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Hamirpur (Himachal) News: जेल में मिले पुराने मोबाइल के आईएमईआई नंबर खोलेंगे तस्करी की कड़ी
Sat, 18 Jul 2026 01:30 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sat, 18 Jul 2026 01:30 AM IST
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हमीरपुर। दोसड़का स्थित उप जेल हमीरपुर में चिट्टा, मोबाइल फोन और अन्य प्रतिबंधित सामग्री बरामद होने के मामले की जांच अब साइबर तकनीक के जरिए आगे बढ़ाई जा रही है। जेल परिसर से बरामद दोनों मोबाइल फोन पुराने और पहले से इस्तेमाल किए हुए पाए गए हैं।
पुलिस इनके आईएमईआई नंबर के माध्यम से यह पता लगाने में जुटी है कि इनमें पहले किन-किन सिम कार्डों का इस्तेमाल हुआ और इन्हें कौन संचालित कर रहा था। पुलिस को उम्मीद है कि मोबाइल फोन की जांच से प्रतिबंधित सामग्री जेल में पहुंचाने वालों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
बरामद चिट्टा, नशीले कैप्सूल, गोलियां और अन्य वस्तुओं को अदालत में पेश करने के बाद जांच के लिए क्षेत्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (आरएफएसएल) जुंगा भेज दिया गया है। रिपोर्ट से बरामद पदार्थों और उनमें मौजूद मादक तत्वों की पुष्टि होगी।
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पुलिस ने बुधवार को इस मामले में तीन अंडर ट्रायल कैदियों हीरा मुखिया, ताज मोहम्मद और शुभकरण के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। आरोपियों से पूछताछ अदालत की अनुमति मिलने के बाद ही की जाएगी।
वीरवार को एसडीएम हमीरपुर एवं जेल अधीक्षक संजीत सिंह ने जेल का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने कर्मचारियों को निगरानी व्यवस्था और अधिक मजबूत करने के निर्देश दिए।
बुधवार दोपहर जेल परिसर में बाहर से फेंके गए एक संदिग्ध पैकेट से करीब 1.37 ग्राम चिट्टा, दो मोबाइल फोन, नशीले कैप्सूल, प्रतिबंधित गोलियां, बीड़ियां, लाइटर, डाटा केबल, ईयरफोन और नकदी बरामद हुई थी। घटना के बाद पुलिस ने जेल परिसर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, लेकिन सामग्री फेंकने वाला व्यक्ति कैमरों में कैद नहीं हुआ।
अब पुलिस साइबर जांच के साथ जेल के आधिकारिक फोन से कैदियों की हुई बातचीत का रिकॉर्ड भी खंगाल रही है, ताकि किसी संदिग्ध संपर्क का पता लगाया जा सके।
जेल वार्डन जोगिंदर सिंह की शिकायत के अनुसार बुधवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे अंडर ट्रायल कैदियों की मौजूदगी में प्रतिबंधित सामग्री बरामद की गई थी। सीसीटीवी फुटेज से पैकेट बाहर से जेल परिसर में फेंके जाने की पुष्टि हुई है, लेकिन बाहरी दीवार पर लगे कैमरों में फेंकने वाला व्यक्ति नजर नहीं आया।
एसपी हमीरपुर बलवीर सिंह ने बताया कि बरामद प्रतिबंधित सामग्री को जांच के लिए फोरेंसिक प्रयोगशाला भेजा गया है। रिपोर्ट और साइबर जांच के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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पुलिस इनके आईएमईआई नंबर के माध्यम से यह पता लगाने में जुटी है कि इनमें पहले किन-किन सिम कार्डों का इस्तेमाल हुआ और इन्हें कौन संचालित कर रहा था। पुलिस को उम्मीद है कि मोबाइल फोन की जांच से प्रतिबंधित सामग्री जेल में पहुंचाने वालों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
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बरामद चिट्टा, नशीले कैप्सूल, गोलियां और अन्य वस्तुओं को अदालत में पेश करने के बाद जांच के लिए क्षेत्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (आरएफएसएल) जुंगा भेज दिया गया है। रिपोर्ट से बरामद पदार्थों और उनमें मौजूद मादक तत्वों की पुष्टि होगी।
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पुलिस ने बुधवार को इस मामले में तीन अंडर ट्रायल कैदियों हीरा मुखिया, ताज मोहम्मद और शुभकरण के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। आरोपियों से पूछताछ अदालत की अनुमति मिलने के बाद ही की जाएगी।
वीरवार को एसडीएम हमीरपुर एवं जेल अधीक्षक संजीत सिंह ने जेल का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने कर्मचारियों को निगरानी व्यवस्था और अधिक मजबूत करने के निर्देश दिए।
बुधवार दोपहर जेल परिसर में बाहर से फेंके गए एक संदिग्ध पैकेट से करीब 1.37 ग्राम चिट्टा, दो मोबाइल फोन, नशीले कैप्सूल, प्रतिबंधित गोलियां, बीड़ियां, लाइटर, डाटा केबल, ईयरफोन और नकदी बरामद हुई थी। घटना के बाद पुलिस ने जेल परिसर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, लेकिन सामग्री फेंकने वाला व्यक्ति कैमरों में कैद नहीं हुआ।
अब पुलिस साइबर जांच के साथ जेल के आधिकारिक फोन से कैदियों की हुई बातचीत का रिकॉर्ड भी खंगाल रही है, ताकि किसी संदिग्ध संपर्क का पता लगाया जा सके।
जेल वार्डन जोगिंदर सिंह की शिकायत के अनुसार बुधवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे अंडर ट्रायल कैदियों की मौजूदगी में प्रतिबंधित सामग्री बरामद की गई थी। सीसीटीवी फुटेज से पैकेट बाहर से जेल परिसर में फेंके जाने की पुष्टि हुई है, लेकिन बाहरी दीवार पर लगे कैमरों में फेंकने वाला व्यक्ति नजर नहीं आया।
एसपी हमीरपुर बलवीर सिंह ने बताया कि बरामद प्रतिबंधित सामग्री को जांच के लिए फोरेंसिक प्रयोगशाला भेजा गया है। रिपोर्ट और साइबर जांच के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।