सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Bilaspur News ›   Himachal Pradesh AIIMS Bilaspur will be able to detect variants and mutations of new viruses like Corona

हिमाचल प्रदेश: एम्स बिलासपुर में लग सकेगा कोरोना जैसे नए वायरस के वेरिएंट, म्यूटेशन का पता; जानें

संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर। Published by: Ankesh Dogra Updated Wed, 04 Mar 2026 10:27 AM IST
विज्ञापन
सार

एम्स बिलासपुर के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में जल्द ही 8-कैपिलरी डीएनए सीक्वेंसर मशीन स्थापित की जाएगी। इस मशीन से कोरोना जैसे किसी भी नए वायरस के म्यूटेशन या वेरिएंट का पता अब बिलासपुर में ही लग जाएगा। पढ़ें पूरी खबर...

Himachal Pradesh AIIMS Bilaspur will be able to detect variants and mutations of new viruses like Corona
एम्स बिलासपुर - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार

एम्स बिलासपुर अब स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में और भी हाईटेक होने जा रहा है। संस्थान के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में जल्द ही 8-कैपिलरी डीएनए सीक्वेंसर मशीन स्थापित की जाएगी। लगभग एक करोड़ 10 लाख रुपये की लागत वाली इस मशीन के आने से प्रदेश के मरीजों को गंभीर और जेनेटिक बीमारियों की जांच के लिए अब दिल्ली या चंडीगढ़ के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। खास यह है कि कोरोना जैसे किसी भी नए वायरस के म्यूटेशन या वेरिएंट का पता अब बिलासपुर में ही लग जाएगा। 

Trending Videos

संस्थान ने इस मशीन की खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह मशीन सैंगर सीक्वेंसिंग तकनीक पर आधारित है, जिसे दुनिया भर में डीएनए की सटीक जांच के लिए गोल्ड स्टैंडर्ड माना जाता है। यह मशीन इंसान, वायरस या बैक्टीरिया के डीएनए की पूरी संरचना को कोड के रूप में पढ़ सकती है। इससे यह पता लगाना आसान हो जाता है कि शरीर में बीमारी की जड़ कहां है। यह मशीन पूरी तरह से ऑटोमेटिक है और एक साथ 8 अलग-अलग मरीजों के नमूनों की जांच करने में सक्षम है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

कैंसर के मरीजों के जीन में होने वाले बदलावों को पकड़कर डॉक्टर यह तय कर सकेंगे कि उन पर कौन सी दवा सबसे ज्यादा असर करेगी। बच्चों में माता-पिता से आने वाली अनुवांशिक बीमारियों जैसे थैलेसीमिया का समय रहते पता चल सकेगा। पहले जिन टेस्ट की रिपोर्ट के लिए हफ्तों इंतजार करना पड़ता था, अब वे कुछ ही घंटों या दिनों में मिल सकेंगी। डॉक्टर अस्पताल के बाहर से भी मरीज की जेनेटिक रिपोर्ट को मोबाइल या लैपटॉप पर लाइव देख सकेंगे।

इस मशीन की सबसे बड़ी खूबी यह है कि भविष्य में मरीजों की संख्या बढ़ने पर इसे अपग्रेड किया जा सकता है। इसमें वाई-फाई, यूएसबी और लैन की कनेक्टिविटी दी गई है, जिससे डेटा को सुरक्षित तरीके से स्टोर और साझा किया जा सकेगा। यह मशीन संस्थान के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी। इससे न केवल मरीजों को बेहतर डायग्नोसिस मिलेगा, बल्कि शोध के क्षेत्र में भी एम्स बिलासपुर नई ऊंचाइयों को छुएगा।

48 घंटे नहीं, 40 मिनट में आएगी संक्रमण रिपोर्ट
एम्स बिलासपुर में आने वाले मरीजों के लिए एक अच्छी खबर है। संस्थान का माइक्रोबायोलॉजी विभाग जल्द ही अत्याधुनिक ट्रूलैब रियल टाइम माइक्रो-पीसीआर मशीन से लैस होने जा रहा है। इस मशीन की सबसे बड़ी खासियत इसकी रफ्तार है, जो जांच रिपोर्ट पहले 24 से 48 घंटों में मिलती थी, वह अब मात्र 40 मिनट में उपलब्ध होगी। इससे न केवल मरीजों का समय बचेगा, बल्कि गंभीर स्थिति में तुरंत सटीक इलाज भी शुरू किया जा सकेगा।

यह मशीन एक पोर्टेबल वर्कस्टेशन की तरह है। इसकी तकनीकी खूबियां इसे प्रदेश के अन्य अस्पतालों की मशीनों से अलग बनाती हैं। यह मशीन रिचार्जेबल लिथियम बैटरी पर चलती है, जिससे ग्रामीण इलाकों या बिजली गुल होने की स्थिति में भी टेस्ट नहीं रुकेंगे। इसके साथ एक ऑटोमेटेड एक्सट्रैक्शन मॉड्यूल भी आता है। यह मशीन खुद ही नमूने (खून या स्वाब) को प्रोसेस करती है, जिससे लैब में काम करने वाले डॉक्टरों और स्टाफ को संक्रमण लगने का खतरा न्यूनतम हो जाता है। इसमें ब्लूटूथ प्रिंटर और वाई-फाई की सुविधा है, जिससे रिपोर्ट तुरंत डॉक्टर के मोबाइल या अस्पताल के सर्वर पर भेजी जा सकती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed