हिमाचल: राष्ट्रपति दरबार पहुंचा हिमाचल के राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल का मुद्दा, 80 पन्नों की याचिका दायर
किसान और सामाजिक संगठनों की संयुक्त संघर्ष समिति ने इस मुद्दे को राष्ट्रपति भवन तक पहुंचाते हुए 80 पन्नों की विस्तृत सांविधानिक याचिका दायर की है।
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हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगाए गए टोल बैरियरों को हटाने की मांग ने अब सांविधानिक लड़ाई का रूप ले लिया है। किसान और सामाजिक संगठनों की संयुक्त संघर्ष समिति ने इस मुद्दे को राष्ट्रपति भवन तक पहुंचाते हुए 80 पन्नों की विस्तृत सांविधानिक याचिका दायर की है। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 256 और 257 के तहत हिमाचल प्रदेश सरकार को निर्देश जारी कर राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्थापित सभी टोल बैरियर हटाने और टोल वसूली बंद कराने की मांग की गई है।
संघर्ष समिति के कानूनी सलाहकार एवं हाईकोर्ट के अधिवक्ता उत्तांश मोंगा ने यह याचिका दाखिल की है, जिसे औपचारिक रूप से पंजीकृत भी कर लिया गया है। संयुक्त संघर्ष समिति में गौरव राणा के नेतृत्व वाला पंजाब मोर्चा, कश्मीर सिंह नांगली के नेतृत्व वाली जन कल्याण समिति (आनंदपुर साहिब), कीर्ति किसान मोर्चा के वीर सिंह भरवा और हरप्रीत सिंह भट्टू, किसान नेता सेठी शर्मा, किसान यूनियन बेहराम के करणवीर सिंह सहित कई किसान और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हैं। याचिका में तर्क दिया गया है कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल लगाने और वसूलने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 246 और सातवीं अनुसूची की संघ सूची (यूनियन लिस्ट) की प्रविष्टि 23 और 96 के तहत विशेष रूप से संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के पास राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल लगाने का विधायी अधिकार नहीं है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि हिमाचल प्रदेश टोल अधिनियम, 1975 और उसके तहत बनाई गई नीतियों के आधार पर राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल वसूली संविधान के भाग-11 में निर्धारित केंद्र-राज्य शक्तियों के विभाजन के विपरीत है। यह अनुच्छेद 254 के तहत भी गंभीर सांविधानिक प्रश्न खड़े करता है। याचिका में राष्ट्रपति से अनुरोध किया गया है कि वह अनुच्छेद 256 के तहत हिमाचल सरकार को संसद की ओर से बनाए गए राष्ट्रीय राजमार्ग संबंधी कानूनों और संविधान के अनुरूप कार्य करने के निर्देश दें। यह सुनिश्चित किया जाए कि राज्य सरकार की कार्यवाही केंद्र सरकार की कार्यपालिका शक्तियों में बाधा न डाले।
एनएचएआई के दस्तावेजों का भी हवाला
याचिका में एनएचएआई मंडी इकाई के परियोजना निदेशक द्वारा भेजे गए पत्रों और दस्तावेजों का भी उल्लेख किया गया है। दावा किया गया है कि एनएचएआई ने कई बार हिमाचल सरकार से राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्थापित टोल बैरियर हटाने का अनुरोध किया था। याचिका के अनुसार ये बैरियर राष्ट्रीय राजमार्गों के संचालन, रखरखाव, विकास और प्रशासन में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं तथा राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 के तहत केंद्र सरकार द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारियों के निर्वहन को प्रभावित कर रहे हैं।
2026-27 की टोल नीति पर भी आपत्ति
संघर्ष समिति ने हिमाचल प्रदेश की वर्ष 2026-27 की टोल नीति पर भी सवाल उठाए हैं। याचिका में कहा गया है कि इस नीति में रोड इंफ्रास्ट्रक्चर की परिभाषा में राष्ट्रीय राजमार्गों को शामिल किया गया है, जो स्वयं इस बात का प्रमाण है कि राज्य सरकार ऐसे विषय पर अधिकार जता रही है जो संविधान के अनुसार केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि हिमाचल प्रदेश सरकार राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्थापित टोल बैरियरों के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 150 से 200 करोड़ रुपये की वसूली कर रही है। संघर्ष समिति का कहना है कि जिस वसूली की सांवैधानिक वैधता ही सवालों के घेरे में है, उससे राज्य सरकार को भारी राजस्व प्राप्त हो रहा है।