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हिमाचल: चंबा के सलून गांव में आपदा के एक साल बाद भी राहत अधूरी, घर-जमीन गंवाने वाले प्रभावित मदद को तरसे

संवाद न्यूज एजेंसी, चंबा। Published by: Ankesh Dogra Updated Mon, 22 Jun 2026 11:48 AM IST
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सार

चंबा जिले के होली क्षेत्र के सलून गांव में पिछले वर्ष रावी नदी की बाढ़ से घर और जमीन गंवाने वाले सात परिवार एक साल बाद भी स्थायी राहत का इंतजार कर रहे हैं। प्रभावितों का आरोप है कि सात लाख रुपये की घोषणा के बावजूद उन्हें केवल तीन-तीन लाख रुपये मिले। सुरक्षा दीवार, पुनर्वास और अन्य बचाव कार्य अब तक अधूरे हैं, जिससे आगामी बरसात को लेकर ग्रामीणों में चिंता बनी हुई है।

chamba disaster victims await relief one year after ravi flood
सलून गांव की इस पहाड़ी पर स्थित घर हो गए थे आपदा का शिकार।/आपदा प्रभावित। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

आपदा के जख्मों पर मरहम का इंतजार कर रहे प्रभावित परिवार मायूस हैं। सरकार ने दावा किया था कि प्रभावितों को मकान बनाने के लिए सात-सात लाख रुपये दिए जाएंगे लेकिन चंबा के होली क्षेत्र के सलून गांव के प्रभावितों को केवल तीन-तीन लाख ही मिले। साल 2025 की आपदा में रावी की बाढ़ में गांव के सात परिवारों के घर बह गए। जमीन भी बह गई है। प्रभावित किराये के मकान में रहने को मजबूर हैं। रावी नदी में सुरक्षा दीवार नहीं लग पाई है। आगामी बरसात में बाढ़ आई तो जो थोड़ी बहुत जमीन बची है वह भी बह जाएगी।



ग्रामीणों के सामने मकान बनाने की चुनौती है। सरकार सुरक्षित जगह पर जमीन उपलब्ध नहीं करवा पाई है। प्रभावित चमन लाल, संतोष कुमार, राकेश कुमार, बलदेव, त्रिदेव और आकाश ने कहा कि पिछले साल अगस्त में बरसात ने तबाही मचाई थी। अब तक गांव में कोई भी बचाव कार्य नहीं किए गए हैं। रास्तों तक का निर्माण नहीं हो पाया है। तबाही के पीछे पावर प्रोजेक्ट जिम्मेदार है। प्रोजेक्ट को बचाने के लिए रावी नदी के तट पर कंक्रीट की दीवार बनाई है जिस कारण पानी का बहाव गांव की ओर मुड़ गया।
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इधर, भरमौर राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर बग्गा से लूणा तक सड़क पूरी तरह से रावी में बह गई थी। उसकी भरपाई का कार्य अभी तक चला हुआ है। बत्ती दी हट्टी नामक स्थान भूस्खलन का हॉट स्पॉट बन चुका है। बारिश होने पर भूस्खलन शुरू हो जाता है। एनएच की मरम्मत पर 60 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं। 
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वहीं, ग्राम पंचायत मैहला के लुहारका में टिपरी में पिछली बरसात में भूस्खलन से काफी नुकसान हुआ। श्मशानघाट जाने वाला रास्ता बह गया। लुहारका गांव के निवासी चमन सिंह के मकान को खतरा पैदा हो गया है। नींव बाहर निकल गई है लेकिन अभी तक सरकार ने डंगा लगाने की व्यवस्था नहीं की। ग्राम पंचायत गैहरा में पिछले साल बादल फटने से 20 परिवारों के खेत नाले में बदल गए। परिवारों की कोई मदद नहीं की गई।

रावी नदी में बाढ़ पहले भी आती थी, लेकिन पिछली बार गांव में इतनी तबाही कैसे मची। इसके लिए पावर प्रोजेक्ट ही जिम्मेदार हैं। -आकाश कुमार, आपदा प्रभावित

बाढ़ में जब उनके घर तबाह हुए तो अंदर रखा सामान और आभूषण भी नहीं बचा पाए। मात्र तीन लाख मदद दी। -सनी कुमार, आपदा प्रभावित
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