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Bilaspur News: आठ साल पुराने समझौता डिक्री मामले में राहत
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sun, 12 Apr 2026 11:25 PM IST
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अदालत ने 155 दिन की देरी माफ कर अपील मंजूर की
2016 की समझौता डिक्री को दी गई चुनौती
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश बिलासपुर की अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में अपील दाखिल करने में हुई 155 दिन की देरी को माफ कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि देरी के पीछे पर्याप्त और विश्वसनीय कारण हो, तो केवल तकनीकी आधार पर किसी पक्षकार को न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता।
मामला वर्ष 2016 में पारित एक समझौता डिक्री से जुड़ा है, जिसे अब अपील के माध्यम से चुनौती दी गई है। अपील 18 फरवरी 2025 को दायर की गई थी, जिसके साथ देरी माफी का आवेदन भी प्रस्तुत किया गया। आवेदक ने अदालत को बताया कि वह एक गरीब व अशिक्षित ग्रामीण महिला है और उसे पूर्व में गलत कानूनी सलाह दी गई थी। इसी कारण उसने पहले गलत प्रावधान के तहत याचिका दायर कर दी, जो कई वर्षों तक लंबित रही। बाद में राष्ट्रीय लोक अदालत में इसे वापस लेकर सही कानूनी उपाय अपनाने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसके बाद प्रमाणित प्रति प्राप्त करने, कानूनी परामर्श लेने और आवश्यक दस्तावेज जुटाने में समय लगा, जिससे अपील दाखिल करने में देरी हुई। प्रतिवादियों ने देरी माफी का विरोध करते हुए कहा कि पुरानी डिक्री आपसी सहमति से हुई थी और इतने लंबे समय बाद इसे चुनौती देना कानून का दुरुपयोग है। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि डिक्री राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज हो चुकी है और देरी का पर्याप्त स्पष्टीकरण नहीं दिया गया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि पर्याप्त कारण की व्याख्या न्याय के हित में उदारता से की जानी चाहिए। अदालत ने पाया कि आवेदक लगातार अपने अधिकारों के लिए प्रयासरत रही और उसने गलत मंच पर भी मुकदमा वकील की सलाह पर बोनाफाइड तरीके से लड़ा। अदालत ने यह भी कहा कि किसी पक्षकार को उसके वकील की गलती के कारण नुकसान नहीं उठाना चाहिए और न्यायालय का उद्देश्य वास्तविक विवादों का निपटारा करना है, न कि तकनीकी आधार पर उन्हें खारिज करना।
अदालत ने 155 दिन की देरी को माफ करते हुए अपील को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया। साथ ही आवेदक पर 1000 रुपये की लागत लगाई गई है, जो प्रतिवादियों को अदा करनी होगी। मामले की मुख्य अपील पर अब 17 अप्रैल 2026 को सुनवाई होगी, जिसमें 2016 की समझौता डिक्री की वैधता पर विचार किया जाएगा।
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2016 की समझौता डिक्री को दी गई चुनौती
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश बिलासपुर की अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में अपील दाखिल करने में हुई 155 दिन की देरी को माफ कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि देरी के पीछे पर्याप्त और विश्वसनीय कारण हो, तो केवल तकनीकी आधार पर किसी पक्षकार को न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता।
मामला वर्ष 2016 में पारित एक समझौता डिक्री से जुड़ा है, जिसे अब अपील के माध्यम से चुनौती दी गई है। अपील 18 फरवरी 2025 को दायर की गई थी, जिसके साथ देरी माफी का आवेदन भी प्रस्तुत किया गया। आवेदक ने अदालत को बताया कि वह एक गरीब व अशिक्षित ग्रामीण महिला है और उसे पूर्व में गलत कानूनी सलाह दी गई थी। इसी कारण उसने पहले गलत प्रावधान के तहत याचिका दायर कर दी, जो कई वर्षों तक लंबित रही। बाद में राष्ट्रीय लोक अदालत में इसे वापस लेकर सही कानूनी उपाय अपनाने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसके बाद प्रमाणित प्रति प्राप्त करने, कानूनी परामर्श लेने और आवश्यक दस्तावेज जुटाने में समय लगा, जिससे अपील दाखिल करने में देरी हुई। प्रतिवादियों ने देरी माफी का विरोध करते हुए कहा कि पुरानी डिक्री आपसी सहमति से हुई थी और इतने लंबे समय बाद इसे चुनौती देना कानून का दुरुपयोग है। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि डिक्री राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज हो चुकी है और देरी का पर्याप्त स्पष्टीकरण नहीं दिया गया।
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दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि पर्याप्त कारण की व्याख्या न्याय के हित में उदारता से की जानी चाहिए। अदालत ने पाया कि आवेदक लगातार अपने अधिकारों के लिए प्रयासरत रही और उसने गलत मंच पर भी मुकदमा वकील की सलाह पर बोनाफाइड तरीके से लड़ा। अदालत ने यह भी कहा कि किसी पक्षकार को उसके वकील की गलती के कारण नुकसान नहीं उठाना चाहिए और न्यायालय का उद्देश्य वास्तविक विवादों का निपटारा करना है, न कि तकनीकी आधार पर उन्हें खारिज करना।
अदालत ने 155 दिन की देरी को माफ करते हुए अपील को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया। साथ ही आवेदक पर 1000 रुपये की लागत लगाई गई है, जो प्रतिवादियों को अदा करनी होगी। मामले की मुख्य अपील पर अब 17 अप्रैल 2026 को सुनवाई होगी, जिसमें 2016 की समझौता डिक्री की वैधता पर विचार किया जाएगा।