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Bilaspur News: फोरलेन में आंशिक संरचनाओं का रिकॉर्ड गायब, आरटीआई में भी नहीं मिली जानकारी

संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Fri, 01 May 2026 11:57 PM IST
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Records of partial structures in the four-lane road are missing, information not found even in RTI.
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भू-अर्जन अधिकारी ने 8 बिंदुओं पर दिया एक ही जवाब, सूचना उपलब्ध नहीं
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18 व 20 मार्च 2015 को तत्कालीन परियोजना निदेशक से हुई थी मुद्दों पर चर्चा

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण के दौरान आंशिक रूप से प्रभावित मकानों, भूमि और पेड़ों के मुआवजे को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। सूचना का अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में यह खुलासा हुआ है कि संबंधित रिकॉर्ड भू-अर्जन अधिकारी बिलासपुर के कार्यालय में उपलब्ध ही नहीं है।
17 अप्रैल 2026 को जारी पत्र (संख्या 279) में भू-अर्जन अधिकारी, विशेष भू-अधिग्रहण इकाई, राष्ट्रीय राजमार्ग-21 ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2015 से जुड़े मामलों की मांगी गई सूचनाएं उनके कार्यालय में उपलब्ध नहीं हैं। हैरानी की बात यह है कि आरटीआई के 8 अलग-अलग बिंदुओं पर एक ही जवाब दिया गया कि सूचना कार्यालय में उपलब्ध नहीं है। इस खुलासे के बाद 18 व 20 मार्च 2015 को तत्कालीन परियोजना निदेशक के कथित दौरे और भू-अर्जन अधिकारी के साथ हुई चर्चाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उस समय दावा किया गया था कि आंशिक रूप से प्रभावित संरचनाओं के मुआवजे और फोरलेन निर्माण में आ रही बाधाओं को लेकर विस्तृत चर्चा हुई थी। बताया गया था कि परियोजना निदेशक ने यह राय दी थी कि आंशिक रूप से प्रभावित मकानों का मुआवजा तभी दिया जाए, जब पूरी संरचना मौके से हटा दी जाए, क्योंकि पहाड़ी क्षेत्रों में आंशिक कटिंग के बाद भवन की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती। हालांकि, इन चर्चाओं और निर्णयों का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड अब तक सामने नहीं आया है। मामले में यह भी स्पष्ट नहीं है कि कुल कितने मकान आंशिक रूप से प्रभावित हुए, कितनों को मुआवजा दिया गया और कितने अभी भी जोखिम की स्थिति में हैं। जबकि हिमाचल प्रदेश के राजस्व नियमों के अनुसार, आंशिक रूप से प्रभावित संरचनाओं को नजरअंदाज करने का प्रावधान भी है। जमीनी हकीकत यह है कि कई प्रभावित परिवार आज भी दरारों वाले और असुरक्षित मकानों में रहने को मजबूर हैं।
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श्री नयना देवी जी, सदर, झंडूता और घुमारवीं क्षेत्रों में टनलों के ऊपर और कटिंग वाले इलाकों में स्थित मकान आज भी खतरनाक हालत में हैं। एनएचएआई द्वारा कई स्थानों पर बनाई गई रिटेनिंग वॉल भी जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, जिससे लोगों में डर का माहौल बना हुआ है। फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल ने कहा कि आरटीआई में रिकॉर्ड उपलब्ध न होना पूरे मामले में गंभीर अनियमितताओं की ओर इशारा करता है। कहा कि आंशिक संरचनाओं के मुआवजे में पारदर्शिता नहीं बरती गई और कई पात्र प्रभावितों को आज तक उनका हक नहीं मिला। कहा कि कुछ लोगों को लाभ पहुंचाया गया, जबकि वास्तविक प्रभावितों को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और सभी प्रभावितों को उचित मुआवजा व पुनर्वास देने की मांग की है।
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