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Hamirpur (Himachal) News: अरबी के डंठलों से आशा ने बनाया आत्मनिर्भरता का रास्ता
Fri, 17 Jul 2026 12:58 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Fri, 17 Jul 2026 12:58 AM IST
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अरबी के डंठल से तैयार की गई बढ़ियां। संवाद
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हमीरपुर। खेतों में सब्जियां तैयार होने के बाद अक्सर डंठल और पत्तियां बेकार समझकर फेंक दी जाती हैं, लेकिन डल्याहू गांव की आशा ने अरबी के डंठलों को आय का साधन बना लिया है। घर से शुरू किए गए छोटे से काम ने उन्हें आत्मनिर्भर बना दिया है।
आशा अरबी के डंठलों से स्वादिष्ट और लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाला पारंपरिक खाद्य जैसे बड़ियां आदि तैयार कर हर माह आठ से दस हजार रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं। उनकी इस पहल से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और गांव की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार की प्रेरणा मिल रही है।
आशा ने बताया कि पहले अरबी की फसल के बाद डंठलों को बेकार समझकर फेंक दिया जाता था। इसके बाद उन्होंने इनका उपयोग कर उत्पाद तैयार करने का विचार बनाया। उन्होंने पारंपरिक तरीके से डंठलों को साफ कर, सुखाकर और मसालों के साथ तैयार करना शुरू किया।
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स्वाद और गुणवत्ता के कारण धीरे-धीरे इसकी मांग बढ़ने लगी। अब वह घर पर ही ऑर्डर के अनुसार उत्पाद तैयार करती हैं। स्थानीय मेलों, स्वयं सहायता समूहों की प्रदर्शनियों और परिचितों के माध्यम से इसकी बिक्री भी हो रही है। इसके अलावा वह विभिन्न प्रकार की दाल और चावल के उत्पाद भी तैयार कर रही हैं। आशा स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर अन्य महिलाओं को भी इस काम की जानकारी दे रही हैं।
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आशा अरबी के डंठलों से स्वादिष्ट और लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाला पारंपरिक खाद्य जैसे बड़ियां आदि तैयार कर हर माह आठ से दस हजार रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं। उनकी इस पहल से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और गांव की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार की प्रेरणा मिल रही है।
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आशा ने बताया कि पहले अरबी की फसल के बाद डंठलों को बेकार समझकर फेंक दिया जाता था। इसके बाद उन्होंने इनका उपयोग कर उत्पाद तैयार करने का विचार बनाया। उन्होंने पारंपरिक तरीके से डंठलों को साफ कर, सुखाकर और मसालों के साथ तैयार करना शुरू किया।
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स्वाद और गुणवत्ता के कारण धीरे-धीरे इसकी मांग बढ़ने लगी। अब वह घर पर ही ऑर्डर के अनुसार उत्पाद तैयार करती हैं। स्थानीय मेलों, स्वयं सहायता समूहों की प्रदर्शनियों और परिचितों के माध्यम से इसकी बिक्री भी हो रही है। इसके अलावा वह विभिन्न प्रकार की दाल और चावल के उत्पाद भी तैयार कर रही हैं। आशा स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर अन्य महिलाओं को भी इस काम की जानकारी दे रही हैं।

अरबी के डंठल से तैयार की गई बढ़ियां। संवाद