{"_id":"6a3837eac48c5a2a1204a20b","slug":"flower-farming-changed-his-fortunes-vinay-quit-his-job-abroad-to-become-a-successful-entrepreneur-hamirpur-hp-news-c-94-1-hmp1026-197955-2026-06-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hamirpur (Himachal) News: फूलों की खेती से बदली किस्मत, विदेशी नौकरी छोड़ सफल उद्यमी बने विनय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hamirpur (Himachal) News: फूलों की खेती से बदली किस्मत, विदेशी नौकरी छोड़ सफल उद्यमी बने विनय
Mon, 22 Jun 2026 12:43 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Mon, 22 Jun 2026 12:43 AM IST
विज्ञापन
लदरौर में अपनी नर्सरी में ग्राहक को फोटो दिखाते हुए विनय वर्मा। संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हमीरपुर। बहरीन के एक होटल में नौकरी करते हुए सालाना 18 लाख रुपये का पैकेज पाने वाले लदरौर निवासी विनय वर्मा ने विदेश की नौकरी छोड़कर अपने गांव में फूलों की खुशबू से अपनी आर्थिकी को नई दिशा दी है।
विदेश की चमक-दमक और अच्छी तनख्वाह को छोड़कर उन्होंने स्वरोजगार का रास्ता चुना, जो आज उनकी पहचान के साथ-साथ आसपास के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुका है। कोरोनाकाल के बाद सितंबर 2021 में घर लौटने पर उन्होंने भविष्य को लेकर निर्णय लिया और वर्ष 2022 में पिता के सहयोग से फूलों की नर्सरी शुरू की।
शुरुआत में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन परिवार और विशेषकर उद्यान विभाग से सेवानिवृत्त पिता के सहयोग से उनका हौसला बढ़ता गया। धीरे-धीरे उनकी नर्सरी में तैयार पौधों की मांग बढ़ने लगी और व्यवसाय ने रफ्तार पकड़ ली।
विज्ञापन
आज विनय देश के विभिन्न राज्यों जैसे पुणे, पंजाब, पश्चिम बंगाल और उत्तराखंड से पौधे और बीज मंगवाकर नर्सरी में नई प्रजातियां विकसित कर रहे हैं। वर्तमान में विनय वर्मा अपनी नर्सरी से हर महीने लगभग एक से डेढ़ लाख रुपये तक की आय प्राप्त कर रहे हैं।
विज्ञापन
विदेश की चमक-दमक और अच्छी तनख्वाह को छोड़कर उन्होंने स्वरोजगार का रास्ता चुना, जो आज उनकी पहचान के साथ-साथ आसपास के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुका है। कोरोनाकाल के बाद सितंबर 2021 में घर लौटने पर उन्होंने भविष्य को लेकर निर्णय लिया और वर्ष 2022 में पिता के सहयोग से फूलों की नर्सरी शुरू की।
विज्ञापन
शुरुआत में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन परिवार और विशेषकर उद्यान विभाग से सेवानिवृत्त पिता के सहयोग से उनका हौसला बढ़ता गया। धीरे-धीरे उनकी नर्सरी में तैयार पौधों की मांग बढ़ने लगी और व्यवसाय ने रफ्तार पकड़ ली।
विज्ञापन
आज विनय देश के विभिन्न राज्यों जैसे पुणे, पंजाब, पश्चिम बंगाल और उत्तराखंड से पौधे और बीज मंगवाकर नर्सरी में नई प्रजातियां विकसित कर रहे हैं। वर्तमान में विनय वर्मा अपनी नर्सरी से हर महीने लगभग एक से डेढ़ लाख रुपये तक की आय प्राप्त कर रहे हैं।