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Hamirpur (Himachal) News: बसने से पहले ही वीरान पड़ा बड़सर का औद्योगिक क्षेत्र बल्ह बिहाल
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sat, 24 Jan 2026 12:37 AM IST
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बड़सर में बिजली की तारें टूटी। स्रोत : बिजली बोर्ड
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बिझड़ी (हमीरपुर)। करीब एक दशक तक विधानसभा चुनावों में मुद्दा बनने वाला बड़सर विधानसभा क्षेत्र का बहुचर्चित औद्योगिक क्षेत्र बल्ह बिहाल आज खुद अपनी पहचान के लिए जूझ रहा है।
उद्योगों को पंख देने के सपने के साथ तैयार किया गया यह औद्योगिक क्षेत्र बसने से पहले ही वीरान हो चुका है। करोड़ों रुपये की लागत से बने शैड और प्लॉट अब रोजगार का केंद्र बनने की बजाय जर्जर ढांचे में तब्दील हो रहे हैं। करीब 54.46 कनाल भूमि पर विकसित औद्योगिक क्षेत्र बल्ह बिहाल की दहलीज तक उद्यमी नहीं पहुंच पाए।
मशीनों की गूंज के लिए तैयार यह परिसर आज सन्नाटे और टूटे शीशों तक सीमित रह गया है। बिझड़ी तहसील मुख्यालय से महज दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह औद्योगिक क्षेत्र सुनसान पड़ा है। शैड के गेट पर ताले लटक रहे हैं, शीशे टूट चुके हैं और शौचालय बदहाली की तस्वीर पेश कर रहे हैं। जिस परिसर से क्षेत्र के युवाओं को रोजगार की आस थी, वहां आज प्लॉट और शैड वीरान पड़े हैं।
बड़सर उपमंडल के युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से 13 जून 2012 को बल्ह बिहाल को औद्योगिक क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया था। तमाम औपचारिकताओं के बाद 18 जनवरी, 2015 को तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने इसका शिलान्यास किया। करीब 1.50 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह औद्योगिक क्षेत्र 29 अक्टूबर 2018 को उद्योग विभाग के सुपुर्द किया गया।
यहां 10 प्लॉट और सात शैड बनाए गए, लेकिन हकीकत यह है कि अब तक सिर्फ दो यूनिट ही धरातल पर उतर सकी हैं, जबकि बाकी ढांचा खाली और उपेक्षित पड़ा है। जिन दो शैड को आवंटित किया गया है, वहां पर उत्पादन को लेकर कोई खास आउटपुट नहीं है।
पांच शैड के लिए नहीं मिला एक भी आवेदन
औद्योगिक क्षेत्र बल्ह बिहाल में बनाए 10 प्लॉट और सात शैड में से नौ प्लॉट आवंटित हो चुके हैं, लेकिन अधिकतर उद्यमियों ने अब तक काम शुरू नहीं किया। विभाग की ओर से उन्हें रिमाइंडर भेजे जा चुके हैं। सात में से केवल दो शैड में ही उत्पादन कार्य शुरू हुआ है, जबकि पांच शैड अब भी आवंटन के इंतजार में हैं। इन्हें पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर देने की योजना है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक एक भी आवेदन नहीं आया है। उद्योग विभाग का दावा है कि क्षेत्र में बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं, बावजूद इसके उद्यमियों की बेरुखी सवाल खड़े कर रही है।
कोट
युवाओं को आगे आना चाहिए, ताकि स्वरोजगार को बढ़ावा मिल सके। सुविधाओं की कोई कमी नहीं है। यहां पर उद्यमियों को लाने और बसाने के लिए और बेहतर प्रयास किए जाएंगे। -ठाकुर भगत सिंह नेगी, महाप्रबंधक, उद्योग विभाग, हमीरपुर
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उद्योगों को पंख देने के सपने के साथ तैयार किया गया यह औद्योगिक क्षेत्र बसने से पहले ही वीरान हो चुका है। करोड़ों रुपये की लागत से बने शैड और प्लॉट अब रोजगार का केंद्र बनने की बजाय जर्जर ढांचे में तब्दील हो रहे हैं। करीब 54.46 कनाल भूमि पर विकसित औद्योगिक क्षेत्र बल्ह बिहाल की दहलीज तक उद्यमी नहीं पहुंच पाए।
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मशीनों की गूंज के लिए तैयार यह परिसर आज सन्नाटे और टूटे शीशों तक सीमित रह गया है। बिझड़ी तहसील मुख्यालय से महज दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह औद्योगिक क्षेत्र सुनसान पड़ा है। शैड के गेट पर ताले लटक रहे हैं, शीशे टूट चुके हैं और शौचालय बदहाली की तस्वीर पेश कर रहे हैं। जिस परिसर से क्षेत्र के युवाओं को रोजगार की आस थी, वहां आज प्लॉट और शैड वीरान पड़े हैं।
बड़सर उपमंडल के युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से 13 जून 2012 को बल्ह बिहाल को औद्योगिक क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया था। तमाम औपचारिकताओं के बाद 18 जनवरी, 2015 को तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने इसका शिलान्यास किया। करीब 1.50 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह औद्योगिक क्षेत्र 29 अक्टूबर 2018 को उद्योग विभाग के सुपुर्द किया गया।
यहां 10 प्लॉट और सात शैड बनाए गए, लेकिन हकीकत यह है कि अब तक सिर्फ दो यूनिट ही धरातल पर उतर सकी हैं, जबकि बाकी ढांचा खाली और उपेक्षित पड़ा है। जिन दो शैड को आवंटित किया गया है, वहां पर उत्पादन को लेकर कोई खास आउटपुट नहीं है।
पांच शैड के लिए नहीं मिला एक भी आवेदन
औद्योगिक क्षेत्र बल्ह बिहाल में बनाए 10 प्लॉट और सात शैड में से नौ प्लॉट आवंटित हो चुके हैं, लेकिन अधिकतर उद्यमियों ने अब तक काम शुरू नहीं किया। विभाग की ओर से उन्हें रिमाइंडर भेजे जा चुके हैं। सात में से केवल दो शैड में ही उत्पादन कार्य शुरू हुआ है, जबकि पांच शैड अब भी आवंटन के इंतजार में हैं। इन्हें पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर देने की योजना है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक एक भी आवेदन नहीं आया है। उद्योग विभाग का दावा है कि क्षेत्र में बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं, बावजूद इसके उद्यमियों की बेरुखी सवाल खड़े कर रही है।
कोट
युवाओं को आगे आना चाहिए, ताकि स्वरोजगार को बढ़ावा मिल सके। सुविधाओं की कोई कमी नहीं है। यहां पर उद्यमियों को लाने और बसाने के लिए और बेहतर प्रयास किए जाएंगे। -ठाकुर भगत सिंह नेगी, महाप्रबंधक, उद्योग विभाग, हमीरपुर

बड़सर में बिजली की तारें टूटी। स्रोत : बिजली बोर्ड

बड़सर में बिजली की तारें टूटी। स्रोत : बिजली बोर्ड

बड़सर में बिजली की तारें टूटी। स्रोत : बिजली बोर्ड

बड़सर में बिजली की तारें टूटी। स्रोत : बिजली बोर्ड

बड़सर में बिजली की तारें टूटी। स्रोत : बिजली बोर्ड
