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Bilaspur News: हिमाचल एंट्री टैक्स पर गरामोड़ में पंजाब किसान संगठनों ने किया प्रदर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sat, 02 May 2026 11:44 PM IST
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एंट्री टैक्स को लेकर गरामोड़ में प्रदर्शन करते पंजाब के विभिन्न संगठनों के लोग। स्रोत: जागरूक प
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तीन नंबर के लिए प्रस्तावित लीड
दोहरी वसूली के खिलाफ रोष, कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर एंट्री टैक्स हटाने की मांग
एनएचएआई से हस्तक्षेप की अपील, हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जाने की दी चेतावनी
पंजाब की कई किसान जत्थेबंदियां आंदोलन में शामिल, दो माह बाद भी नहीं हुआ समाधान
संवाद न्यूज एजेंसी
स्वारघाट(बिलासपुर)। कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर स्थित गरामोड़ में हिमाचल प्रदेश एंट्री टैक्स को लेकर शनिवार को पंजाब की विभिन्न किसान जत्थेबंदियों ने जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। किसान संगठनों ने सुबह करीब 11:20 बजे टोल प्लाजा के समीप एकत्र होकर प्रदर्शन शुरू किया और हिमाचल प्रदेश सरकार, सीएम सुक्खू के खिलाफ नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि एक ही राष्ट्रीय राजमार्ग पर दो तरह के टैक्स वसूलना पूरी तरह गलत और गैरकानूनी है। उनका कहना है कि जिस सड़क का निर्माण एनएचएआई ने किया है, उस पर पहले से टोल टैक्स लिया जा रहा है, जबकि उसी मार्ग पर हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा एंट्री टैक्स भी वसूला जा रहा है। धरने के दौरान वक्ताओं ने कहा कि लोगों का सब्र का प्याला अब छलक चुका है। एक ही नेशनल हाईवे पर दो टैक्स नहीं लगाए जा सकते, लेकिन यहां यह नियमों के खिलाफ किया जा रहा है। उन्होंने एंट्री टैक्स को गुंडा टैक्स बताते हुए इसे तत्काल समाप्त करने की मांग की। कहा कि पहले इस एंट्री टैक्स में भारी बढ़ोतरी की गई थी, जिसे विरोध के बाद कुछ कम किया गया, लेकिन इसे पूरी तरह समाप्त नहीं किया गया। उनका आरोप है कि यह वसूली गलत तरीके से की जा रही है। बताया कि इससे पहले भी इसी मुद्दे को लेकर धरना दिया गया था। उस समय प्रशासन और संबंधित पक्षों ने जल्द समाधान का आश्वासन दिया था, लेकिन लगभग दो माह बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा और जब तक समस्या का समाधान नहीं होगा, आंदोलन जारी रहेगा। कहा कि पंजाब से हजारों श्रद्धालु हिमाचल प्रदेश के विभिन्न धार्मिक स्थलों मणिकरण साहिब, श्री आनंदपुर साहिब और श्री नयना देवी जी दर्शन के लिए आते हैं। ऐसे में एंट्री टैक्स के कारण उन्हें हर बार अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता है, जिससे लोगों में रोष बढ़ रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने एंट्री टैक्स को जजिया टैक्स करार देते हुए कहा कि यह आम लोगों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ है। उन्होंने कहा कि यह केवल बाहरी लोगों ही नहीं, बल्कि सीमांत क्षेत्रों के निवासियों के लिए भी बड़ी समस्या बन गया है। जिन लोगों की रिश्तेदारी पंजाब और हिमाचल दोनों राज्यों में है, उन्हें बार-बार इन बैरियरों से गुजरना पड़ता है और हर बार टैक्स देना पड़ता है। कहा कि कई बार अंतिम संस्कार के लिए कीरतपुर साहिब स्थित पातालपुरी साहिब जाने वाले लोगों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है और टोल कर्मियों के साथ बहस की स्थिति बन जाती है। धरना स्थल पर किसानों ने एनएचएआई से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। उनका कहना है कि यह सड़क एनएचएआई के अधीन है, इसलिए उसकी जिम्मेदारी बनती है कि इस तरह की दोहरी वसूली को रोके। बताया कि इस मामले को लेकर हिमाचल हाईकोर्ट में याचिका दायर की जा चुकी है और यदि वहां से राहत नहीं मिलती है तो वे सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएंगे। धरने के दौरान पंजाब सरकार पर भी सवाल उठाए गए। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार ने रेसिप्रोकल नीति लागू करने का वादा किया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक कारणों से इस मुद्दे को नजरअंदाज किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि हिमाचल प्रदेश एंट्री टैक्स को जल्द समाप्त नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। साथ ही अन्य किसान संगठनों से भी इस संघर्ष में शामिल होने की अपील की गई।
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संवाद न्यूज एजेंसी
स्वारघाट(बिलासपुर)। कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर स्थित गरामोड़ में हिमाचल प्रदेश एंट्री टैक्स को लेकर शनिवार को पंजाब की विभिन्न किसान जत्थेबंदियों ने जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। किसान संगठनों ने सुबह करीब 11:20 बजे टोल प्लाजा के समीप एकत्र होकर प्रदर्शन शुरू किया और हिमाचल प्रदेश सरकार, सीएम सुक्खू के खिलाफ नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि एक ही राष्ट्रीय राजमार्ग पर दो तरह के टैक्स वसूलना पूरी तरह गलत और गैरकानूनी है। उनका कहना है कि जिस सड़क का निर्माण एनएचएआई ने किया है, उस पर पहले से टोल टैक्स लिया जा रहा है, जबकि उसी मार्ग पर हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा एंट्री टैक्स भी वसूला जा रहा है। धरने के दौरान वक्ताओं ने कहा कि लोगों का सब्र का प्याला अब छलक चुका है। एक ही नेशनल हाईवे पर दो टैक्स नहीं लगाए जा सकते, लेकिन यहां यह नियमों के खिलाफ किया जा रहा है। उन्होंने एंट्री टैक्स को गुंडा टैक्स बताते हुए इसे तत्काल समाप्त करने की मांग की। कहा कि पहले इस एंट्री टैक्स में भारी बढ़ोतरी की गई थी, जिसे विरोध के बाद कुछ कम किया गया, लेकिन इसे पूरी तरह समाप्त नहीं किया गया। उनका आरोप है कि यह वसूली गलत तरीके से की जा रही है। बताया कि इससे पहले भी इसी मुद्दे को लेकर धरना दिया गया था। उस समय प्रशासन और संबंधित पक्षों ने जल्द समाधान का आश्वासन दिया था, लेकिन लगभग दो माह बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा और जब तक समस्या का समाधान नहीं होगा, आंदोलन जारी रहेगा। कहा कि पंजाब से हजारों श्रद्धालु हिमाचल प्रदेश के विभिन्न धार्मिक स्थलों मणिकरण साहिब, श्री आनंदपुर साहिब और श्री नयना देवी जी दर्शन के लिए आते हैं। ऐसे में एंट्री टैक्स के कारण उन्हें हर बार अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता है, जिससे लोगों में रोष बढ़ रहा है।
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प्रदर्शनकारियों ने एंट्री टैक्स को जजिया टैक्स करार देते हुए कहा कि यह आम लोगों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ है। उन्होंने कहा कि यह केवल बाहरी लोगों ही नहीं, बल्कि सीमांत क्षेत्रों के निवासियों के लिए भी बड़ी समस्या बन गया है। जिन लोगों की रिश्तेदारी पंजाब और हिमाचल दोनों राज्यों में है, उन्हें बार-बार इन बैरियरों से गुजरना पड़ता है और हर बार टैक्स देना पड़ता है। कहा कि कई बार अंतिम संस्कार के लिए कीरतपुर साहिब स्थित पातालपुरी साहिब जाने वाले लोगों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है और टोल कर्मियों के साथ बहस की स्थिति बन जाती है। धरना स्थल पर किसानों ने एनएचएआई से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। उनका कहना है कि यह सड़क एनएचएआई के अधीन है, इसलिए उसकी जिम्मेदारी बनती है कि इस तरह की दोहरी वसूली को रोके। बताया कि इस मामले को लेकर हिमाचल हाईकोर्ट में याचिका दायर की जा चुकी है और यदि वहां से राहत नहीं मिलती है तो वे सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएंगे। धरने के दौरान पंजाब सरकार पर भी सवाल उठाए गए। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार ने रेसिप्रोकल नीति लागू करने का वादा किया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक कारणों से इस मुद्दे को नजरअंदाज किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि हिमाचल प्रदेश एंट्री टैक्स को जल्द समाप्त नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। साथ ही अन्य किसान संगठनों से भी इस संघर्ष में शामिल होने की अपील की गई।
