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Bilaspur News: लुहणू मैदान में नलवाड़ी मेले के प्लाट महंगे, कारोबारियों पर बढ़ा बोझ
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Wed, 18 Mar 2026 11:29 PM IST
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इस बार 1.34 करोड़ रुपये में नीलाम हुआ है मेला मैदान
पिछले साल से 56 प्रतिशत बढ़ोत्तरी, प्लाट आवंटन जारी
अनिल ठाकुर
बिलासपुर। राज्य स्तरीय नलवाड़ी मेला इस बार महंगे प्लाट के लिए चर्चा में है। मेले में दुकान लगाने के लिए प्लॉट के दामों में इस बार भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे छोटे-बड़े व्यापारियों की जेब पर असर पड़ता नजर आ रहा है।
पिछले साल जो दुकान 65 हजार रुपये में मिलती थी, वह इस बार बढ़कर 95 हजार रुपये तक पहुंच गई है, यानी करीब 46 प्रतिशत की बढ़ोतरी। इसी तरह 3500 रुपये वाला छोटा प्लॉट अब 7000 रुपये में मिल रहा है, जो कि सीधे 100 प्रतिशत वृद्धि दर्शाता है। वहीं 7500 रुपये की दुकान का किराया बढ़कर 10 हजार रुपये हो गया है, यानी करीब 33 प्रतिशत इजाफा हुआ है। लगातार बढ़ रही लागत को लेकर कारोबारियों में चिंता देखी जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि महंगे प्लॉट लेने के बाद मुनाफा निकालना चुनौती बन सकता है। बाहर से आए कई दुकानदारों ने बताया कि मेले में भाग लेना उनके लिए जरूरी है, लेकिन बढ़े हुए किराए के चलते उन्हें सामान के दाम बढ़ाने पड़ सकते हैं। इससे ग्राहकों पर भी असर पड़ने की आशंका है।
हालांकि मेले की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन अभी तक लुहणू मैदान पूरी तरह नहीं भर पाया है। कई जगह प्लॉट खाली नजर आ रहे हैं। इसके बावजूद कारोबारी धीरे-धीरे प्लॉट खरीद रहे हैं और उम्मीद जता रहे हैं कि आने वाले दिनों में भीड़ बढ़ने के साथ कारोबार भी रफ्तार पकड़ेगा। मेले के मैदान की नीलामी पर नजर डालें तो इस बार मैदान करीब 1.34 करोड़ रुपये में ठेके पर दिया गया है। इससे पहले 2025 में यह 86 लाख रुपये और 2024 में 95 लाख रुपये में नीलाम हुआ था। इस हिसाब से इस बार 2025 के मुकाबले करीब 56 प्रतिशत और 2024 के मुकाबले करीब 41 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ठेका राशि बढ़ने का असर सीधे प्लॉट के दामों पर पड़ा है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि नलवाड़ी मेला क्षेत्र का बड़ा पारंपरिक आयोजन है, जहां हर साल भारी भीड़ उमड़ती है। ऐसे में कारोबार की संभावनाएं तो रहती हैं, लेकिन इस बार बढ़ी हुई शुरुआती लागत ने छोटे दुकानदारों की चिंता बढ़ा दी है। उधर, कुछ व्यापारियों को उम्मीद है कि अगर मेले में भीड़ अच्छी रही तो बढ़ी हुई लागत की भरपाई हो सकती है। फिलहाल सभी की निगाहें मेले में आने वाली भीड़ और बिक्री पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में ही साफ होगा कि महंगे प्लॉट कारोबारियों के लिए फायदे का सौदा साबित होते हैं या नहीं। संवाद
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पिछले साल से 56 प्रतिशत बढ़ोत्तरी, प्लाट आवंटन जारी
अनिल ठाकुर
बिलासपुर। राज्य स्तरीय नलवाड़ी मेला इस बार महंगे प्लाट के लिए चर्चा में है। मेले में दुकान लगाने के लिए प्लॉट के दामों में इस बार भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे छोटे-बड़े व्यापारियों की जेब पर असर पड़ता नजर आ रहा है।
पिछले साल जो दुकान 65 हजार रुपये में मिलती थी, वह इस बार बढ़कर 95 हजार रुपये तक पहुंच गई है, यानी करीब 46 प्रतिशत की बढ़ोतरी। इसी तरह 3500 रुपये वाला छोटा प्लॉट अब 7000 रुपये में मिल रहा है, जो कि सीधे 100 प्रतिशत वृद्धि दर्शाता है। वहीं 7500 रुपये की दुकान का किराया बढ़कर 10 हजार रुपये हो गया है, यानी करीब 33 प्रतिशत इजाफा हुआ है। लगातार बढ़ रही लागत को लेकर कारोबारियों में चिंता देखी जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि महंगे प्लॉट लेने के बाद मुनाफा निकालना चुनौती बन सकता है। बाहर से आए कई दुकानदारों ने बताया कि मेले में भाग लेना उनके लिए जरूरी है, लेकिन बढ़े हुए किराए के चलते उन्हें सामान के दाम बढ़ाने पड़ सकते हैं। इससे ग्राहकों पर भी असर पड़ने की आशंका है।
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हालांकि मेले की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन अभी तक लुहणू मैदान पूरी तरह नहीं भर पाया है। कई जगह प्लॉट खाली नजर आ रहे हैं। इसके बावजूद कारोबारी धीरे-धीरे प्लॉट खरीद रहे हैं और उम्मीद जता रहे हैं कि आने वाले दिनों में भीड़ बढ़ने के साथ कारोबार भी रफ्तार पकड़ेगा। मेले के मैदान की नीलामी पर नजर डालें तो इस बार मैदान करीब 1.34 करोड़ रुपये में ठेके पर दिया गया है। इससे पहले 2025 में यह 86 लाख रुपये और 2024 में 95 लाख रुपये में नीलाम हुआ था। इस हिसाब से इस बार 2025 के मुकाबले करीब 56 प्रतिशत और 2024 के मुकाबले करीब 41 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ठेका राशि बढ़ने का असर सीधे प्लॉट के दामों पर पड़ा है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि नलवाड़ी मेला क्षेत्र का बड़ा पारंपरिक आयोजन है, जहां हर साल भारी भीड़ उमड़ती है। ऐसे में कारोबार की संभावनाएं तो रहती हैं, लेकिन इस बार बढ़ी हुई शुरुआती लागत ने छोटे दुकानदारों की चिंता बढ़ा दी है। उधर, कुछ व्यापारियों को उम्मीद है कि अगर मेले में भीड़ अच्छी रही तो बढ़ी हुई लागत की भरपाई हो सकती है। फिलहाल सभी की निगाहें मेले में आने वाली भीड़ और बिक्री पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में ही साफ होगा कि महंगे प्लॉट कारोबारियों के लिए फायदे का सौदा साबित होते हैं या नहीं। संवाद