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Chamba News: जिले में यूरिया के संकट ने बढ़ाई किसानों की बेचैनी
Sun, 12 Jul 2026 11:33 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sun, 12 Jul 2026 11:33 PM IST
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बोले- तीन महीने से नहीं मिल रही खाद, फसल की पैदावार प्रभावित होने की चिंता
बिक्री केंद्रों, सहकारी समितियों के चक्कर काटने के बाद खाली हाथ लौट रहे किसान
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। खेतों में लहलहाती मक्की की फसल पोषण की आस लगाए खड़ी है लेकिन किसानों के हाथ खाली हैं। जिस वक्त यूरिया की सबसे ज्यादा जरूरत है, उसी समय खाद की किल्लत ने चंबा के अन्नदाताओं को बिक्री केंद्रों और सहकारी समितियों के चक्कर लगाने पर मजबूर कर दिया है। तीन महीने से ठप सप्लाई के बीच किसानों को अब फसल की पैदावार के साथ अपनी आजीविका की भी चिंता सताने लगी है।
जिले के चंबा, सलूणी, चुराह, साहो और भरमौर क्षेत्र के किसान यूरिया खाद के लिए सुबह से शाम तक बिक्री केंद्रों और सहकारी समितियों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि मक्की की फसल के लिए इस समय यूरिया की आवश्यकता होती है। समय पर खाद नहीं मिलने से उन्हें फसल खराब होने और उत्पादन घटने की चिंता सताने लगी है। किसानों के अनुसार करीब तीन महीने से यूरिया की सप्लाई सुचारू नहीं हो पाई है।
तेज सिंह, धर्म राज, मदन लाल, किशोरी लाल, कुलदीप कुमार, मोहम्मद यासीन और नजीर खान ने बताया कि पहले कभी खाद को लेकर इतनी परेशानी नहीं हुई। हर सीजन में समय पर खाद मिल जाती थी लेकिन इस बार सबसे ज्यादा चिंता यूरिया की हो रही है। फसल खेतों में तैयार हो रही है। समझ नहीं आ रहा कि उसे पोषण कैसे दें। मौसम की अनिश्चितता, बढ़ती लागत और जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान के बीच अब खाद की कमी ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अगर समय पर यूरिया नहीं मिली तो इसका असर सीधे पैदावार और उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा।
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उधर, कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. भूपेंद्र सिंह ने कहा कि इस समय मक्की की फसल को यूूरिया खाद की काफी जरूरत है मगर सप्लाई नहीं आ रही है। इस बारे में सरकार और उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया है।
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बिक्री केंद्रों, सहकारी समितियों के चक्कर काटने के बाद खाली हाथ लौट रहे किसान
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। खेतों में लहलहाती मक्की की फसल पोषण की आस लगाए खड़ी है लेकिन किसानों के हाथ खाली हैं। जिस वक्त यूरिया की सबसे ज्यादा जरूरत है, उसी समय खाद की किल्लत ने चंबा के अन्नदाताओं को बिक्री केंद्रों और सहकारी समितियों के चक्कर लगाने पर मजबूर कर दिया है। तीन महीने से ठप सप्लाई के बीच किसानों को अब फसल की पैदावार के साथ अपनी आजीविका की भी चिंता सताने लगी है।
जिले के चंबा, सलूणी, चुराह, साहो और भरमौर क्षेत्र के किसान यूरिया खाद के लिए सुबह से शाम तक बिक्री केंद्रों और सहकारी समितियों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि मक्की की फसल के लिए इस समय यूरिया की आवश्यकता होती है। समय पर खाद नहीं मिलने से उन्हें फसल खराब होने और उत्पादन घटने की चिंता सताने लगी है। किसानों के अनुसार करीब तीन महीने से यूरिया की सप्लाई सुचारू नहीं हो पाई है।
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तेज सिंह, धर्म राज, मदन लाल, किशोरी लाल, कुलदीप कुमार, मोहम्मद यासीन और नजीर खान ने बताया कि पहले कभी खाद को लेकर इतनी परेशानी नहीं हुई। हर सीजन में समय पर खाद मिल जाती थी लेकिन इस बार सबसे ज्यादा चिंता यूरिया की हो रही है। फसल खेतों में तैयार हो रही है। समझ नहीं आ रहा कि उसे पोषण कैसे दें। मौसम की अनिश्चितता, बढ़ती लागत और जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान के बीच अब खाद की कमी ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अगर समय पर यूरिया नहीं मिली तो इसका असर सीधे पैदावार और उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा।
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उधर, कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. भूपेंद्र सिंह ने कहा कि इस समय मक्की की फसल को यूूरिया खाद की काफी जरूरत है मगर सप्लाई नहीं आ रही है। इस बारे में सरकार और उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया है।