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Chamba News: रावी की लहरों में पोते को तलाश रहीं दादा की आंखें
Mon, 17 Aug 2026 10:42 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Mon, 17 Aug 2026 10:42 PM IST
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रावी नदी के किनारों से लेकर चमेरा बांध के जल क्षेत्र तक भटक रहे परिजन
10 अगस्त की रात को लापता हुआ था मासूम, हर गुजरते दिन के साथ बढ़ रही बेचैनी
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। रावी नदी में पिता की ओर से मासूम को फेंके जाने की घटना के बाद से परिवार की दुनिया जैसे थम गई है। 10 अगस्त की रात से लापता बच्चे की तलाश में परिजन रावी नदी के किनारों से लेकर चमेरा बांध के जल क्षेत्र तक लगातार भटक रहे हैं।
हर संभावित स्थान पर नजर दौड़ाई जा रही है। उम्मीद अब भी यही है कि कहीं से मासूम का कोई सुराग मिल जाए और इस इंतजार का अंत हो।
पोते की तलाश में दादा भी परिवार के साथ दिनभर नदी किनारे घूम रहे हैं। उम्र और थकान उनके कदमों को रोक नहीं पा रही है। उनकी आंखें रावी की हर लहर और किनारे के हर हिस्से में पोते को तलाश रही हैं। कभी किसी स्थान पर रुककर नदी को निहारते हैं तो कभी आगे बढ़कर किनारे की जांच करने लगते हैं। चेहरे पर चिंता और आंखों में उम्मीद साफ दिखाई देती है।
परिजनों का कहना है कि जब तक बच्चे का पता नहीं चलता, उनकी तलाश जारी रहेगी। नदी का तेज बहाव और चमेरा बांध का विशाल जल क्षेत्र खोज अभियान को चुनौतीपूर्ण बना रहा है। इसके बावजूद परिवार के लोग संभावित स्थानों पर लगातार तलाश कर रहे हैं।
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जिस मासूम की किलकारियों से घर में खुशियां थीं, उसी की तलाश में अब परिवार की निगाहें नदी पर टिकी हैं। हर गुजरता दिन परिजनों की बेचैनी बढ़ा रहा है, लेकिन उम्मीद अभी भी बाकी है। परिवार को भरोसा है कि किसी न किसी तरह मासूम का पता चलेगा और लंबे इंतजार का अंत होगा।
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10 अगस्त की रात को लापता हुआ था मासूम, हर गुजरते दिन के साथ बढ़ रही बेचैनी
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। रावी नदी में पिता की ओर से मासूम को फेंके जाने की घटना के बाद से परिवार की दुनिया जैसे थम गई है। 10 अगस्त की रात से लापता बच्चे की तलाश में परिजन रावी नदी के किनारों से लेकर चमेरा बांध के जल क्षेत्र तक लगातार भटक रहे हैं।
हर संभावित स्थान पर नजर दौड़ाई जा रही है। उम्मीद अब भी यही है कि कहीं से मासूम का कोई सुराग मिल जाए और इस इंतजार का अंत हो।
पोते की तलाश में दादा भी परिवार के साथ दिनभर नदी किनारे घूम रहे हैं। उम्र और थकान उनके कदमों को रोक नहीं पा रही है। उनकी आंखें रावी की हर लहर और किनारे के हर हिस्से में पोते को तलाश रही हैं। कभी किसी स्थान पर रुककर नदी को निहारते हैं तो कभी आगे बढ़कर किनारे की जांच करने लगते हैं। चेहरे पर चिंता और आंखों में उम्मीद साफ दिखाई देती है।
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परिजनों का कहना है कि जब तक बच्चे का पता नहीं चलता, उनकी तलाश जारी रहेगी। नदी का तेज बहाव और चमेरा बांध का विशाल जल क्षेत्र खोज अभियान को चुनौतीपूर्ण बना रहा है। इसके बावजूद परिवार के लोग संभावित स्थानों पर लगातार तलाश कर रहे हैं।
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जिस मासूम की किलकारियों से घर में खुशियां थीं, उसी की तलाश में अब परिवार की निगाहें नदी पर टिकी हैं। हर गुजरता दिन परिजनों की बेचैनी बढ़ा रहा है, लेकिन उम्मीद अभी भी बाकी है। परिवार को भरोसा है कि किसी न किसी तरह मासूम का पता चलेगा और लंबे इंतजार का अंत होगा।