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Chamba News: बांध के पानी में तैरते रहे लट्ठे, डूब गई जिम्मेदारी
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Mon, 23 Mar 2026 10:46 PM IST
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चमेरा बांध में सड़ रही बीतीबरसात में बह कर पहुंची लकड़ी। संवाद
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चमेरा जलाशय में एक साल से सड़ रही भारी बारिश से बहकर आई करोड़ों की लकड़ी
बांध की सुरक्षा के लिए भी खतरा बनी लकड़ी, विभाग की खामोशी से हो रही बर्बाद
नीतिन पॉल
बनीखेत (चंबा)। चमेरा बांध में सिर्फ लकड़ी नहीं सड़ रही, बल्कि जिम्मेदारी भी गल रही है। करोड़ों की वन संपदा पानी में पड़ी है और जिम्मेदार विभागों की खामोशी इस बर्बादी को और गहरा बना रही है।
चमेरा बांध में बहकर आई लकड़ी अभी भी बांध के जलाशय में पड़ी है। इससे करोड़ों रुपये की वन संपदा तो खराब हो ही रही है, साथ ही बांध की सुरक्षा पर भी सवालिया निशान छोड़ रही है। पिछले वर्ष बरसात में भारी मात्रा में लकड़ी के लट्ठे बहकर रावी नदी के ऊपर बने चमेरा बांध के जलाशय में पहुंच गए थे। ये महीनों बाद भी जलाशय की ऊपरी सतह पर तैरते रहे। हैरानी की बात है कि न वन विभाग और न ही चमेरा बांध प्रबंधन ने इस समस्या को लेकर गंभीरता दिखाई है। इस बेशकीमती वन संपदा को जलाशय से निकालकर सुरक्षित करने की जहमत तक नहीं उठाई गई। नतीजतन, करोड़ों की कीमत वाली लकड़ी जलाशय के पानी में सड़ रही है। यह बांध की सुरक्षा के लिए भी खतरा बनी हुई है। हालांकि, वन विभाग के अधिकारी साफ कर रहे हैं कि यह लकड़ी स्लीपरनुमा नहीं है, बल्कि जड़ के साथ उखड़े दरख्त हैं। ये बरसात के मौसम में नदी और नालों में आई बाढ़ के कारण पानी के तेज बहाव में बह गए थे।
स्थानीय लोगों अरुण, सुनील भारद्वाज, सुरेश, महिंदर कुमार और बलकार सिंह ने कहा कि भारी बारिश के चलते पिछले साल यह लकड़ी बहकर इस जलाशय में पहुंची थी। यह अभी तक वैसी की वैसी ही पड़ी है। न तो वन विभाग और न ही बांध प्रबंधन ने इस लकड़ी को निकलने का कोई विशेष प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि अगर बाढ़ के कारण यहां पहुंची है तो भी उसे सुरक्षित निकालने की व्यवस्था होनी चाहिए। सरकार के खाते में कुछ न कुछ राजस्व इस लकड़ी की नीलामी के जरिये जमा हो सके।
उधर, एसडीएम डलहौजी अनिल भारद्वाज ने बताया कि मामला ध्यान में लाया गया है। चमेरा बांध प्रबंधन की ओर से कछुए की चाल से बह कर आई लकड़ी को हटाने का कार्य चल रहा है। इसे लेकर प्रबंधन के अधिकारियों से जवाब तलब किया जाएगा।
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बांध की सुरक्षा के लिए भी खतरा बनी लकड़ी, विभाग की खामोशी से हो रही बर्बाद
नीतिन पॉल
बनीखेत (चंबा)। चमेरा बांध में सिर्फ लकड़ी नहीं सड़ रही, बल्कि जिम्मेदारी भी गल रही है। करोड़ों की वन संपदा पानी में पड़ी है और जिम्मेदार विभागों की खामोशी इस बर्बादी को और गहरा बना रही है।
चमेरा बांध में बहकर आई लकड़ी अभी भी बांध के जलाशय में पड़ी है। इससे करोड़ों रुपये की वन संपदा तो खराब हो ही रही है, साथ ही बांध की सुरक्षा पर भी सवालिया निशान छोड़ रही है। पिछले वर्ष बरसात में भारी मात्रा में लकड़ी के लट्ठे बहकर रावी नदी के ऊपर बने चमेरा बांध के जलाशय में पहुंच गए थे। ये महीनों बाद भी जलाशय की ऊपरी सतह पर तैरते रहे। हैरानी की बात है कि न वन विभाग और न ही चमेरा बांध प्रबंधन ने इस समस्या को लेकर गंभीरता दिखाई है। इस बेशकीमती वन संपदा को जलाशय से निकालकर सुरक्षित करने की जहमत तक नहीं उठाई गई। नतीजतन, करोड़ों की कीमत वाली लकड़ी जलाशय के पानी में सड़ रही है। यह बांध की सुरक्षा के लिए भी खतरा बनी हुई है। हालांकि, वन विभाग के अधिकारी साफ कर रहे हैं कि यह लकड़ी स्लीपरनुमा नहीं है, बल्कि जड़ के साथ उखड़े दरख्त हैं। ये बरसात के मौसम में नदी और नालों में आई बाढ़ के कारण पानी के तेज बहाव में बह गए थे।
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स्थानीय लोगों अरुण, सुनील भारद्वाज, सुरेश, महिंदर कुमार और बलकार सिंह ने कहा कि भारी बारिश के चलते पिछले साल यह लकड़ी बहकर इस जलाशय में पहुंची थी। यह अभी तक वैसी की वैसी ही पड़ी है। न तो वन विभाग और न ही बांध प्रबंधन ने इस लकड़ी को निकलने का कोई विशेष प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि अगर बाढ़ के कारण यहां पहुंची है तो भी उसे सुरक्षित निकालने की व्यवस्था होनी चाहिए। सरकार के खाते में कुछ न कुछ राजस्व इस लकड़ी की नीलामी के जरिये जमा हो सके।
उधर, एसडीएम डलहौजी अनिल भारद्वाज ने बताया कि मामला ध्यान में लाया गया है। चमेरा बांध प्रबंधन की ओर से कछुए की चाल से बह कर आई लकड़ी को हटाने का कार्य चल रहा है। इसे लेकर प्रबंधन के अधिकारियों से जवाब तलब किया जाएगा।