Himachal News: एचपी बोर्ड की टॉपर से विश्व के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों में शामिल हुईं प्रो. मनप्रीत अरोड़ा
सीयूएचपी की शिक्षिका प्रो. मनप्रीत अरोड़ा को स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा जारी विश्व के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों की सूची-2025 में शामिल किया गया है। पढ़ें पूरी खबर...
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हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड में टॉप स्थान हासिल कर प्रतिभा का लोहा मनवा चुकीं केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश (सीयूएचपी) की शिक्षिका प्रो. मनप्रीत अरोड़ा ने अब वैश्विक मंच पर भी अपनी पहचान दर्ज करवाई है। प्रो. अरोड़ा को स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा जारी विश्व के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों की सूची-2025 में शामिल किया गया है, जिससे हिमाचल प्रदेश और देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन हुआ है। इस प्रतिष्ठित सूची में दुनिया भर के चुनिंदा वैज्ञानिकों को उनके शोध कार्य, प्रभावशाली प्रकाशनों और साइटेशन मेट्रिक्स के आधार पर शामिल किया गया है।
चयन में कंपोजिट सी-स्कोर को प्रमुख मानक माना जाता है, जो शोध की संख्या के बजाय उसके प्रभाव और गुणवत्ता को प्राथमिकता देता है। सीयूएचपी के स्कूल ऑफ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट स्टडीज से जुड़ी प्रो. मनप्रीत अरोड़ा को अर्थशास्त्र और बिजनेस मैनेजमेंट क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय शोध योगदान के लिए यह सम्मान मिला है। वे छात्र जीवन में गोल्ड मेडलिस्ट और बोर्ड टॉपर रही हैं। प्रो. अरोड़ा को शिक्षण, शोध और अकादमिक मार्गदर्शन का 23 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उनके नाम अब तक 120 से अधिक शोध प्रकाशन दर्ज हैं, जिनमें 70 स्कोपस-इंडेक्स्ड शोध पत्र और 13 संपादित पुस्तकें शामिल हैं। इसके साथ ही उन्होंने अनेक स्नातकोत्तर और शोधार्थी विद्यार्थियों का सफल मार्गदर्शन कर अकादमिक क्षेत्र को मजबूती दी है।
प्रो. मनप्रीत अरोड़ा के शोध कार्यों की विशेषता उनकी व्यावहारिकता और भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण है। उनका शोध केवल शैक्षणिक सिद्धांतों तक सीमित नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान प्रस्तुत करता है। माइक्रोफाइनेंस को उन्होंने केवल ऋण व्यवस्था नहीं, बल्कि गरीबों की उद्यमिता क्षमता को सशक्त करने वाला माध्यम बताया है। उनके शोध में यह सामने आया है कि स्वयं सहायता समूहों के जरिए ग्रामीण महिलाओं में रूपांतरणकारी नेतृत्व विकसित होता है, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनती हैं। पर्यटन क्षेत्र में उनके शोध ने भी नई दिशा दिखाई है।
उन्होंने यह दर्शाया है कि किस प्रकार मेटावर्स और डिजिटल तकनीक के माध्यम से सतत पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है, जिससे वास्तविक पर्यटन स्थलों पर पर्यावरणीय दबाव कम हो। भारतीय अनुभवों पर आधारित अपने शोधों में प्रो. अरोड़ा ने यह भी रेखांकित किया है कि माइक्रोफाइनेंस का उपयोग प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।
साथ ही उन्होंने ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय उत्पादों की मार्केटिंग और आपूर्ति शृंखला के स्थानीयकरण पर जोर दिया है, जो ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसे राष्ट्रीय विजन को मजबूती प्रदान करता है। वहीं उनकी इस उपलब्धि के चलते उन्हें हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के 16वें स्थापना दिवस के मौके पर सम्मानित भी किया गया है।