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Chamba News: रास्ते हार गए तो हौसलों से गढ़ दिया पुल
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Thu, 02 Apr 2026 10:47 PM IST
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बारिश से मलबे में दब गया था पुल, रास्ता भी जर्जर होने से हो रही थी परेशानी
मरेड़ी से स्डूंह गांवों के लोग लंबे समय से उठा रहे मरम्मत करने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
साहो (चंबा)। पांच महीनों की अनसुनी पुकार, टूटी राहें और बहते पानी के साथ बहती व्यवस्था, कुछ इस तरह का दर्द रोजाना मरेड़ी से स्डूंह गांवों का सफर करते समय लोगों के चेहरों पर दिखाई देता है।
यहां रास्ता सिर्फ खराब नहीं हुआ, बल्कि भरोसा भी दरक गया। जब इंतजार ने हार मान ली, तब इन गांवों ने मिट्टी, पत्थरों और हौसलों से वह राह गढ़ी, जिसे सिस्टम नहीं बना सका। दबे हुए पुल के ऊपर खड़े होकर इन लोगों ने साबित कर दिया कि मंजिल से पहले अगर कुछ बनता है तो वह इंसान का जज्बा है।
पंचायत बाट के तहत मरेड़ी से स्डूंह गांवों को जोड़ने वाला रास्ता पांच महीनों से बदहाल स्थिति में है। ग्रामीण लगातार इस मार्ग की मरम्मत की मांग उठाते रहे लेकिन अब तक न पंचायत ने कोई कदम उठाया और न ही प्रशासन ने समस्या का समाधान किया। ग्रामीणों ने बताया कि हाल ही में हुई बारिश के कारण रास्ते पर बना छोटा पुल टूट गया है जिससे स्थिति और भी गंभीर हो गई है। रास्ता अब नाले का रूप ले चुका है जिससे बच्चों को स्कूल जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बुजुर्गों के लिए इस रास्ते पर चलना भी बेहद मुश्किल हो गया है। बीते दिनों बारिश के दौरान परीक्षा देने जा रहे विद्यार्थियों को ग्रामीणों ने बड़ी मुश्किल से इस रास्ते से पार करवाया। स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों ने अपने स्तर पर अस्थायी रूप से चलने योग्य रास्ता तैयार किया है लेकिन बारिश होने पर इसके बहने का खतरा बना हुआ है।
ग्रामीण रमेश शर्मा, अमित कुमार, अजय, ताशु, प्रताप चंद और निशांत ने बताया कि यह इन गांवों को जोड़ने वाला एकमात्र रास्ता है। इसी मार्ग से बच्चे स्कूल जाते हैं और लोगों का आवागमन होता है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि जल्द मौके का निरीक्षण कर इस मार्ग पर स्थायी पुल का निर्माण किया जाए। उधर, पूर्व प्रधान अनिल कुमार ने बताया कि इस बारे में कई बार पंचायत की ओर से उपायुक्त चंबा को प्रस्ताव भेजा गया था।
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मरेड़ी से स्डूंह गांवों के लोग लंबे समय से उठा रहे मरम्मत करने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
साहो (चंबा)। पांच महीनों की अनसुनी पुकार, टूटी राहें और बहते पानी के साथ बहती व्यवस्था, कुछ इस तरह का दर्द रोजाना मरेड़ी से स्डूंह गांवों का सफर करते समय लोगों के चेहरों पर दिखाई देता है।
यहां रास्ता सिर्फ खराब नहीं हुआ, बल्कि भरोसा भी दरक गया। जब इंतजार ने हार मान ली, तब इन गांवों ने मिट्टी, पत्थरों और हौसलों से वह राह गढ़ी, जिसे सिस्टम नहीं बना सका। दबे हुए पुल के ऊपर खड़े होकर इन लोगों ने साबित कर दिया कि मंजिल से पहले अगर कुछ बनता है तो वह इंसान का जज्बा है।
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पंचायत बाट के तहत मरेड़ी से स्डूंह गांवों को जोड़ने वाला रास्ता पांच महीनों से बदहाल स्थिति में है। ग्रामीण लगातार इस मार्ग की मरम्मत की मांग उठाते रहे लेकिन अब तक न पंचायत ने कोई कदम उठाया और न ही प्रशासन ने समस्या का समाधान किया। ग्रामीणों ने बताया कि हाल ही में हुई बारिश के कारण रास्ते पर बना छोटा पुल टूट गया है जिससे स्थिति और भी गंभीर हो गई है। रास्ता अब नाले का रूप ले चुका है जिससे बच्चों को स्कूल जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बुजुर्गों के लिए इस रास्ते पर चलना भी बेहद मुश्किल हो गया है। बीते दिनों बारिश के दौरान परीक्षा देने जा रहे विद्यार्थियों को ग्रामीणों ने बड़ी मुश्किल से इस रास्ते से पार करवाया। स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों ने अपने स्तर पर अस्थायी रूप से चलने योग्य रास्ता तैयार किया है लेकिन बारिश होने पर इसके बहने का खतरा बना हुआ है।
ग्रामीण रमेश शर्मा, अमित कुमार, अजय, ताशु, प्रताप चंद और निशांत ने बताया कि यह इन गांवों को जोड़ने वाला एकमात्र रास्ता है। इसी मार्ग से बच्चे स्कूल जाते हैं और लोगों का आवागमन होता है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि जल्द मौके का निरीक्षण कर इस मार्ग पर स्थायी पुल का निर्माण किया जाए। उधर, पूर्व प्रधान अनिल कुमार ने बताया कि इस बारे में कई बार पंचायत की ओर से उपायुक्त चंबा को प्रस्ताव भेजा गया था।