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Himachal News: पालन-पोषण से पीछे हटे माता-पिता, शिमला पहुंचाई हमीरपुर में मिली बच्ची
बवीता चंदेल, हमीरपुर।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Sun, 12 Apr 2026 01:23 PM IST
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सार
23 मार्च को मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में प्रसव के महज कुछ घंटों बाद ही एक दंपती अपनी नवजात बच्ची को अस्पताल में छोड़कर भाग गया था। अब माता-पिता की ममता से वंचित नवजात बच्ची अब किसी और की गोद में पलेगी। पढ़ें पूरी खबर...
बच्ची को टूटीकंडी में चिकित्सकों को सौंपते कर्मचारी।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
माता-पिता की ममता से वंचित नवजात बच्ची अब किसी और की गोद में पलेगी। मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में 23 मार्च को नवजात बच्ची को छोड़ने वाले मामले में अब जिला बाल संरक्षण समिति ने यह फैसला लिया है।
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माता-पिता के पोषण से पीछे हटने के बाद यह फैसला लिया गया है। बच्ची को पालन-पोषण के लिए टूटीकंडी में स्थित बाल संरक्षण केंद्र भेज दिया गया है। केंद्र के कार्यरत चिकित्सक और केयर टेकर उसकी सेहत, पोषण और हर जरूरत का खास ख्याल रखेंगे।
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बच्ची को विधिवत प्रक्रिया के तहत एडॉप्शन (दत्तक ग्रहण) के लिए भी तैयार किया जाएगा। जब तक उसे कोई उपयुक्त परिवार नहीं मिल जाता, तब तक बाल संरक्षण केंद्र में ही उसका पालन-पोषण किया जाएगा।
गौरतलब है कि 23 मार्च को मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में प्रसव के महज कुछ घंटों बाद ही एक दंपती अपनी नवजात बच्ची को अस्पताल में छोड़कर भाग गया था। परिजनों के जाने के बाद बच्ची संक्रमण का शिकार हो गई थी। उपचार के लिए अस्पताल प्रशासन की ओर से बच्ची को टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था। उपचार के बाद दोबारा बच्ची को मेडिकल कॉलेज हमीरपुर लाया गया, वहां पर विभागीय जांच के दौरान बच्ची के परिजनों को बुलाया गया।
जांच के दौरान बच्ची के परिजनों ने उसकी देखभाल में असमर्थता जताई थी। फिर प्रशासन ने उसे टूटीकंडी स्थित बाल संरक्षण केंद्र में शिफ्ट कर दिया। प्रसव के दौरान बच्ची का वजन 1600 ग्राम था। अब 18 दिन बाद दो किलो से अधिक हो गया है। संक्रमण थम गया है।
जांच के दौरान बच्ची के परिजनों ने उसकी देखभाल में असमर्थता जताई थी। फिर प्रशासन ने उसे टूटीकंडी स्थित बाल संरक्षण केंद्र में शिफ्ट कर दिया। प्रसव के दौरान बच्ची का वजन 1600 ग्राम था। अब 18 दिन बाद दो किलो से अधिक हो गया है। संक्रमण थम गया है।
नवजात को देखभाल के लिए टूटीकंडी स्थित केंद्र में भेज दिया गया है। केंद्र में मौजूद चिकित्सक और केयर टेकर बच्ची को आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं, पोषण और सुरक्षा प्रदान करेंगे। -कुलदीप सिंह चौहान, जिला बाल संरक्षण अधिकारी एवं सीडीपीओ
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