{"_id":"6a299b3d3f43a930f001cf3c","slug":"medical-colleges-pediatric-ward-packed-with-children-beds-fall-short-chamba-news-c-88-1-ssml1006-186200-2026-06-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chamba News: बच्चों से भरा मेडिकल कॉलेज का शिशु वार्ड, कम पड़े बिस्तर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chamba News: बच्चों से भरा मेडिकल कॉलेज का शिशु वार्ड, कम पड़े बिस्तर
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Wed, 10 Jun 2026 10:56 PM IST
विज्ञापन
चंबा मेडिकल कॉलेज की दूसरी मंजिल में उपचाराधीन एक बैड पर दो बच्चे।संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
बुखार की तपिश ने जकड़े बच्चे, एक बिस्तर पर दो-दो बच्चे किए जा रहे भर्ती
मौसम में हो रहे बदलाव के कारण जुकाम व बुखार की चपेट में आ रहे बच्चे
रोजाना चार से पांच बच्चे हो रहे भर्ती और इतने ही स्वस्थ होकर जा रहे घर
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज का शिशु रोग वार्ड बीमार बच्चों की संख्या के आगे छोटा पड़ गया है। एक बिस्तर पर दो से तीन बीमार बच्चों को लेटाया जा रहा है।
रोजाना बुखार सहित अन्य बीमारी से पीड़ित बच्चों को उपचार के लिए यहां भर्ती किया जा रहा है। पिछले कुछ दिनों में बीमार बच्चों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। उपचाराधीन बच्चों में अधिकतर बच्चे बुखार से ग्रस्त हैं। बुखार 100 डिग्री से अधिक होने के कारण उन्हें भर्ती किया गया है। मौसम में बार-बार हो रहे बदलाव के कारण बच्चे बुखार की चपेट में आ रहे हैं। इसलिए डॉक्टर बच्चों का इलाज करने के साथ अभिभावकों को विशेष ध्यान रखने के लिए जागरूक भी कर रहे हैं।
शिशु रोग वार्ड में बीमार बच्चों को भर्ती करने के लिए 25 बिस्तरों की सुविधा है। इसमें मौजूदा समय पर 50 से 60 बीमार बच्चे इलाज के लिए लेटाए गए हैं। रोजाना चार से पांच बच्चे भर्ती हो रहे हैं जबकि इतने ही बच्चे स्वस्थ होकर घर भी जा रहे हैं। शिशु रोग ओपीडी में भी बीमार बच्चों की संख्या बढ़ रही है। रोजाना 150 से अधिक बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इसमें सामान्य रूप से बुखार व जुकाम से ग्रत बच्चों को दवाई देकर घर भेजा जा रहा है और गंभीर लक्षणों वाले बच्चों को भर्ती किया जा रहा है।
विज्ञापन
--
दो से तीन दिन के लिए भर्ती कर रहे डॉक्टर
बुखारी दौरे वाले बच्चों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। बच्चों में 101 से अधिक बुखार होने पर बच्चों को डॉक्टर दो से तीन दिन के लिए उपचार के लिए भर्ती कर रहे हैं। साथ ही उनके बुखार को भी उतारने का इलाज किया जा रहा है।
-- शिशु रोग वार्ड में बीमार बच्चों की संख्या में वृद्धि हो रही है। बुखार से पीड़ित बच्चों की संख्या अधिक है। इसका मुख्य कारण मौसम में हो रहा बदलाव माना जा रहा है। इसलिए अभिभावकों को ऐसे मौसम में अपने बच्चों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
- डॉक्टर मानिक सहगल, प्रवक्ता, मेडिकल कॉलेज
--
मौसम में हो रहे बदलाव के कारण जुकाम व बुखार की चपेट में आ रहे बच्चे
रोजाना चार से पांच बच्चे हो रहे भर्ती और इतने ही स्वस्थ होकर जा रहे घर
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज का शिशु रोग वार्ड बीमार बच्चों की संख्या के आगे छोटा पड़ गया है। एक बिस्तर पर दो से तीन बीमार बच्चों को लेटाया जा रहा है।
रोजाना बुखार सहित अन्य बीमारी से पीड़ित बच्चों को उपचार के लिए यहां भर्ती किया जा रहा है। पिछले कुछ दिनों में बीमार बच्चों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। उपचाराधीन बच्चों में अधिकतर बच्चे बुखार से ग्रस्त हैं। बुखार 100 डिग्री से अधिक होने के कारण उन्हें भर्ती किया गया है। मौसम में बार-बार हो रहे बदलाव के कारण बच्चे बुखार की चपेट में आ रहे हैं। इसलिए डॉक्टर बच्चों का इलाज करने के साथ अभिभावकों को विशेष ध्यान रखने के लिए जागरूक भी कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
शिशु रोग वार्ड में बीमार बच्चों को भर्ती करने के लिए 25 बिस्तरों की सुविधा है। इसमें मौजूदा समय पर 50 से 60 बीमार बच्चे इलाज के लिए लेटाए गए हैं। रोजाना चार से पांच बच्चे भर्ती हो रहे हैं जबकि इतने ही बच्चे स्वस्थ होकर घर भी जा रहे हैं। शिशु रोग ओपीडी में भी बीमार बच्चों की संख्या बढ़ रही है। रोजाना 150 से अधिक बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इसमें सामान्य रूप से बुखार व जुकाम से ग्रत बच्चों को दवाई देकर घर भेजा जा रहा है और गंभीर लक्षणों वाले बच्चों को भर्ती किया जा रहा है।
दो से तीन दिन के लिए भर्ती कर रहे डॉक्टर
बुखारी दौरे वाले बच्चों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। बच्चों में 101 से अधिक बुखार होने पर बच्चों को डॉक्टर दो से तीन दिन के लिए उपचार के लिए भर्ती कर रहे हैं। साथ ही उनके बुखार को भी उतारने का इलाज किया जा रहा है।
- डॉक्टर मानिक सहगल, प्रवक्ता, मेडिकल कॉलेज