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Bilaspur News: गोबिंद सागर में घटा जलस्तर, न के बराबर रह गईं वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियां
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Wed, 15 Apr 2026 11:50 PM IST
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गोबिंद सागर झील का उतरा जलस्तर। संवाद
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सांडू मैदान में बाहर आए ऐतिहासिक मंदिर, अगस्त में झील भरने पर ही लौटेगी रौनक
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। गोबिंद सागर झील का जलस्तर इन दिनों काफी नीचे पहुंच चुका है, जिससे यहां की वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियां लगभग न के बराबर रह गई हैं। कभी पर्यटकों की भीड़ से गुलजार रहने वाली झील में अब सन्नाटा सा पसरा हुआ है और जल क्रीड़ाओं का संचालन नाममात्र ही रह गया है।
झील में पानी की कमी का सबसे ज्यादा असर बोटिंग, जेट स्की, कयाकिंग और अन्य वाटर स्पोर्ट्स पर पड़ा है। जिन स्थानों पर पहले नावें चलती थीं, वहां अब गाद और सूखी जमीन नजर आ रही है। संचालकों के अनुसार पानी का स्तर इतना कम हो गया है कि सुरक्षा के लिहाज से भी गतिविधियां चलाना मुश्किल हो गया है। यही कारण है कि अधिकांश गतिविधियां या तो बंद कर दी गई हैं या बेहद सीमित स्तर पर संचालित हो रही हैं। पर्यटन से जुड़े स्थानीय युवाओं और कारोबारियों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बन गई है। कई लोग जो सीजन में वाटर स्पोर्ट्स से अच्छी आमदनी कर लेते थे, अब खाली बैठे हैं। हर साल गर्मियों में जलस्तर घटने से गतिविधियां कुछ हद तक प्रभावित होती हैं, लेकिन इस बार गिरावट अधिक होने के कारण हालात सामान्य से ज्यादा खराब हैं। पर्यटकों को आकर्षित करने वाली प्रमुख गतिविधियां ही प्रभावित हो जाने से झील क्षेत्र की रौनक फीकी पड़ गई है। इसी बीच जलस्तर घटने का एक अलग दृश्य भी सांडू मैदान क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। कहलूर रियासत के ऐतिहासिक मंदिर, जो साल के अधिकांश समय पानी में डूबे रहते हैं, अब पूरी तरह बाहर आ गए हैं। रंगनाथ, नारदेश्वर, मुरली मनोहर और गोपाल मंदिर सहित कई प्राचीन धरोहरों तक अब लोग पैदल पहुंच रहे हैं। छठी से 17वीं सदी की शिखर शैली में बने ये मंदिर इतिहास की झलक जरूर दिखा रहे हैं, लेकिन इनके आसपास जमा गाद और अव्यवस्था संरक्षण की कमी को भी उजागर कर रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिरों का बाहर आना हर साल का दृश्य है। इससे जहां एक ओर ऐतिहासिक धरोहरें उजागर हुई हैं, वहीं दूसरी ओर पर्यटन की मुख्य धुरी वाटर स्पोर्ट्स लगभग ठहर सी गई है। पर्यटन कारोबारियों को अब मानसून और अगस्त महीने का इंतजार है। हर साल बारिश के बाद जब झील का जलस्तर बढ़ता है, तब वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियां फिर से रफ्तार पकड़ती हैं और पर्यटकों की आवाजाही बढ़ जाती है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार भी अगस्त के बाद हालात सुधरेंगे और झील क्षेत्र में फिर से चहल-पहल लौटेगी। फिलहाल, गोबिंद सागर झील में घटते जलस्तर ने साफ कर दिया है कि इस क्षेत्र की पर्यटन गतिविधियां पूरी तरह पानी पर निर्भर हैं। जब तक झील में पर्याप्त जल नहीं होगा, तब तक वाटर स्पोर्ट्स और उससे जुड़ा पूरा कारोबार प्रभावित ही रहेगा।
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बिलासपुर। गोबिंद सागर झील का जलस्तर इन दिनों काफी नीचे पहुंच चुका है, जिससे यहां की वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियां लगभग न के बराबर रह गई हैं। कभी पर्यटकों की भीड़ से गुलजार रहने वाली झील में अब सन्नाटा सा पसरा हुआ है और जल क्रीड़ाओं का संचालन नाममात्र ही रह गया है।
झील में पानी की कमी का सबसे ज्यादा असर बोटिंग, जेट स्की, कयाकिंग और अन्य वाटर स्पोर्ट्स पर पड़ा है। जिन स्थानों पर पहले नावें चलती थीं, वहां अब गाद और सूखी जमीन नजर आ रही है। संचालकों के अनुसार पानी का स्तर इतना कम हो गया है कि सुरक्षा के लिहाज से भी गतिविधियां चलाना मुश्किल हो गया है। यही कारण है कि अधिकांश गतिविधियां या तो बंद कर दी गई हैं या बेहद सीमित स्तर पर संचालित हो रही हैं। पर्यटन से जुड़े स्थानीय युवाओं और कारोबारियों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बन गई है। कई लोग जो सीजन में वाटर स्पोर्ट्स से अच्छी आमदनी कर लेते थे, अब खाली बैठे हैं। हर साल गर्मियों में जलस्तर घटने से गतिविधियां कुछ हद तक प्रभावित होती हैं, लेकिन इस बार गिरावट अधिक होने के कारण हालात सामान्य से ज्यादा खराब हैं। पर्यटकों को आकर्षित करने वाली प्रमुख गतिविधियां ही प्रभावित हो जाने से झील क्षेत्र की रौनक फीकी पड़ गई है। इसी बीच जलस्तर घटने का एक अलग दृश्य भी सांडू मैदान क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। कहलूर रियासत के ऐतिहासिक मंदिर, जो साल के अधिकांश समय पानी में डूबे रहते हैं, अब पूरी तरह बाहर आ गए हैं। रंगनाथ, नारदेश्वर, मुरली मनोहर और गोपाल मंदिर सहित कई प्राचीन धरोहरों तक अब लोग पैदल पहुंच रहे हैं। छठी से 17वीं सदी की शिखर शैली में बने ये मंदिर इतिहास की झलक जरूर दिखा रहे हैं, लेकिन इनके आसपास जमा गाद और अव्यवस्था संरक्षण की कमी को भी उजागर कर रही है।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिरों का बाहर आना हर साल का दृश्य है। इससे जहां एक ओर ऐतिहासिक धरोहरें उजागर हुई हैं, वहीं दूसरी ओर पर्यटन की मुख्य धुरी वाटर स्पोर्ट्स लगभग ठहर सी गई है। पर्यटन कारोबारियों को अब मानसून और अगस्त महीने का इंतजार है। हर साल बारिश के बाद जब झील का जलस्तर बढ़ता है, तब वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियां फिर से रफ्तार पकड़ती हैं और पर्यटकों की आवाजाही बढ़ जाती है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार भी अगस्त के बाद हालात सुधरेंगे और झील क्षेत्र में फिर से चहल-पहल लौटेगी। फिलहाल, गोबिंद सागर झील में घटते जलस्तर ने साफ कर दिया है कि इस क्षेत्र की पर्यटन गतिविधियां पूरी तरह पानी पर निर्भर हैं। जब तक झील में पर्याप्त जल नहीं होगा, तब तक वाटर स्पोर्ट्स और उससे जुड़ा पूरा कारोबार प्रभावित ही रहेगा।
