह धुंध में लाइट जलाकर वाहन चलाते चालक। संवाद
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कड़ाके की ठंड से जिले भर में जनजीवन अस्त-व्यस्त
संवाद न्यूज एजेंसी
ऋषिकेश(बिलासपुर)। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में कड़ाके की ठंड और गहरी धुंध ने रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। वीरवार की सुबह जिले में अब तक की सबसे ज्यादा धुंध की आगोश में रहा। आलम यह था कि सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण फोरलेन पर विजिबिलिटी महज 20 मीटर तक रह गई, जिससे वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
सुबह के समय फोरलेन पर धुंध इतनी ज्यादा थी कि 20 मीटर आगे देख पाना भी मुश्किल हो गया था। ऋषिकेश के पास गोबिंद सागर झील के किनारे फोरलेन पर धुंध का सबसे ज्यादा असर देखा गया। सुरक्षा के मद्देनजर वाहन चालक हेडलाइट जलाकर बेहद धीमी गति से चलते नजर आए, वहीं कुछ चालकों ने जोखिम न लेते हुए गाड़ियों को सड़क किनारे खड़ा करना ही बेहतर समझा। सुबह 10:00 बजे के बाद जब धुंध हल्की हुई, तब जाकर यातायात सामान्य हो सका। हाड़ कंपाने वाली इस ठंड और धुंध ने स्कूली बच्चों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सुबह के समय घने अंधेरे और धुंध के बीच स्कूल जाने में बच्चों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लगातार गिरते पारे के कारण बच्चों के बीमार होने के मामले भी सामने आ रहे हैं। ठंड का प्रकोप इतना अधिक था कि लोग सुबह के समय घरों में ही दुबके रहे। जब हल्की धूप निकली और धुंध छंटनी शुरू हुई, तब जाकर लोग घरों से बाहर निकले और दैनिक कार्यों में जुटे। धूप खिलने से स्थानीय लोगों को कड़ाके की ठंड से थोड़ी राहत मिली है। स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को देखते हुए डॉक्टर कार्तिकेय ने लोगों को सचेत रहने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि इस मौसम में बच्चों के जल्दी बीमार होने की संभावना होती है। बच्चों को सुबह बिस्तर से उठते ही एकदम बाहर ठंड में न ले जाएं। बचाव के लिए मास्क का प्रयोग करें और अधिक मात्रा में पानी पिएं। डॉक्टर ने जोर दिया कि इस मौसम में खुद को बचाकर रखना ही सबसे जरूरी है।
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ऋषिकेश(बिलासपुर)। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में कड़ाके की ठंड और गहरी धुंध ने रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। वीरवार की सुबह जिले में अब तक की सबसे ज्यादा धुंध की आगोश में रहा। आलम यह था कि सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण फोरलेन पर विजिबिलिटी महज 20 मीटर तक रह गई, जिससे वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
सुबह के समय फोरलेन पर धुंध इतनी ज्यादा थी कि 20 मीटर आगे देख पाना भी मुश्किल हो गया था। ऋषिकेश के पास गोबिंद सागर झील के किनारे फोरलेन पर धुंध का सबसे ज्यादा असर देखा गया। सुरक्षा के मद्देनजर वाहन चालक हेडलाइट जलाकर बेहद धीमी गति से चलते नजर आए, वहीं कुछ चालकों ने जोखिम न लेते हुए गाड़ियों को सड़क किनारे खड़ा करना ही बेहतर समझा। सुबह 10:00 बजे के बाद जब धुंध हल्की हुई, तब जाकर यातायात सामान्य हो सका। हाड़ कंपाने वाली इस ठंड और धुंध ने स्कूली बच्चों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सुबह के समय घने अंधेरे और धुंध के बीच स्कूल जाने में बच्चों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लगातार गिरते पारे के कारण बच्चों के बीमार होने के मामले भी सामने आ रहे हैं। ठंड का प्रकोप इतना अधिक था कि लोग सुबह के समय घरों में ही दुबके रहे। जब हल्की धूप निकली और धुंध छंटनी शुरू हुई, तब जाकर लोग घरों से बाहर निकले और दैनिक कार्यों में जुटे। धूप खिलने से स्थानीय लोगों को कड़ाके की ठंड से थोड़ी राहत मिली है। स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को देखते हुए डॉक्टर कार्तिकेय ने लोगों को सचेत रहने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि इस मौसम में बच्चों के जल्दी बीमार होने की संभावना होती है। बच्चों को सुबह बिस्तर से उठते ही एकदम बाहर ठंड में न ले जाएं। बचाव के लिए मास्क का प्रयोग करें और अधिक मात्रा में पानी पिएं। डॉक्टर ने जोर दिया कि इस मौसम में खुद को बचाकर रखना ही सबसे जरूरी है।
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