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Bilaspur News: लावारिस पशुओं से परेशानी बनी का चुनावी मुद्दा

संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Sat, 02 May 2026 11:51 PM IST
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Stray animals have become an election issue.
रामलाल शर्मा
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चुनावी मुद्दा
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घुमारवीं नगर परिषद चुनाव में फिर गरमाया लावारिस पशुओं का मुद्दा

लोग बोले- अब वादों नहीं, ठोस कार्ययोजना और स्थायी समाधान चाहिए
फसलें उजड़ रहीं, सड़कों पर बढ़ रहे हादसे, हर चुनाव में उठती है बात मगर समाधान नही

संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। नगर परिषद घुमारवीं के आगामी चुनावों में लावारिस पशुओं की समस्या एक बार फिर प्रमुख चुनावी मुद्दा बनकर उभर आई है। शहर और आसपास के क्षेत्रों में वर्षों से चली आ रही इस समस्या से लोग त्रस्त हैं और इस बार मतदाता उम्मीदवारों से केवल वादों के बजाय ठोस कार्ययोजना की मांग कर रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि हर चुनाव में उम्मीदवार आवारा पशुओं से निजात दिलाने के बड़े-बड़े दावे करते हैं। गोशाला निर्माण, पशु पकड़ने के लिए विशेष टीमें और स्थायी प्रबंधन जैसी योजनाओं की घोषणाएं होती हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही यह मुद्दा ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। नतीजतन, आज भी शहर की सड़कों, बाजारों और खेतों में लावारिस पशुओं के झुंड खुलेआम घूमते नजर आते हैं। शहर से सटे ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को इस समस्या का सबसे अधिक खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। कड़ी मेहनत से तैयार की गई फसलें रातों-रात पशुओं द्वारा नष्ट कर दी जाती हैं। किसानों का कहना है कि उन्हें फसलों की सुरक्षा के लिए पूरी रात खेतों में पहरा देना पड़ता है, फिर भी नुकसान से बचाव नहीं हो पाता। इससे उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ रहा है। वरिष्ठ नागरिक सभा के अध्यक्ष रूप लाल शर्मा ने कहा कि लावारिस पशुओं के कारण किसानों की मेहनत पूरी तरह बर्बाद हो रही है। अब लोगों को केवल आश्वासन नहीं बल्कि स्थायी समाधान चाहिए।
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इनसेट
वरिष्ठ नागरिक रूप लाल शर्मा ने कहा कि यह समस्या अब केवल कृषि तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि शहर की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन चुकी है। सड़कों पर घूमते पशुओं के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। कई लोग घायल हो चुके हैं, जबकि कुछ मामलों में जान जाने की घटनाएं भी सामने आई हैं।
इनसेट
स्थानीय दुकानदार राकेश कुमार ने कहा कि सड़कों पर घूमते पशु कभी भी हादसे का कारण बन सकते हैं। हर चुनाव में यह मुद्दा उठता है, लेकिन चुनाव के बाद इसे नजरअंदाज कर दिया जाता है। बाजारों और गलियों में पशुओं की मौजूदगी ने आम लोगों का चलना-फिरना भी कठिन हो गया है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए स्थिति ज्यादा चिंताजनक है।
इनसेट
व्यापारी दुर्गा दास ने बताया कि बाजारों में हर समय पशुओं के झुंड नजर आते हैं, जिससे लोगों को भारी परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि इस बार मतदाता ऐसे उम्मीदवार को चुनना चाहते हैं जो इस समस्या का समाधान करे।
इनसेट
वरिष्ठ नागरिक रामलाल शर्मा का कहना है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को मिलकर इस समस्या का स्थायी हल निकालना चाहिए। लावारिस पशुओं से जहां फसलों को नुकसान हो रहा है, वहीं उनके हमलों से लोगों की जान भी खतरे में है। इसके बावजूद हर पांच साल में यह मुद्दा केवल चुनावी चर्चा तक सीमित रह जाता है।

रामलाल शर्मा

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