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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Deadly Rains: Havoc Unleashed on Thousands of Families in Himachal Over Six Years; 2,108 Lives Lost.

जानलेवा बरसात: हिमाचल में छह साल में हजारों परिवारों पर टूटा कहर, 2108 लोगों की गई जान

Sat, 25 Jul 2026 05:15 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Sat, 25 Jul 2026 05:15 AM IST
सार

पहाड़ों में बढ़ती अतिवृष्टि, बादल फटने, भूस्खलन और बाढ़ की घटनाओं ने मानसून को जानलेवा बना दिया है। पिछले पांच वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में बरसात के दौरान 2108 लोगों की जान जाने से हजारों परिवारों पर कहर टूटा। 

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Deadly Rains: Havoc Unleashed on Thousands of Families in Himachal Over Six Years; 2,108 Lives Lost.
हिमाचल में बरसात बरपा रही कहर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में मानसून अब बरसात का मौसम ही नहीं, बल्कि हर साल लौटने वाली एक ऐसी आपदा बन चुका है, जो अपने पीछे मौत, तबाही और हजारों करोड़ रुपये के नुकसान की भयावह कहानी छोड़ जाता है। पहाड़ों में बढ़ती अतिवृष्टि, बादल फटने, भूस्खलन और बाढ़ की घटनाओं ने मानसून को जानलेवा बना दिया है। पिछले पांच वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में बरसात के दौरान 2108 लोगों की जान जाने से हजारों परिवारों पर कहर टूटा। इस दौरान हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति भी तबाह हुई है।

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राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018 से 2022 के बीच ही मानसून अवधि में 1,553 लोगों की मौत हुई थी। इनमें सबसे अधिक 476 मौतें वर्ष 2021 में दर्ज की गई थीं। 2020 में 240, 2019 में 218 और 2022 में अगस्त तक 276 लोगों की जान गई थी। इसके बाद 2023 ने प्रदेश के इतिहास की सबसे भयावह आपदाओं में जगह बनाई। लगातार हुई अतिवृष्टि, भूस्खलन और बाढ़ की घटनाओं में 428 लोगों की मौत हुई। हजारों मकान, सड़कें, पुल और सार्वजनिक ढांचा क्षतिग्रस्त हुआ तथा आर्थिक नुकसान पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक आंका गया।

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वर्ष 2025 भी कम खतरनाक नहीं रहा। हिमाचल सरकार की आपदा आकलन रिपोर्ट के अनुसार सितंबर 2025 तक मानसूनी आपदाओं में 468 लोगों की मौत दर्ज की गई। सबसे अधिक प्रभावित जिलों में मंडी, चंबा, कांगड़ा और शिमला शामिल रहे, जहां बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं ने व्यापक तबाही मचाई। जलवायु परिवर्तन के कारण कम समय में अत्यधिक वर्षा की घटनाएं बढ़ रही हैं। हिमालयी क्षेत्रों में अनियोजित निर्माण, पहाड़ों की कटिंग, नदी-नालों के किनारे बढ़ता दबाव और संवेदनशील भूगर्भीय संरचना आपदा के जोखिम को और बढ़ा रही है। हालिया अध्ययनों में भी 2023 की त्रासदी को अत्यधिक वर्षा और भूस्खलनों से जोड़ते हुए हिमालयी क्षेत्रों की बढ़ती संवेदनशीलता की ओर संकेत किया गया है।

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इस मानसून भी हालात गंभीर
वर्तमान मानसून सीजन में भी प्रदेश के कई जिलों में लगातार भूस्खलन, बाढ़ और बादल फटने की घटनाएं सामने आ रही हैं। सैकड़ों सड़कें बाधित हुई हैं और कई क्षेत्रों में बिजली-पानी की आपूर्ति प्रभावित हुई है। मौसम विभाग दो बार भारी से बहुत भारी बारिश का रेड और कई बार ऑरेंज अलर्ट जारी कर चुका है।

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