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Chamba News: वादों की सुरंग में गुम हो गई होली-उतराला सड़क
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sun, 24 May 2026 10:48 PM IST
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होली से उतराला के लिए यहां से प्रस्तावित है सड़क। मुद्दा संबंधी।
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आज भी अधूरी उम्मीद की तरह खड़ी है कागजों, भाषणों और चुनावी वादों में जिंदा रही महत्वपूर्ण सड़क
43 साल में सिर्फ 17 किमी बनी, सड़क बनने से 350 से घटकर 65 किमी रहेगी होली से उतराला की दूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
होली (चंबा)। चार दशक से भी ज्यादा समय से कागजों, भाषणों और चुनावी वादों में जिंदा होली-उतराला सड़क आज भी जमीन पर अधूरी उम्मीद की तरह है।
जनजातीय क्षेत्र भरमौर और होली को कांगड़ा से जोड़ने वाला यह मार्ग विकास की जिस रफ्तार का प्रतीक बनना चाहिए था, वह राजनीति की घोषणाओं और टनल के वादों के बीच उलझकर रह गया है। कभी सुरंग के सपने दिखाए गए, कभी नए रूट के नाम पर आश्वासन दिए गए लेकिन असल निर्माण आज भी 17 किलोमीटर की अधूरी हकीकत तक सीमित है। नतीजा यह है कि जहां यह सड़क दोनों जिलों के बीच दूरी को सैकड़ों किलोमीटर से घटाकर कुछ ही किलोमीटर कर सकती थी, वहां लोग आज भी लंबा और कठिन सफर तय करने को मजबूर हैं। होली से उतराला की दूरी करीब 350 किमी है। सड़क के बनने से यह दूरी करीब 65 किमी रह जाएगी।
खड़ामुख-सुरेई पास-एहजू सड़क के निर्माण का सपना वर्ष 1978 के आसपास देखा गया। 43 वर्ष बाद भी यह सड़क मूर्तरूप नहीं ले पाई है। इतना जरूर हुआ कि सड़क का निर्माण एहजू के बजाय चन्नी ब्रिज-लाके वाली माता-जालसू जोत कर दिया गया। इस निर्माण को लेकर प्रदेश के दोनों बड़े सियासी दलों भाजपा-कांग्रेस की इच्छाशक्ति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे सड़क के बजाय इसे कभी होली-उतराला, तो कभी होली चामुंडा टनल निर्माण के नाम पर जनता को ठगते रहे।
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भरमौर और उपमंडल होली में सेब, अखरोट समेत गुच्छी, राजमां, राजमाश, कोलथ के अलावा लाइसेंस धारक धूप, कडू समेत अन्य जड़ी-बूटियां भी बाहरी मंडियों में बेचने के लिए निकलते हैं। सड़क बनने से बागवानों-किसानों और लोगों को लाभ मिलेगा। -शशि पाल
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होली-उतराला सड़क के निर्माण से चंबा और कांगड़ा जिले के लोगों को आने-जाने के लिए लंबा सफर तय नहीं करना पड़ेगा। मौजूदा समय में होली से उतराला की दूरी करीब 350 किमी है। सड़क के बनने से यह दूरी करीब 65 किमी रह जाएगी। - सुरेंद्र कुमार
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होली-उतराला सड़क के निर्माण से भरमौर क्षेत्र के लोगों को अपने नौनिहालों को उच्च शिक्षा मुहैया करवाने के लिए आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ेगा। साथ ही कांगड़ा और शिमला पहुंचने में भी लोगों को लंबा सफर तय नहीं करना पड़ेगा। - विनोद ठाकुर
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भरमौर से बैजनाथ पहुंचने पर रेल के जरिये भी अन्य जिलों या बाहरी राज्यों का रुख करने में जनजातीय क्षेत्रों के लोगों को भरपूर लाभ मिलेगा। पवित्र मणिमहेश यात्रा में आने वाले लाखों की संख्या में शिवभक्तों को भी अतिरिक्त सफर तय करने से निजात मिलेगी। - देसराज
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43 साल में सिर्फ 17 किमी बनी, सड़क बनने से 350 से घटकर 65 किमी रहेगी होली से उतराला की दूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
होली (चंबा)। चार दशक से भी ज्यादा समय से कागजों, भाषणों और चुनावी वादों में जिंदा होली-उतराला सड़क आज भी जमीन पर अधूरी उम्मीद की तरह है।
जनजातीय क्षेत्र भरमौर और होली को कांगड़ा से जोड़ने वाला यह मार्ग विकास की जिस रफ्तार का प्रतीक बनना चाहिए था, वह राजनीति की घोषणाओं और टनल के वादों के बीच उलझकर रह गया है। कभी सुरंग के सपने दिखाए गए, कभी नए रूट के नाम पर आश्वासन दिए गए लेकिन असल निर्माण आज भी 17 किलोमीटर की अधूरी हकीकत तक सीमित है। नतीजा यह है कि जहां यह सड़क दोनों जिलों के बीच दूरी को सैकड़ों किलोमीटर से घटाकर कुछ ही किलोमीटर कर सकती थी, वहां लोग आज भी लंबा और कठिन सफर तय करने को मजबूर हैं। होली से उतराला की दूरी करीब 350 किमी है। सड़क के बनने से यह दूरी करीब 65 किमी रह जाएगी।
खड़ामुख-सुरेई पास-एहजू सड़क के निर्माण का सपना वर्ष 1978 के आसपास देखा गया। 43 वर्ष बाद भी यह सड़क मूर्तरूप नहीं ले पाई है। इतना जरूर हुआ कि सड़क का निर्माण एहजू के बजाय चन्नी ब्रिज-लाके वाली माता-जालसू जोत कर दिया गया। इस निर्माण को लेकर प्रदेश के दोनों बड़े सियासी दलों भाजपा-कांग्रेस की इच्छाशक्ति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे सड़क के बजाय इसे कभी होली-उतराला, तो कभी होली चामुंडा टनल निर्माण के नाम पर जनता को ठगते रहे।
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भरमौर और उपमंडल होली में सेब, अखरोट समेत गुच्छी, राजमां, राजमाश, कोलथ के अलावा लाइसेंस धारक धूप, कडू समेत अन्य जड़ी-बूटियां भी बाहरी मंडियों में बेचने के लिए निकलते हैं। सड़क बनने से बागवानों-किसानों और लोगों को लाभ मिलेगा। -शशि पाल
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होली-उतराला सड़क के निर्माण से भरमौर क्षेत्र के लोगों को अपने नौनिहालों को उच्च शिक्षा मुहैया करवाने के लिए आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ेगा। साथ ही कांगड़ा और शिमला पहुंचने में भी लोगों को लंबा सफर तय नहीं करना पड़ेगा। - विनोद ठाकुर
भरमौर से बैजनाथ पहुंचने पर रेल के जरिये भी अन्य जिलों या बाहरी राज्यों का रुख करने में जनजातीय क्षेत्रों के लोगों को भरपूर लाभ मिलेगा। पवित्र मणिमहेश यात्रा में आने वाले लाखों की संख्या में शिवभक्तों को भी अतिरिक्त सफर तय करने से निजात मिलेगी। - देसराज