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Hamirpur (Himachal) News: दीवारें ऊंची, सुरक्षा कमजोर...जेल तक कैसे पहुंचा चिट्टा
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हमीरपुर। जिला पुलिस लाइन के खेल मैदान से सटी उप जेल में चिट्टा, मोबाइल फोन और अन्य प्रतिबंधित सामग्री की बरामदगी ने पुलिस और जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदेश में चिट्टा तस्करी के खिलाफ जीरो टॉलरेंस और कड़ी निगरानी के दावों के बीच पुलिस लाइन से सटे क्षेत्र तक नशे की खेप पहुंच जाना सुरक्षा तंत्र की बड़ी चूक माना जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस उप जेल में बड़ी संख्या में एनडीपीएस अधिनियम के मामलों के आरोपी बंद हैं और जिसकी दीवारें जिला पुलिस के सबसे बड़े सुरक्षा केंद्र से सटी हैं, वहां तक प्रतिबंधित सामग्री आखिर पहुंची कैसे? घटना ने जेल के भीतर और बाहर दोनों स्तरों पर निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने एल्युमीनियम फॉयल पेपर में पैक प्रतिबंधित सामग्री का पैकेट जेल की ऊंची दीवार के पार फेंका। हैरानी की बात यह है कि जेल और पुलिस लाइन के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के बावजूद पैकेट फेंकने वाला कोई भी व्यक्ति कैमरों में कैद नहीं हुआ। इससे यह भी संकेत मिल रहे हैं कि घटना को पूरी योजना के साथ अंजाम दिया गया जो कैमरों की निगरानी से बाहर था।
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उप जेल में इस समय 88 कैदी बंद हैं। इनमें कुछ सजायाफ्ता हैं, जबकि कई विचाराधीन कैदी हैं। इनमें अधिकांश एनडीपीएस अधिनियम से जुड़े मामलों में बंद हैं। ऐसे में नशा तस्करों के बाहरी नेटवर्क पर लगातार निगरानी रखना सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। ताजा घटना ने इस आशंका को भी बल दिया है कि जेल के भीतर बंद आरोपियों तक प्रतिबंधित सामग्री पहुंचाने के लिए बाहरी नेटवर्क अब भी सक्रिय है।
मामले की जांच जारी है। जेल परिसर में प्रतिबंधित सामग्री किसने फेंकी, इसका जल्द पता लगा लिया जाएगा। निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत किया जाएगा।
-- बलवीर सिंह, पुलिस अधीक्षक, हमीरपुर
जेल की बाहरी दीवार के आसपास जिन स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों की कमी है, उनकी पहचान की जाएगी। जल्द ही इस संबंध में कार्ययोजना तैयार कर सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत की जाएगी।
-- संजीत सिंह, एसडीएम, हमीरपुर
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सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस उप जेल में बड़ी संख्या में एनडीपीएस अधिनियम के मामलों के आरोपी बंद हैं और जिसकी दीवारें जिला पुलिस के सबसे बड़े सुरक्षा केंद्र से सटी हैं, वहां तक प्रतिबंधित सामग्री आखिर पहुंची कैसे? घटना ने जेल के भीतर और बाहर दोनों स्तरों पर निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
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प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने एल्युमीनियम फॉयल पेपर में पैक प्रतिबंधित सामग्री का पैकेट जेल की ऊंची दीवार के पार फेंका। हैरानी की बात यह है कि जेल और पुलिस लाइन के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के बावजूद पैकेट फेंकने वाला कोई भी व्यक्ति कैमरों में कैद नहीं हुआ। इससे यह भी संकेत मिल रहे हैं कि घटना को पूरी योजना के साथ अंजाम दिया गया जो कैमरों की निगरानी से बाहर था।
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उप जेल में इस समय 88 कैदी बंद हैं। इनमें कुछ सजायाफ्ता हैं, जबकि कई विचाराधीन कैदी हैं। इनमें अधिकांश एनडीपीएस अधिनियम से जुड़े मामलों में बंद हैं। ऐसे में नशा तस्करों के बाहरी नेटवर्क पर लगातार निगरानी रखना सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। ताजा घटना ने इस आशंका को भी बल दिया है कि जेल के भीतर बंद आरोपियों तक प्रतिबंधित सामग्री पहुंचाने के लिए बाहरी नेटवर्क अब भी सक्रिय है।
मामले की जांच जारी है। जेल परिसर में प्रतिबंधित सामग्री किसने फेंकी, इसका जल्द पता लगा लिया जाएगा। निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत किया जाएगा।
जेल की बाहरी दीवार के आसपास जिन स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों की कमी है, उनकी पहचान की जाएगी। जल्द ही इस संबंध में कार्ययोजना तैयार कर सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत की जाएगी।