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Bilaspur News: शिव महापुराण कथा में सुनाया शिव-पार्वती विवाह प्रसंग
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sat, 20 Jun 2026 11:34 PM IST
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बैरी मियां पंचायत में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा में मौजूद श्रद्धालु। स्रोत: आयोजक
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बैरी मियां पंचायत में चल रही श्री शिव महापुराण कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। ग्राम पंचायत बैरी मियां में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के पांचवें दिन रसिक जी महाराज ने भगवान शिव एवं माता पार्वती के दिव्य विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कथा व्यास ने माता पार्वती की कठोर तपस्या, देवर्षि नारद की भविष्यवाणी तथा भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए उनके अटूट संकल्प का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि माता पार्वती ने कठिन साधना और दृढ़ निष्ठा के बल पर भगवान शिव को प्राप्त किया, जो भक्ति, समर्पण और धैर्य का सर्वोच्च उदाहरण है। रसिक जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य गृहस्थ आश्रम में रहते हुए भी भगवान की भक्ति, सत्कर्म और वैराग्य के मार्ग पर चलकर आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त कर सकता है। उन्होंने बताया कि सच्चा वैराग्य संसार का त्याग नहीं, बल्कि संसार में रहते हुए भी ईश्वर के प्रति समर्पित भाव रखना है। कथा के दौरान भगवान शिव की अद्भुत बारात का मनोहारी वर्णन किया गया। शिवगणों, भूत-प्रेतों, देवताओं एवं ऋषि-मुनियों से सुसज्जित शिव बारात के प्रसंग को सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। शिव और पार्वती के पावन विवाह की कथा के माध्यम से भक्तों को धर्म, भक्ति और आदर्श दांपत्य जीवन का संदेश दिया गया।
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। ग्राम पंचायत बैरी मियां में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के पांचवें दिन रसिक जी महाराज ने भगवान शिव एवं माता पार्वती के दिव्य विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कथा व्यास ने माता पार्वती की कठोर तपस्या, देवर्षि नारद की भविष्यवाणी तथा भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए उनके अटूट संकल्प का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि माता पार्वती ने कठिन साधना और दृढ़ निष्ठा के बल पर भगवान शिव को प्राप्त किया, जो भक्ति, समर्पण और धैर्य का सर्वोच्च उदाहरण है। रसिक जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य गृहस्थ आश्रम में रहते हुए भी भगवान की भक्ति, सत्कर्म और वैराग्य के मार्ग पर चलकर आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त कर सकता है। उन्होंने बताया कि सच्चा वैराग्य संसार का त्याग नहीं, बल्कि संसार में रहते हुए भी ईश्वर के प्रति समर्पित भाव रखना है। कथा के दौरान भगवान शिव की अद्भुत बारात का मनोहारी वर्णन किया गया। शिवगणों, भूत-प्रेतों, देवताओं एवं ऋषि-मुनियों से सुसज्जित शिव बारात के प्रसंग को सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। शिव और पार्वती के पावन विवाह की कथा के माध्यम से भक्तों को धर्म, भक्ति और आदर्श दांपत्य जीवन का संदेश दिया गया।
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