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Bilaspur News: कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन में अनियमितताओं पर सरकार सख्त, जांच के आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sun, 03 May 2026 11:22 PM IST
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अवैध निर्माण, मुआवजा गड़बड़ी पर मांगी एक्शन टेकन रिपोर्ट
शिकायतों के आधार पर प्रशासन को त्वरित कार्रवाई के निर्देश
वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट जल्द देने को कहा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन परियोजना से जुड़े विभिन्न मामलों में सामने आई शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) द्वारा उपायुक्त बिलासपुर को भेजे गए पत्र में कई बिंदुओं पर विस्तृत जांच करने और शीघ्र एक्शन टेकन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
जारी निर्देशों में कहा गया है कि फोरलेन मार्ग पर सड़क सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हुए किए गए अवैध निर्माणों की जांच की जाए और नियमों के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को भी जांच के दायरे में रखा गया है। शिकायतों में यह भी उल्लेख किया गया है कि मुआवजा दिए जाने के बावजूद कई स्थानों पर भवन अब भी मौजूद हैं, जो प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हैं। सरकार ने यह भी संज्ञान लिया है कि कुछ मामलों में बिजली कनेक्शन डिस्कनेक्ट किए बिना ही भवनों को गिरा दिया गया, जबकि मौके की वास्तविक स्थिति से अलग रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। ऐसे मामलों की तथ्यात्मक जांच कर जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए गए हैं। पत्र में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और विशेष भूमि अधिग्रहण इकाई बिलासपुर की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। निर्देश दिए गए हैं कि इन एजेंसियों द्वारा अपनाई गई प्रक्रियाओं की समीक्षा कर किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर उचित कार्रवाई की जाए। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय राजमार्ग-21 के कीरतपुर-नेरचौक खंड में डायवर्ट किए गए वन क्षेत्र के अंतर्गत राइट ऑफ वे पर लगाए गए आरसीसी पिलर्स का भौतिक सत्यापन करने को भी कहा गया है, ताकि निर्माण कार्य और स्वीकृतियों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
सरकार ने उपायुक्त को यह भी निर्देशित किया है कि 12 मार्च, 13 मार्च, 16 मार्च और 25 मार्च 2026 को प्राप्त शिकायतों और पत्राचार के आधार पर सभी मामलों की बिंदुवार जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट समयबद्ध तरीके से प्रस्तुत की जाए और शिकायतकर्ताओं को भी वास्तविक स्थिति से अवगत कराया जाए। प्रशासनिक स्तर पर इस पहल के बाद अब फोरलेन परियोजना से जुड़े विवादों के समाधान की दिशा में तेजी आने की उम्मीद है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी, जिससे परियोजना में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
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शिकायतों के आधार पर प्रशासन को त्वरित कार्रवाई के निर्देश
वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट जल्द देने को कहा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन परियोजना से जुड़े विभिन्न मामलों में सामने आई शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) द्वारा उपायुक्त बिलासपुर को भेजे गए पत्र में कई बिंदुओं पर विस्तृत जांच करने और शीघ्र एक्शन टेकन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
जारी निर्देशों में कहा गया है कि फोरलेन मार्ग पर सड़क सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हुए किए गए अवैध निर्माणों की जांच की जाए और नियमों के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को भी जांच के दायरे में रखा गया है। शिकायतों में यह भी उल्लेख किया गया है कि मुआवजा दिए जाने के बावजूद कई स्थानों पर भवन अब भी मौजूद हैं, जो प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हैं। सरकार ने यह भी संज्ञान लिया है कि कुछ मामलों में बिजली कनेक्शन डिस्कनेक्ट किए बिना ही भवनों को गिरा दिया गया, जबकि मौके की वास्तविक स्थिति से अलग रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। ऐसे मामलों की तथ्यात्मक जांच कर जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए गए हैं। पत्र में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और विशेष भूमि अधिग्रहण इकाई बिलासपुर की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। निर्देश दिए गए हैं कि इन एजेंसियों द्वारा अपनाई गई प्रक्रियाओं की समीक्षा कर किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर उचित कार्रवाई की जाए। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय राजमार्ग-21 के कीरतपुर-नेरचौक खंड में डायवर्ट किए गए वन क्षेत्र के अंतर्गत राइट ऑफ वे पर लगाए गए आरसीसी पिलर्स का भौतिक सत्यापन करने को भी कहा गया है, ताकि निर्माण कार्य और स्वीकृतियों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
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सरकार ने उपायुक्त को यह भी निर्देशित किया है कि 12 मार्च, 13 मार्च, 16 मार्च और 25 मार्च 2026 को प्राप्त शिकायतों और पत्राचार के आधार पर सभी मामलों की बिंदुवार जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट समयबद्ध तरीके से प्रस्तुत की जाए और शिकायतकर्ताओं को भी वास्तविक स्थिति से अवगत कराया जाए। प्रशासनिक स्तर पर इस पहल के बाद अब फोरलेन परियोजना से जुड़े विवादों के समाधान की दिशा में तेजी आने की उम्मीद है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी, जिससे परियोजना में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
