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Bilaspur News: नशे और कानून व्यवस्था पर सरकार घिरी, त्रिलोक जमवाल का हमला

संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Sat, 21 Mar 2026 11:49 PM IST
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Trilok Jamwal attacks the government on drug abuse and law and order
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-बरमाणा में महिलाओं पर एफआईआर से लेकर सुपारी कल्चर तक उठाए सवाल
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। सदर के विधायक त्रिलोक जमवाल ने प्रदेश में नशे और कानून व्यवस्था को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर नशे के खिलाफ अभियान चलाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर नशा रोकने के लिए आगे आने वाले लोगों पर ही कार्रवाई कर दी जाती है, जिससे सरकार की नीयत पर सवाल खड़े होते हैं।
विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि गत दिसंबर में मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बिलासपुर में नशे के खिलाफ वॉकथॉन आयोजित किया गया, लेकिन उससे ठीक पहले बरमाणा क्षेत्र के लघट गांव में उन महिलाओं पर एफआईआर दर्ज कर दी गई, जो अपने गांव में नशे के खिलाफ पहरा दे रही थीं। कहा कि यह एफआईआर एक ऐसे व्यक्ति के बयान पर दर्ज की गई, जो खुद नशे के कारोबार में संलिप्त रहा है और नशा मुक्ति केंद्र में भी रह चुका है। महिलाओं ने अपने बच्चों को नशे से बचाने के लिए दिन-रात पहरा दिया, लेकिन उन्हें ही कानून के दायरे में ला दिया गया। इस कार्रवाई के विरोध में रैली निकालकर प्रदर्शन भी किया गया। अब सरकार इस मामले में गलती मानते हुए केस वापस लेने की बात कर रही है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया जा रहा कि एफआईआर दर्ज करवाने के पीछे किस कांग्रेस नेता की भूमिका थी। कहा कि प्रदेश में सुपारी माफिया कल्चर को बढ़ावा दिया जा रहा है। बिलासपुर में तीन बार गोलीकांड की घटनाएं सामने आईं और इन मामलों में एक कांग्रेस नेता के बेटे का नाम भी सामने आया, जो जेल में रह चुका है। उन्होंने कहा कि हैरानी की बात यह है कि उसी नेता को सरकार द्वारा दो निजी सुरक्षा कर्मी, आवास पर अलग सुरक्षा गार्ड और गन लाइसेंस तक प्रदान किया गया है।
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उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में होली के दौरान वही नेता सार्वजनिक रूप से पिस्तौल लहराते हुए नजर आया। त्रिलोक जमवाल ने कहा कि उस समय बिलासपुर में तैनात पुलिस अधीक्षक ने संबंधित नेता पर धक्का-मुक्की, मारपीट और सरकारी कार्य में बाधा डालने की शिकायत दी थी, लेकिन उस पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई। जमवाल ने कहा कि इन घटनाओं से सरकार की कथनी और करनी में अंतर साफ तौर पर उजागर हो गया है और प्रदेश में कानून व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।
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