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Hamirpur (Himachal) News: एनआईटी में फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का समापन, उद्योग-शिक्षा साझेदारी पर मंथन
Sat, 18 Jul 2026 01:37 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sat, 18 Jul 2026 01:37 AM IST
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एनआईटी हमीरपुर में आयोजित फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम तैयार उत्पादों का निरीक्षण करते अधिकारी।
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हमीरपुर। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) हमीरपुर में सप्ताहभर चले फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का समापन शुक्रवार को उद्योग-शिक्षा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी पर आयोजित उच्चस्तरीय पैनल चर्चा के साथ हुआ।
शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों, स्टार्टअप उद्यमियों और नीति निर्माताओं ने शोध को प्रयोगशाला से बाजार तक पहुंचाने, उद्योग की जरूरतों के अनुरूप शिक्षा प्रणाली विकसित करने और नवाचार आधारित स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
पैनल चर्चा के दौरान प्रतिभागियों और स्टार्टअप संस्थापकों ने अपने उत्पाद और विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने विशेषज्ञों से शोध, नवाचार और उद्यमिता से जुड़े विषयों पर संवाद कर सुझाव प्राप्त किए। चर्चा का संचालन डॉ. पमिता अवस्थी ने किया।
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इसमें सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी के कुलपति प्रो. ललित कुमार अवस्थी, आईलेक्स सॉफ्टहब के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी रमन बैंस, एरिक्सन इंडिया के निदेशक एवं सीयू हेड रामानंद शर्मा, एचएल मांडो सॉफ्टटेक के विभागाध्यक्ष पूरन चंद, सैक्यूमेन के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी नितेश सिन्हा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के वैज्ञानिक डॉ. सीएस यादव तथा सीसीआई की कार्यकारी अधिकारी इशिता गुप्ता ने विचार साझा किए।
प्रो. ललित कुमार अवस्थी ने कहा कि विश्वविद्यालयों में शोध का मूल्यांकन केवल शोध पत्रों से नहीं, बल्कि उसके सामाजिक और औद्योगिक प्रभाव के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने रिसर्च पार्क, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर ऑफिस, प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस व्यवस्था और अनुभव आधारित शिक्षण मॉडल अपनाने की आवश्यकता बताई।
रमन बैंस ने कहा कि उद्योगों को अब केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि समस्या समाधान क्षमता, संवाद कौशल, व्यावहारिक अनुभव और नई तकनीकों के अनुरूप खुद को विकसित करने वाले इंजीनियरों की जरूरत है।
रामानंद शर्मा ने फाइव जी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और इंडस्ट्री 4.0 जैसे क्षेत्रों में विश्वविद्यालयों और उद्योगों के बीच संयुक्त अनुसंधान प्रयोगशालाओं तथा दीर्घकालिक साझेदारी को समय की जरूरत बताया।
वहीं, डॉ. सीएस यादव ने डीएसटी समर्थित एनआईडीएचआई-आईटीबीआई कार्यक्रम की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि टियर-2 और टियर-3 संस्थानों में भी नवाचार आधारित उद्यमिता को नई गति मिल रही है।
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शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों, स्टार्टअप उद्यमियों और नीति निर्माताओं ने शोध को प्रयोगशाला से बाजार तक पहुंचाने, उद्योग की जरूरतों के अनुरूप शिक्षा प्रणाली विकसित करने और नवाचार आधारित स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
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पैनल चर्चा के दौरान प्रतिभागियों और स्टार्टअप संस्थापकों ने अपने उत्पाद और विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने विशेषज्ञों से शोध, नवाचार और उद्यमिता से जुड़े विषयों पर संवाद कर सुझाव प्राप्त किए। चर्चा का संचालन डॉ. पमिता अवस्थी ने किया।
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इसमें सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी के कुलपति प्रो. ललित कुमार अवस्थी, आईलेक्स सॉफ्टहब के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी रमन बैंस, एरिक्सन इंडिया के निदेशक एवं सीयू हेड रामानंद शर्मा, एचएल मांडो सॉफ्टटेक के विभागाध्यक्ष पूरन चंद, सैक्यूमेन के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी नितेश सिन्हा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के वैज्ञानिक डॉ. सीएस यादव तथा सीसीआई की कार्यकारी अधिकारी इशिता गुप्ता ने विचार साझा किए।
प्रो. ललित कुमार अवस्थी ने कहा कि विश्वविद्यालयों में शोध का मूल्यांकन केवल शोध पत्रों से नहीं, बल्कि उसके सामाजिक और औद्योगिक प्रभाव के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने रिसर्च पार्क, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर ऑफिस, प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस व्यवस्था और अनुभव आधारित शिक्षण मॉडल अपनाने की आवश्यकता बताई।
रमन बैंस ने कहा कि उद्योगों को अब केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि समस्या समाधान क्षमता, संवाद कौशल, व्यावहारिक अनुभव और नई तकनीकों के अनुरूप खुद को विकसित करने वाले इंजीनियरों की जरूरत है।
रामानंद शर्मा ने फाइव जी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और इंडस्ट्री 4.0 जैसे क्षेत्रों में विश्वविद्यालयों और उद्योगों के बीच संयुक्त अनुसंधान प्रयोगशालाओं तथा दीर्घकालिक साझेदारी को समय की जरूरत बताया।
वहीं, डॉ. सीएस यादव ने डीएसटी समर्थित एनआईडीएचआई-आईटीबीआई कार्यक्रम की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि टियर-2 और टियर-3 संस्थानों में भी नवाचार आधारित उद्यमिता को नई गति मिल रही है।