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Chamba News: पांच दिन से अंधेरे में पांगी में 19 पंचायतें
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Wed, 25 Mar 2026 10:46 PM IST
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चंबा के पांगी में भूस्खलन के चलते क्षतिग्रस्त पावर प्रोजेक्ट की नहर।स्रोत जागरूक पाठक
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भारी बारिश और भूस्खलन से मलबे में तबदील हो चुका है पावर हाउस का चैंबर
युद्ध स्तर पर चल रहा मरम्मत का कार्य, लोगों को अभी करना होगा लंबा इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी
पांगी (चंबा)। जनजातीय क्षेत्र पांगी इन दिनों बिजली संकट के दौर से गुजर रहा है। पिछले पांच दिन से क्षेत्र की 19 पंचायतों में अंधेरा पसरा है।
साच घराट स्थित 900 किलोवाट का पावर हाउस बीते दिनों हुई भारी बर्फबारी और भूस्खलन के कारण बंद है। पावर हाउस के चैंबर पर चट्टानें गिरने से करीब 30 मीटर का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है। पांगी में मौजूदा समय में कुल 78 ट्रांसफार्मर पूरी तरह से बंद हैं। प्रशासन और बिजली बोर्ड ने वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर कुछ छोटे पावर हाउस चालू रखे हैं।
वर्तमान में 300 किलोवाट का महालू नाला, 100 किलोवाट पुर्थी और 100 किलोवाट सुराल पावर हाउस बिजली उत्पादन कर रहे है। पानी की भारी कमी के कारण वोल्टेज स्टेबल नहीं हो रही है। लोड शेडिंग का आलम यह है कि बोर्ड प्रबंधन चाहकर भी सभी घरों को रोशनी नहीं दे पा रहा है। जनता की बुनियादी जरूरतों को देखते हुए बोर्ड दिन में केवल एक घंटे के लिए बिजली दे रहा है। जिससे लोग अपने मोबाइल फोन और अन्य जरूरी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण चार्ज कर सकें।
बावजूद इसके 19 पंचायतों के हजारों लोग अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। बिजली व्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के लिए बिजली बोर्ड के कर्मचारी पिछले पांच दिन से चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में जुटे हुए हैं। क्षतिग्रस्त चेंबर की मरम्मत का काम वीरवार तक पूरा कर लिया जाएगा। तकनीकी मानकों के अनुसार कंक्रीट और सीमेंट के इस ढांचे को पूरी तरह मजबूत होने और लोड सहने के लायक बनने में कम से कम 12 से 15 दिन का समय लगेगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि चेंबर तैयार होने के बावजूद अगले दो सप्ताह तक पांगी की जनता को बिजली कटौती का सामना करना पड़ सकता है।
बिजली बोर्ड मंडल पांगी के अधिशासी अभियंता सुनील चंदेल ने बताया कि भूस्खलन ने पावर हाउस के ढांचे को काफी नुकसान पहुंचाया है। टीम वीरवार तक चेंबर को ठीक कर देगी लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से अगले 12 दिन तक इसमें पानी नहीं छोड़ा जाएगा। जब सीमेंट पूरी तरह सेट और मजबूत हो जाएगा, उसके बाद ही पावर हाउस को फुल कैपेसिटी पर चलाकर बिजली व्यवस्था बहाल की जाएगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पांगी (चंबा)। जनजातीय क्षेत्र पांगी इन दिनों बिजली संकट के दौर से गुजर रहा है। पिछले पांच दिन से क्षेत्र की 19 पंचायतों में अंधेरा पसरा है।
साच घराट स्थित 900 किलोवाट का पावर हाउस बीते दिनों हुई भारी बर्फबारी और भूस्खलन के कारण बंद है। पावर हाउस के चैंबर पर चट्टानें गिरने से करीब 30 मीटर का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है। पांगी में मौजूदा समय में कुल 78 ट्रांसफार्मर पूरी तरह से बंद हैं। प्रशासन और बिजली बोर्ड ने वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर कुछ छोटे पावर हाउस चालू रखे हैं।
वर्तमान में 300 किलोवाट का महालू नाला, 100 किलोवाट पुर्थी और 100 किलोवाट सुराल पावर हाउस बिजली उत्पादन कर रहे है। पानी की भारी कमी के कारण वोल्टेज स्टेबल नहीं हो रही है। लोड शेडिंग का आलम यह है कि बोर्ड प्रबंधन चाहकर भी सभी घरों को रोशनी नहीं दे पा रहा है। जनता की बुनियादी जरूरतों को देखते हुए बोर्ड दिन में केवल एक घंटे के लिए बिजली दे रहा है। जिससे लोग अपने मोबाइल फोन और अन्य जरूरी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण चार्ज कर सकें।
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बावजूद इसके 19 पंचायतों के हजारों लोग अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। बिजली व्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के लिए बिजली बोर्ड के कर्मचारी पिछले पांच दिन से चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में जुटे हुए हैं। क्षतिग्रस्त चेंबर की मरम्मत का काम वीरवार तक पूरा कर लिया जाएगा। तकनीकी मानकों के अनुसार कंक्रीट और सीमेंट के इस ढांचे को पूरी तरह मजबूत होने और लोड सहने के लायक बनने में कम से कम 12 से 15 दिन का समय लगेगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि चेंबर तैयार होने के बावजूद अगले दो सप्ताह तक पांगी की जनता को बिजली कटौती का सामना करना पड़ सकता है।
बिजली बोर्ड मंडल पांगी के अधिशासी अभियंता सुनील चंदेल ने बताया कि भूस्खलन ने पावर हाउस के ढांचे को काफी नुकसान पहुंचाया है। टीम वीरवार तक चेंबर को ठीक कर देगी लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से अगले 12 दिन तक इसमें पानी नहीं छोड़ा जाएगा। जब सीमेंट पूरी तरह सेट और मजबूत हो जाएगा, उसके बाद ही पावर हाउस को फुल कैपेसिटी पर चलाकर बिजली व्यवस्था बहाल की जाएगी।