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Chamba News: कच्ची सड़कों पर बर्फ हटाने से पहले दो करोड़ की मशीन जाम
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sun, 25 Jan 2026 09:53 PM IST
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चंबा। तीन साल पहले जनजातीय क्षेत्र पांगी की सड़कों से बर्फ हटाने के लिए लोक निर्माण विभाग ने दो करोड़ रुपये खर्च कर एक हाईटेक ट्रक-माउंटेड स्नो ब्लोअर मशीन खरीदी थी। उम्मीद थी कि यह समस्या हल कर देगी, लेकिन यह मशीन पांगी की कच्ची सड़कों के लिए उपयुक्त नहीं है, इस कारण बर्फ नहीं हटा पा रही है। इस कारण विभाग ठेकेदारों की निजी मशीनें किराये पर लेकर बर्फ हटा रहा है।
अब सवाल यह उठता है कि अगर इतनी महंगी मशीन घाटी में काम करने के योग्य नहीं थी तो ऐसी खरीद क्यों की। क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों के समझ कर ही मशीनरी की खरीद होनी चाहिए थी। तीन साल में इस मशीन से बहुत कम काम लिया गया है।
स्थानीय निवासी चेत राम, शेर सिंह, मंगत, सुरेंद्र, अमर सिंह, नरेंद्र, भगत राम और प्यार सिंह ने आरोप लगाया कि विभाग ने बिना किसी योजना के भारी राशि खर्च की, जबकि यह मशीन आज तक 50 किलोमीटर सड़कों से भी बर्फ नहीं हटा पाई। उनका कहना है कि पहले भी ठेकेदारों की मशीनों को किराये पर लेकर सड़कों से बर्फ हटाई जाती थी और अब भी वही तरीका अपनाया जा रहा है।
वहीं, विभागीय अधिकारियों के मुताबिक यह स्नो ब्लोअर मशीन केवल पक्की सड़कों से बर्फ हटाने के लिए डिजाइन की गई है, जबकि पांगी की अधिकांश सड़कों की स्थिति कच्ची है। ऐसे में यह मशीन क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुसार काम करने में विफल साबित हो रही है।
यह स्थिति न केवल सरकारी खर्च की बर्बादी की ओर इशारा करती है बल्कि विभाग की कार्यप्रणाली और निर्णय प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाती है। पांगी की कच्ची सड़कों के लिए एक महंगी और असंगत मशीन खरीदने के बजाय, विभाग को स्थानीय जरूरतों के आधार पर कार्य करना चाहिए था। फिलहाल, सरकारी धन का अपव्यय और स्थानीय लोगों की परेशानियों के बीच इस मुद्दे पर ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
यह मशीन पक्की सड़कों से बर्फ हटाने में सक्षम है। यही वजह है कि कच्ची सड़कों से बर्फ निजी मशीनरी से हटाई जा रही है। रवि कुमार शर्मा, कार्यकारी अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण मंडल किलाड़
उच्च स्तरीय जांच की मांग
स्थानीय लोग अब उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सरकारी धन का किस प्रकार उपयोग किया जा रहा है। उनका कहना है कि विभाग को चाहिए कि वह अपनी नीतियों की समीक्षा करे और क्षेत्रीय परिस्थितियों के अनुसार ठोस कदम उठाए।
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अब सवाल यह उठता है कि अगर इतनी महंगी मशीन घाटी में काम करने के योग्य नहीं थी तो ऐसी खरीद क्यों की। क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों के समझ कर ही मशीनरी की खरीद होनी चाहिए थी। तीन साल में इस मशीन से बहुत कम काम लिया गया है।
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स्थानीय निवासी चेत राम, शेर सिंह, मंगत, सुरेंद्र, अमर सिंह, नरेंद्र, भगत राम और प्यार सिंह ने आरोप लगाया कि विभाग ने बिना किसी योजना के भारी राशि खर्च की, जबकि यह मशीन आज तक 50 किलोमीटर सड़कों से भी बर्फ नहीं हटा पाई। उनका कहना है कि पहले भी ठेकेदारों की मशीनों को किराये पर लेकर सड़कों से बर्फ हटाई जाती थी और अब भी वही तरीका अपनाया जा रहा है।
वहीं, विभागीय अधिकारियों के मुताबिक यह स्नो ब्लोअर मशीन केवल पक्की सड़कों से बर्फ हटाने के लिए डिजाइन की गई है, जबकि पांगी की अधिकांश सड़कों की स्थिति कच्ची है। ऐसे में यह मशीन क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुसार काम करने में विफल साबित हो रही है।
यह स्थिति न केवल सरकारी खर्च की बर्बादी की ओर इशारा करती है बल्कि विभाग की कार्यप्रणाली और निर्णय प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाती है। पांगी की कच्ची सड़कों के लिए एक महंगी और असंगत मशीन खरीदने के बजाय, विभाग को स्थानीय जरूरतों के आधार पर कार्य करना चाहिए था। फिलहाल, सरकारी धन का अपव्यय और स्थानीय लोगों की परेशानियों के बीच इस मुद्दे पर ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
यह मशीन पक्की सड़कों से बर्फ हटाने में सक्षम है। यही वजह है कि कच्ची सड़कों से बर्फ निजी मशीनरी से हटाई जा रही है। रवि कुमार शर्मा, कार्यकारी अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण मंडल किलाड़
उच्च स्तरीय जांच की मांग
स्थानीय लोग अब उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सरकारी धन का किस प्रकार उपयोग किया जा रहा है। उनका कहना है कि विभाग को चाहिए कि वह अपनी नीतियों की समीक्षा करे और क्षेत्रीय परिस्थितियों के अनुसार ठोस कदम उठाए।