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Chamba News: शिमला से सीमा सड़क संगठन के चीफ इंजीनियर पहुंचे किलाड़
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sun, 11 Jan 2026 06:54 AM IST
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पांगी (चंबा)। पांगी निवासियों के लिए शनिवार का दिन नई उम्मीदों की किरण लेकर आया। शिमला से सीमा सड़क संगठन के चीफ इंजीनियर राजीव कुमार जब मुख्यालय किलाड़ पहुंचे तो माहौल देखने लायक था। स्थानीय लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और पारंपरिक पंगवाली टोपी व शॉल पहनाकर उन्हें सम्मानित किया। इस दौरान पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष भानी चंद ठाकुर की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मुलाकात की। लोगों ने अपनी परेशानी बताते हुए मांग रखी कि ग्रीफ कैंप से लेकर महालू नाला तक की सड़क को जल्द से जल्द पक्का किया जाए ताकि रोज-रोज की धूल और गड्ढों से मुक्ति मिल सके। अधिकारियों के साथ हुई बैठक में पांगी वासियों को एक बड़ा आश्वासन मिला है। चीफ इंजीनियर ने वादा किया है कि पुर्थी से किलाड़ तक तारकोल बिछाने का काम अब युद्धस्तर पर शुरू किया जाएगा। पुर्थी से रेंई तक काम शुरू भी हो चुका है और बहुत जल्द किलाड़ और पुर्थी के बीच कई हिस्सों में एक साथ मशीनें दिखाई देंगी। इस पूरे रास्ते को चकाचक करने की जिम्मेदारी 108 आरसीसी कंपनी को सौंपी गई है। इस मौके पर आवासीय आयुक्त पांगी अमनदीप, बीडीओ योगेश और वन मंडल अधिकारी रवि गुलेरिया भी मौजूद रहे।
समाजसेवी ने घाटी के पुराने दर्द को बयां किया
समाजसेवी शिव नाथ शर्मा ने घाटी के पुराने दर्द को बयां किया। उन्होंने बताया कि साल 1978 में उदयपुर से संसारी नाला के लिए सड़क निर्माण का काम शुरू हुआ था। 46 साल बीत जाने के बाद भी 100 किलोमीटर का यह हिस्सा पूरी तरह से पक्का नहीं हो पाया है। आज भी मणग्रां से तिंदी और पुर्थी से किलाड़ तक का रास्ता सिंगल और कच्चा है, जिससे सफर जान जोखिम में डालकर करना पड़ता है। लोगों ने चीफ इंजीनियर से आग्रह किया है कि इन रास्तों को जल्द से जल्द डबललेन में बदला जाए ताकि पांगी का विकास सही मायने में हो सके।
लोगों नेकी बीआरओ के काम की खुलकर तारीफ
लोगों ने शिकायतों के साथ-साथ बीआरओ के काम की खुलकर तारीफ भी की। स्थानीय निवासियों ने दीपक प्रोजेक्ट के तहत किए गए कार्यों के लिए चीफ इंजीनियर का आभार जताया। लोगों ने याद किया कि कैसे आपदा के दौरान जब सिद्ध मंदिर नाला, महालू नाला और धरवास पुल बुरी तरह टूट गए थे, तब सीमा सड़क संगठन ने दिन-रात एक कर दिया था। जो काम महीनों में होना था, उसे बीआरओ की टीम ने महज 15 दिनों में पूरा करके मुख्य सड़क को बहाल कर दिया था। अब उम्मीद है कि पक्की सड़क का सपना भी जल्द सच होगा।
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समाजसेवी शिव नाथ शर्मा ने घाटी के पुराने दर्द को बयां किया। उन्होंने बताया कि साल 1978 में उदयपुर से संसारी नाला के लिए सड़क निर्माण का काम शुरू हुआ था। 46 साल बीत जाने के बाद भी 100 किलोमीटर का यह हिस्सा पूरी तरह से पक्का नहीं हो पाया है। आज भी मणग्रां से तिंदी और पुर्थी से किलाड़ तक का रास्ता सिंगल और कच्चा है, जिससे सफर जान जोखिम में डालकर करना पड़ता है। लोगों ने चीफ इंजीनियर से आग्रह किया है कि इन रास्तों को जल्द से जल्द डबललेन में बदला जाए ताकि पांगी का विकास सही मायने में हो सके।
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लोगों नेकी बीआरओ के काम की खुलकर तारीफ
लोगों ने शिकायतों के साथ-साथ बीआरओ के काम की खुलकर तारीफ भी की। स्थानीय निवासियों ने दीपक प्रोजेक्ट के तहत किए गए कार्यों के लिए चीफ इंजीनियर का आभार जताया। लोगों ने याद किया कि कैसे आपदा के दौरान जब सिद्ध मंदिर नाला, महालू नाला और धरवास पुल बुरी तरह टूट गए थे, तब सीमा सड़क संगठन ने दिन-रात एक कर दिया था। जो काम महीनों में होना था, उसे बीआरओ की टीम ने महज 15 दिनों में पूरा करके मुख्य सड़क को बहाल कर दिया था। अब उम्मीद है कि पक्की सड़क का सपना भी जल्द सच होगा।