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Chamba News: कफन में लौटा घर से रोटी कमाने गया अरुण
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sun, 24 May 2026 10:43 PM IST
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अंबाला में मारे गए बलेरा के अरुण कुमार का फाइल फोटो
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हरियाणा के अंबाला में थाना मोड़ा क्षेत्र के पास अरुण की लूटपाट के इरादे से कर दी हत्या
डलहौजी की बलेरा पंचायत के धार गांव के अरुण की मौत ने पूरे इलाके को झकझोरा
संवाद न्यूज एजेंसी
बनीखेत (चंबा)। उपमंडल डलहौजी की बलेरा पंचायत के गांव धार का 30 वर्षीय अरुण कुमार अब कभी घर की चौखट पर दस्तक नहीं देगा।
वह परिवार के बेहतर भविष्य के सपने लेकर घर से बाहर कमाने गया था। वही अरुण कफन में लिपटकर लौट रहा है। उसकी मौत की खबर ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। शनिवार को हरियाणा के अंबाला में थाना मोड़ा क्षेत्र के पास अरुण की हत्या कर दी गई। बताया जा रहा है कि अरुण जसूर के किसी ट्रक मालिक के पास ड्राइवर की नौकरी करता था। शनिवार को ट्रक में सामान लेकर हाईवे की ओर निकलने की तैयारी कर रहा था। तभी कुछ लोगों ने ट्रक रुकवाया और लूटपाट के इरादे से उस पर हमला कर दिया। हमले में अरुण की मौके पर ही मौत हो गई। रविवार को अंबाला में पोस्टमार्टम के बाद अरुण का शव परिजनों को सौंपा गया। रविवार शाम तक अरुण का शव बलेरा नहीं पहुंचा है। सोमवार को गांव में उसका अंतिम संस्कार होगा।
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... पांच का बेटा और दो साल की है बेटी
अरुण की मौत केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं है, बल्कि पूरे परिवार के सपनों का टूट जाना है। वह अपने पीछे बूढ़े माता-पिता, पत्नी, दो छोटे बच्चों और दो छोटे भाइयों को छोड़ गया है। उसका बेटा पांच और बेटी दो साल की की है। मासूम बच्चों को अभी यह भी समझ नहीं कि उनके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ चुका है।
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... बिलख रहे माता पिता, नहीं थम रहे पत्नी की आंखों के आंसू
गांव के लोग बताते हैं कि अरुण मेहनती और मिलनसार था। घर से दूर नौकरी करने गया था। उसे क्या पता था कि रोजी-रोटी कमाने का यह सफर उसकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा। बूढ़े माता-पिता बार-बार बेटे का नाम लेकर बिलख रहे हैं। पत्नी की आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। गांव में हर किसी की जुबान पर बस एक ही बात है कुछ दिन पहले तक अरुण हंसता-खेलता लोगों के बीच था, किसी ने नहीं सोचा था कि वह इस तरह हमेशा के लिए चला जाएगा। सबसे बड़ी चिंता अब उसके बच्चों के भविष्य को लेकर है। अरुण ही परिवार में अकेला कमाने वाला था। उसकी मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। अब गांव के लोग और रिश्तेदार परिवार को संभालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अरुण की कमी कभी पूरी नहीं हो पाएगी। रोटी कमाने घर से निकला अरुण अब कभी वापस नहीं आएगा लेकिन पीछे छोड़ गया है दर्द, आंसू और जिंदगी भर का खालीपन।
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डलहौजी की बलेरा पंचायत के धार गांव के अरुण की मौत ने पूरे इलाके को झकझोरा
संवाद न्यूज एजेंसी
बनीखेत (चंबा)। उपमंडल डलहौजी की बलेरा पंचायत के गांव धार का 30 वर्षीय अरुण कुमार अब कभी घर की चौखट पर दस्तक नहीं देगा।
वह परिवार के बेहतर भविष्य के सपने लेकर घर से बाहर कमाने गया था। वही अरुण कफन में लिपटकर लौट रहा है। उसकी मौत की खबर ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। शनिवार को हरियाणा के अंबाला में थाना मोड़ा क्षेत्र के पास अरुण की हत्या कर दी गई। बताया जा रहा है कि अरुण जसूर के किसी ट्रक मालिक के पास ड्राइवर की नौकरी करता था। शनिवार को ट्रक में सामान लेकर हाईवे की ओर निकलने की तैयारी कर रहा था। तभी कुछ लोगों ने ट्रक रुकवाया और लूटपाट के इरादे से उस पर हमला कर दिया। हमले में अरुण की मौके पर ही मौत हो गई। रविवार को अंबाला में पोस्टमार्टम के बाद अरुण का शव परिजनों को सौंपा गया। रविवार शाम तक अरुण का शव बलेरा नहीं पहुंचा है। सोमवार को गांव में उसका अंतिम संस्कार होगा।
... पांच का बेटा और दो साल की है बेटी
अरुण की मौत केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं है, बल्कि पूरे परिवार के सपनों का टूट जाना है। वह अपने पीछे बूढ़े माता-पिता, पत्नी, दो छोटे बच्चों और दो छोटे भाइयों को छोड़ गया है। उसका बेटा पांच और बेटी दो साल की की है। मासूम बच्चों को अभी यह भी समझ नहीं कि उनके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ चुका है।
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... बिलख रहे माता पिता, नहीं थम रहे पत्नी की आंखों के आंसू
गांव के लोग बताते हैं कि अरुण मेहनती और मिलनसार था। घर से दूर नौकरी करने गया था। उसे क्या पता था कि रोजी-रोटी कमाने का यह सफर उसकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा। बूढ़े माता-पिता बार-बार बेटे का नाम लेकर बिलख रहे हैं। पत्नी की आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। गांव में हर किसी की जुबान पर बस एक ही बात है कुछ दिन पहले तक अरुण हंसता-खेलता लोगों के बीच था, किसी ने नहीं सोचा था कि वह इस तरह हमेशा के लिए चला जाएगा। सबसे बड़ी चिंता अब उसके बच्चों के भविष्य को लेकर है। अरुण ही परिवार में अकेला कमाने वाला था। उसकी मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। अब गांव के लोग और रिश्तेदार परिवार को संभालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अरुण की कमी कभी पूरी नहीं हो पाएगी। रोटी कमाने घर से निकला अरुण अब कभी वापस नहीं आएगा लेकिन पीछे छोड़ गया है दर्द, आंसू और जिंदगी भर का खालीपन।