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Chamba News: ... पल भर में मातम में बदल गईं मुंडन संस्कार की खुशियां
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Thu, 18 Jun 2026 10:57 PM IST
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चंबा चलूंज मार्ग पर मसरूंड के पास हुए हादसे के बाद मौके पर ब्यान दर्ज करती पुलिस टीम।संवाद
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एक ही गांव के छह लोगों की मौत से टूटा दुखों का पहाड़, महल गांव में हर आंख नम
अपनों के शव देखते ही मची चीख-पुकार, ताउम्र हादसे का जख्म नहीं भूल पाएंगे परिवार
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। मुंडन संस्कार में शामिल होने के लिए हंसी-खुशी घर से निकले लोगों को क्या पता था कि यह उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा। बोलेरो दुर्घटना में सात लोगों की मौत ने कई परिवारों को ऐसे जख्म दिए हैं जिन्हें वे ताउम्र नहीं भूल पाएंगे। महल गांव के एक ही परिवार के छह सदस्य जब वीरवार शाम सफेद कफन में लिपटे घर पहुंचे तो पूरे गांव का माहौल गमगीन हो गया। अपनों के शवों को देखते ही परिजनों की चीख-पुकार से हर किसी की आंखें नम हो गईं।
दर्दनाक हादसे में वाहन चालक मनोहर की भी मौत हो गई। मृतक अपने पीछे पत्नी और दो छोटे-छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं। उनके पिता और भाई का पहले ही निधन हो चुका था। ऐसे में परिवार की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी। वह अपनी मां, विधवा भाभी और भाई के दो बच्चों (एक सात वर्षीय और दूसरा 12 वर्षीय) का सहारा थे। परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी भी वह ही निभा रहे थे लेकिन एक पल में हुए इस हादसे ने परिवार का इकलौता सहारा छीन लिया। अब उनकी पत्नी भी विधवा हो गई है और मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया है।
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पत्नी और दो बेटों को छोड़ गए चुनी लाल
हादसे में जान गंवाने वाले चुनी लाल अपने पीछे पत्नी और दो बेटों को छोड़ गए हैं। देवी सिंह के निधन से उनकी पत्नी, बेटा और बहू सदमे में हैं। मोती राम की मौत से उनके दो बेटों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जबकि, कुंतो देवी अपने पीछे पति, बेटा-बहू और दो पोतियों को छोड़ गई हैं। परिवार के लोग बार-बार यही कह रहे हैं कि सुबह तक जो अपने साथ थे, अगली होते-होते उनकी यादें ही शेष रह गईं।
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एक ही परिवार के छह लोगों की मौत से शोक में डूबा गांव
गांव के लोगों में नरेश कुमार, प्रमोद कुमार और किशन चंद के अनुसार परिवार के सदस्य खुशी-खुशी मुंडन संस्कार में शामिल होने के लिए निकले थे। किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि यह खुशी का अवसर इतनी बड़ी त्रासदी में बदल जाएगा। गांव में हर तरफ मातम पसरा हुआ है। जिन आंगनों में हंसी-खुशी की बातें गूंज रही थीं, वहां अब सिसकियां सुनाई दे रही हैं। एक ही परिवार के छह लोगों की मौत ने महल गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है।
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शव गांव में पहुंचते ही लोगों की आंखों से छलके आंसू
गांव के बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में एक साथ इतनी बड़ी पारिवारिक त्रासदी शायद ही कभी देखी हो। शवों के गांव पहुंचते ही अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। हर आंख नम थी और हर चेहरा इस दर्दनाक हादसे से स्तब्ध नजर आया। वहां मौजूद लोगों की आंखों से आंसू छलक आए। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है और लोग पीड़ित परिवारों को ढांढस बंधाने में जुटे रहे। यह हादसा न केवल कई परिवारों की खुशियां छीन ले गया, बल्कि पूरे गांव को ऐसा दर्द दे गया, जिसे भुला पाना आसान नहीं होगा।
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अपनों के शव देखते ही मची चीख-पुकार, ताउम्र हादसे का जख्म नहीं भूल पाएंगे परिवार
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। मुंडन संस्कार में शामिल होने के लिए हंसी-खुशी घर से निकले लोगों को क्या पता था कि यह उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा। बोलेरो दुर्घटना में सात लोगों की मौत ने कई परिवारों को ऐसे जख्म दिए हैं जिन्हें वे ताउम्र नहीं भूल पाएंगे। महल गांव के एक ही परिवार के छह सदस्य जब वीरवार शाम सफेद कफन में लिपटे घर पहुंचे तो पूरे गांव का माहौल गमगीन हो गया। अपनों के शवों को देखते ही परिजनों की चीख-पुकार से हर किसी की आंखें नम हो गईं।
दर्दनाक हादसे में वाहन चालक मनोहर की भी मौत हो गई। मृतक अपने पीछे पत्नी और दो छोटे-छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं। उनके पिता और भाई का पहले ही निधन हो चुका था। ऐसे में परिवार की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी। वह अपनी मां, विधवा भाभी और भाई के दो बच्चों (एक सात वर्षीय और दूसरा 12 वर्षीय) का सहारा थे। परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी भी वह ही निभा रहे थे लेकिन एक पल में हुए इस हादसे ने परिवार का इकलौता सहारा छीन लिया। अब उनकी पत्नी भी विधवा हो गई है और मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया है।
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पत्नी और दो बेटों को छोड़ गए चुनी लाल
हादसे में जान गंवाने वाले चुनी लाल अपने पीछे पत्नी और दो बेटों को छोड़ गए हैं। देवी सिंह के निधन से उनकी पत्नी, बेटा और बहू सदमे में हैं। मोती राम की मौत से उनके दो बेटों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जबकि, कुंतो देवी अपने पीछे पति, बेटा-बहू और दो पोतियों को छोड़ गई हैं। परिवार के लोग बार-बार यही कह रहे हैं कि सुबह तक जो अपने साथ थे, अगली होते-होते उनकी यादें ही शेष रह गईं।
एक ही परिवार के छह लोगों की मौत से शोक में डूबा गांव
गांव के लोगों में नरेश कुमार, प्रमोद कुमार और किशन चंद के अनुसार परिवार के सदस्य खुशी-खुशी मुंडन संस्कार में शामिल होने के लिए निकले थे। किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि यह खुशी का अवसर इतनी बड़ी त्रासदी में बदल जाएगा। गांव में हर तरफ मातम पसरा हुआ है। जिन आंगनों में हंसी-खुशी की बातें गूंज रही थीं, वहां अब सिसकियां सुनाई दे रही हैं। एक ही परिवार के छह लोगों की मौत ने महल गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है।
शव गांव में पहुंचते ही लोगों की आंखों से छलके आंसू
गांव के बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में एक साथ इतनी बड़ी पारिवारिक त्रासदी शायद ही कभी देखी हो। शवों के गांव पहुंचते ही अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। हर आंख नम थी और हर चेहरा इस दर्दनाक हादसे से स्तब्ध नजर आया। वहां मौजूद लोगों की आंखों से आंसू छलक आए। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है और लोग पीड़ित परिवारों को ढांढस बंधाने में जुटे रहे। यह हादसा न केवल कई परिवारों की खुशियां छीन ले गया, बल्कि पूरे गांव को ऐसा दर्द दे गया, जिसे भुला पाना आसान नहीं होगा।