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Chamba News: जलविद्युत परियोजना की साइटें बंद करने का एलान
Mon, 29 Jun 2026 10:36 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Mon, 29 Jun 2026 10:36 AM IST
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चुराह (चंबा)। चुराह उपमंडल की देहरा और चांजू पंचायतों ने 48 मेगावाट एमकेबी जियोटेक जलविद्युत परियोजना में कार्यरत श्रमिकों की लंबित मांगों के समर्थन में कड़ा रुख अपनाया है। दोनों पंचायतों की कार्यकारिणी ने श्रमिकों की समस्याओं को गंभीर बताते हुए परियोजना की सभी कार्य साइटों को बंद करने का प्रस्ताव पारित किया है।
देहरा पंचायत के उपप्रधान प्रेम सिंह ने बताया कि जब तक श्रमिकों की मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक परियोजना का कार्य शुरू नहीं होने दिया जाएगा। कंपनी प्रबंधन को भेजे गए पत्र में पंचायतों ने कहा है कि श्रमिकों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
इसके अलावा पिछले वर्ष के ले-ऑफ का भुगतान, सरकार द्वारा बढ़ाई गई दिहाड़ी का लाभ और कर्मचारियों के ईपीएफ से जुड़े मामलों का भी अब तक समाधान नहीं किया गया है। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि इन मुद्दों को लेकर कंपनी प्रबंधन और सीटू यूनियन के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। उनका आरोप है कि कंपनी प्रबंधन ने श्रमिकों से किए गए कई आश्वासन भी पूरे नहीं किए हैं।
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इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए देहरा और चांजू पंचायतों की कार्यकारिणी ने निर्णय लिया है कि जब तक श्रमिकों का लंबित भुगतान नहीं किया जाता, समय पर वेतन सुनिश्चित नहीं होता, सुरक्षा संबंधी सुविधाएं उपलब्ध नहीं करवाई जातीं और लंबे समय से काम से बाहर किए गए श्रमिकों को दोबारा कार्य पर नहीं बुलाया जाता, तब तक परियोजना की सभी कार्य साइटें बंद रखी जाएंगी।
पंचायत प्रतिनिधियों ने कंपनी प्रबंधन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि किसी भी श्रमिक पर जबरन काम करने का दबाव बनाया गया तो उसकी पूरी जिम्मेदारी कंपनी की होगी। पंचायतों ने उम्मीद जताई कि प्रबंधन श्रमिकों की मांगों का शीघ्र समाधान कर विवाद का शांतिपूर्ण निपटारा करेगा।
उधर, कंपनी के प्रबंधक त्रिमनल कुमार का कहना है कि आरए बिल फंसने की वजह से एचओबी कर्मियों का वेतन रोका गया है। स्थानीय श्रमिकों के वेतन का भुगतान कर दिया गया है। श्रमिकों की मांगों को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है।
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देहरा पंचायत के उपप्रधान प्रेम सिंह ने बताया कि जब तक श्रमिकों की मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक परियोजना का कार्य शुरू नहीं होने दिया जाएगा। कंपनी प्रबंधन को भेजे गए पत्र में पंचायतों ने कहा है कि श्रमिकों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
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इसके अलावा पिछले वर्ष के ले-ऑफ का भुगतान, सरकार द्वारा बढ़ाई गई दिहाड़ी का लाभ और कर्मचारियों के ईपीएफ से जुड़े मामलों का भी अब तक समाधान नहीं किया गया है। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि इन मुद्दों को लेकर कंपनी प्रबंधन और सीटू यूनियन के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। उनका आरोप है कि कंपनी प्रबंधन ने श्रमिकों से किए गए कई आश्वासन भी पूरे नहीं किए हैं।
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इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए देहरा और चांजू पंचायतों की कार्यकारिणी ने निर्णय लिया है कि जब तक श्रमिकों का लंबित भुगतान नहीं किया जाता, समय पर वेतन सुनिश्चित नहीं होता, सुरक्षा संबंधी सुविधाएं उपलब्ध नहीं करवाई जातीं और लंबे समय से काम से बाहर किए गए श्रमिकों को दोबारा कार्य पर नहीं बुलाया जाता, तब तक परियोजना की सभी कार्य साइटें बंद रखी जाएंगी।
पंचायत प्रतिनिधियों ने कंपनी प्रबंधन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि किसी भी श्रमिक पर जबरन काम करने का दबाव बनाया गया तो उसकी पूरी जिम्मेदारी कंपनी की होगी। पंचायतों ने उम्मीद जताई कि प्रबंधन श्रमिकों की मांगों का शीघ्र समाधान कर विवाद का शांतिपूर्ण निपटारा करेगा।
उधर, कंपनी के प्रबंधक त्रिमनल कुमार का कहना है कि आरए बिल फंसने की वजह से एचओबी कर्मियों का वेतन रोका गया है। स्थानीय श्रमिकों के वेतन का भुगतान कर दिया गया है। श्रमिकों की मांगों को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है।