हिमाचल: क्रिप्टोकरेंसी घोटाले में ईडी ने तीन और आरोपी दबोचे, कोर्ट ने 12 दिन की ईडी हिरासत में भेजे
क्रिप्टोकरेंसी के नाम पर बड़े पैमाने पर निवेशकों से ठगी करने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। विशेष धन शोधन निवारण न्यायालय शिमला ने तीनों को 12 दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया है।
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हिमाचल प्रदेश और पंजाब में क्रिप्टोकरेंसी के नाम पर बड़े पैमाने पर निवेशकों से ठगी करने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ईडी की शिमला उपक्षेत्रीय इकाई ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मिलन गर्ग, सुखदेव ठाकुर और अभिषेक शर्मा को गिरफ्तार किया। मिलन गर्ग मेरठ (यूपी) जबकि सुखदेव ठाकुर मंडी और अभिषेक शर्मा ऊना का रहने वाला है। तीनों पहले से ही एक अन्य मामले में न्यायिक हिरासत में थे। ईडी ने विशेष वारंट के माध्यम से इन्हें अपनी हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया। विशेष धन शोधन निवारण न्यायालय शिमला ने तीनों को 12 दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया है। इससे पहले ईडी ने मामले में हेम राज और मासूस जुनेजा को गिरफ्तार किया था जबकि हिमाचल पुलिस मामले में कुल 76 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।
219 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक के लेनदेन का खुलासा
वित्तीय अनियमिताओं से जुड़ा मामला होने के चलते प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले की जांच अपने हाथों में ली है। ईडी की जांच के अनुसार, इन आरोपियों ने वर्ष 2018 में मुख्य साजिशकर्ता सुभाष शर्मा, हेम राज और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर क्रिप्टोकरेंसी आधारित बहुस्तरीय विपणन योजना शुरू की थी। इसके तहत कॉर्वियो कॉइन नाम की कथित डिजिटल मुद्रा और विभिन्न निवेश योजनाओं के जरिये लोगों को ऊंचे और निश्चित लाभ का लालच दिया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, नए निवेशकों से जुटाई गई रकम से पुराने निवेशकों को लाभ दिया जाता था। जांच में 2.48 लाख से अधिक लोगों के इस नेटवर्क से जुड़ने और 219 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक के लेनदेन का पता चला है। भारतीय मुद्रा में यह राशि करीब 500 करोड़ रुपये से अधिक है। ईडी के अनुसार, सुखदेव ठाकुर और अभिषेक शर्मा पर निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सभाएं और प्रचार कार्यक्रम करते थे। निवेशकों से जुटाई राशि मुख्य साजिशकर्ता सुभाष शर्मा के निर्देश पर अन्य सह-साजिशकर्ताओं तक पहुंचाई जाती थी।
ठगी की रकम से खरीदी संपत्तियां
जांच एजेंसी के मुताबिक, ठगी से अर्जित रकम का इस्तेमाल संपत्तियां खरीदने और विभिन्न परियोजनाओं में निवेश के लिए किया गया। जांच में जुनेजा स्क्वायर नामक व्यावसायिक संपत्ति में सुखदेव ठाकुर की 10 प्रतिशत और अभिषेक शर्मा की पांच प्रतिशत हिस्सेदारी होने की जानकारी सामने आई है। सुखदेव ठाकुर के बैंक और डिजिटल मुद्रा खातों के माध्यम से धन के लेनदेन के साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है। वहीं, अभिषेक शर्मा के बैंक खातों से धन शोधन और संपत्ति संबंधी परियोजनाओं में बड़े लेनदेन का पता चला है।
मुख्य साजिशकर्ता सुभाष शर्मा अब भी फरार
इस मामले का मुख्य साजिशकर्ता सुभाष शर्मा अभी भी जांच एजेंसियों की गिरफ्त से बाहर है। दुबई में छिपे सुभाष शर्मा के खिलाफ ईडी रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की तैयारी कर रही है ताकि उसे भारत लाकर कानूनी कार्रवाई की जा सके।