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Chamba News: करयास पंचायत में उनौड़ी मेले का आगाज
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Thu, 19 Mar 2026 10:58 PM IST
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जनजातीय क्षेत्र पांगी में उनौड़ी मेलेमें पारंपरिक वाद्य यंत्र बजाते बजंतरी।संवाद
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पुजारियों ने मां वालिन वासनी की विशेष पूजा कर किया उत्सव का शुभारंभ
अपनी संस्कृति और अनूठी परंपराओं के लिए विख्यात है पांगी
संवाद न्यूज एजेंसी
पांगी (चंबा)। जनजातीय क्षेत्र पांगी की संस्कृति अपनी अनूठी परंपराओं और लोक मान्यताओं के लिए जानी जाती है। वीरवार को पांगी की करयास पंचायत में तीन दिवसीय ऐतिहासिक उनौडी मेले का आगाज हुआ।
हुगाल गांव स्थित मेला पंडाल में मंदिर के पुजारियों और कारदारों ने मां वालिन वासनी की विशेष पूजा-अर्चना कर उत्सव का शुभारंभ किया। तीन दिन तक पंचायत भक्ति और उल्लास के रंग में डूबी रहेगी। यह तीन दिवसीय मेला मुख्य रूप से मां वालिन वासनी और टटन माता को समर्पित है। मंदिर के मुख्य पुजारी केसर सिंह अनुसार इन तीन दिनों में माता की विशेष आराधना की जाती है। मान्यता है कि इस मेले के समापन के बाद बैसाखी के अवसर पर मां वालिन वासनी माता के मंदिर के कपाट खोले जाते हैं। इन कपाटों के खुलने का इंतजार न केवल श्रद्धालु करते हैं, बल्कि लोक निर्माण विभाग भी करता है। इसी के बाद क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण सचे जोत सड़क को बहाल करने की प्रक्रिया शुरू होती है। मेले के दौरान पूरी प्रजा मंडल में भारी उत्साह देखा जा रहा है। उत्सव के आकर्षण का केंद्र परघवाल का रथयात्रा होती है। यह विभिन्न क्षेत्रों से गुजरते हुए मेला स्थल पहुंचती है। शुक्रवार को इस मेले का मुख्य आयोजन होगा जिसमें पांगी घाटी की सुख-समृद्धि और शांति के लिए विशेष अनुष्ठान किए जाएंगे। करयास पंचायत के हर घर में मेहमानों का तांता लगा रहता है। इस मेले में करयास पंचायत की जो बेटियां शादी के बाद दूर-दराज के क्षेत्रों में जा बसी हैं, वे इस मेले के दौरान अपने मायके आती हैं। बेटियां अपने माता-पिता और कुल देवी का आशीर्वाद लेती हैं। यह मिलन न केवल पारिवारिक रिश्तों को मजबूती देता है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और संस्कृति से रूबरू कराने का एक बड़ा जरिया भी बनता है।
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अपनी संस्कृति और अनूठी परंपराओं के लिए विख्यात है पांगी
संवाद न्यूज एजेंसी
पांगी (चंबा)। जनजातीय क्षेत्र पांगी की संस्कृति अपनी अनूठी परंपराओं और लोक मान्यताओं के लिए जानी जाती है। वीरवार को पांगी की करयास पंचायत में तीन दिवसीय ऐतिहासिक उनौडी मेले का आगाज हुआ।
हुगाल गांव स्थित मेला पंडाल में मंदिर के पुजारियों और कारदारों ने मां वालिन वासनी की विशेष पूजा-अर्चना कर उत्सव का शुभारंभ किया। तीन दिन तक पंचायत भक्ति और उल्लास के रंग में डूबी रहेगी। यह तीन दिवसीय मेला मुख्य रूप से मां वालिन वासनी और टटन माता को समर्पित है। मंदिर के मुख्य पुजारी केसर सिंह अनुसार इन तीन दिनों में माता की विशेष आराधना की जाती है। मान्यता है कि इस मेले के समापन के बाद बैसाखी के अवसर पर मां वालिन वासनी माता के मंदिर के कपाट खोले जाते हैं। इन कपाटों के खुलने का इंतजार न केवल श्रद्धालु करते हैं, बल्कि लोक निर्माण विभाग भी करता है। इसी के बाद क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण सचे जोत सड़क को बहाल करने की प्रक्रिया शुरू होती है। मेले के दौरान पूरी प्रजा मंडल में भारी उत्साह देखा जा रहा है। उत्सव के आकर्षण का केंद्र परघवाल का रथयात्रा होती है। यह विभिन्न क्षेत्रों से गुजरते हुए मेला स्थल पहुंचती है। शुक्रवार को इस मेले का मुख्य आयोजन होगा जिसमें पांगी घाटी की सुख-समृद्धि और शांति के लिए विशेष अनुष्ठान किए जाएंगे। करयास पंचायत के हर घर में मेहमानों का तांता लगा रहता है। इस मेले में करयास पंचायत की जो बेटियां शादी के बाद दूर-दराज के क्षेत्रों में जा बसी हैं, वे इस मेले के दौरान अपने मायके आती हैं। बेटियां अपने माता-पिता और कुल देवी का आशीर्वाद लेती हैं। यह मिलन न केवल पारिवारिक रिश्तों को मजबूती देता है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और संस्कृति से रूबरू कराने का एक बड़ा जरिया भी बनता है।
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