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AIIMS Bilaspur: एम्स में सांस की तकलीफ दूर करेंगी आधुनिक बायपैप मशीनें, मरीजों को और बेहतर मिलेगा इलाज
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर।
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Sat, 17 Jan 2026 05:00 AM IST
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सार
एम्स बिलासपुर ने मरीजों को कृत्रिम श्वसन सहायता प्रदान करने के लिए अत्याधुनिक बायपैप मशीनों को शामिल करने की तैयारी कर ली है। इन मशीनों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें दो घंटे का इनबिल्ट बैटरी बैकअप दिया गया है। इससे बिजली गुल होने की स्थिति में भी मरीज की सांसों को मिलने वाला सहारा अचानक बंद नहीं होगा। पढ़ें पूरी खबर...
एम्स बिलासपुर (फाइल फोटो)।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान बिलासपुर के कार्डियोलॉजी विभाग में अब दिल और फेफड़ों की गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को और भी बेहतर इलाज मिल सकेगा। संस्थान ने मरीजों को कृत्रिम श्वसन सहायता प्रदान करने के लिए अत्याधुनिक बायपैप मशीनों को शामिल करने की तैयारी कर ली है। ये मशीनें विशेष रूप से उन मरीजों के लिए जीवन रक्षक साबित होंगी, जिन्हें सोते समय सांस रुकने (स्लीप एपनिया) या मोटापे के कारण सांस लेने में भारी कठिनाई होती है।
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इन मशीनों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें दो घंटे का इनबिल्ट बैटरी बैकअप दिया गया है। इससे बिजली गुल होने की स्थिति में भी मरीज की सांसों को मिलने वाला सहारा अचानक बंद नहीं होगा। साथ ही, इसमें ऑक्सीजन लेवल और हवा की सांद्रता की निगरानी के लिए विशेष सेंसर लगाए गए हैं, जो मरीज की स्थिति पर पल-पल नजर रखेंगे। लंबी अवधि तक मशीन के इस्तेमाल से मरीजों के गले और नाक में सूखापन न आए, इसके लिए मशीनों में हीटेड ह्यूमिडिफायर और हीटेड ट्यूब की सुविधा दी गई है। यह तकनीक हवा में आवश्यक नमी बनाए रखती है।
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सुरक्षा के लिहाज से इसमें कई आधुनिक अलार्म सिस्टम भी हैं, जो मास्क हटने या ट्यूब ब्लॉक होने पर तुरंत डॉक्टरों को अलर्ट कर देंगे। मशीनों के साथ अलग-अलग साइज के छोटे, मध्यम और बड़े मास्क भी उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि हर आयु वर्ग के मरीज को सही फिटिंग मिल सके। मरीजों की सुविधा के साथ संस्थान ने इनकी गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया है। ये मशीनें आईएसओ और बीआईएस जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होंगी। खास बात यह है कि कंपनी को इन मशीनों पर दो साल की वारंटी और उसके बाद 6 साल तक व्यापक रखरखाव की सुविधा देनी होगी, जिससे अगले आठ वर्ष तक मरीजों को बिना किसी बाधा के यह सेवा मिलती रहे।