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Hamirpur (Himachal) News: खानपान में लापरवाही से मुंह में आफत, छालों, दांत के दर्द से लोग हो रहे बेहाल
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Tue, 20 Jan 2026 09:01 AM IST
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टौणी देवी अस्पताल में मरीज की जांच करते डॉ. कविश। स्रोत : स्वास्थ्य विभाग
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हमीरपुर। खराब जीवनशैली और पोषक तत्वों की कमी का सीधा असर अब लोगों की मुस्कान पर पड़ रहा है। टौणी देवी अस्पताल की ओपीडी में इन दिनों दांतों में झनझनाहट, जबड़े में दर्द और मुंह के छालों से पीड़ित मरीजों की तादाद अचानक बढ़ गई है। डॉक्टरों के अनुसार जंक फूड का बढ़ता चलन और शरीर में विटामिन व आयरन की कमी इस समस्या का मुख्य कारण बनकर उभर रही है।
टौणी देवी अस्पताल में रोजाना 30 से 35 मरीज दांतों की समस्याओं को लेकर पहुंच रहे हैं। इनमें सबसे चिंताजनक मामला मुंह के छालों का है। दंत चिकित्सक डॉ. कविश ने बताया कि महीने में एक से दो मरीज ऐसे आ रहे हैं, जिनके छालों की गहन जांच (बायोप्सी) करवानी पड़ रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं ये मुंह के कैंसर के लक्षण तो नहीं हैं।
आयरन, कैल्शियम और पोषक तत्वों की कमी के कारण छाले ठीक होने का नाम नहीं ले रहे हैं। बदलते मौसम और अत्यधिक ठंडी-गर्म चीजों के सेवन से दांतों में झनझनाहट और जबड़े के दर्द के रोगियों का ग्राफ बढ़ा है। चिकित्सक के अनुसार, दांतों में कीड़ा लगना (कैविटी) केवल दर्द ही नहीं देता, बल्कि समय पर इलाज न होने पर यह गंभीर संक्रमण का रूप ले सकता है। ठंड के कारण दांतों के 'तड़कने' की शिकायतें भी सामने आ रही हैं, जो इनेमल की संवेदनशीलता को दर्शाता है।
दांतों को न करें नजरअंदाज
दांतों में कीड़े लगने से संक्रमण फैल सकता है, जिससे दांत निकालने तक की नौबत आ जाती है। यदि मुंह के छाले लंबे समय तक बने रहें तो यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकते हैं। संतुलित आहार लें और लापरवाही न बरतें। -डॉ. कविश, दंत चिकित्सक, टौणी देवी अस्पताल।
दांतों और मुंह की सेहत के लिए अपनाएं ये टिप्स
खानपान में सुधार : हरी सब्जियां, फल और दूध का सेवन बढ़ाएं, ताकि आयरन और कैल्शियम की कमी पूरी हो सके।
स्वच्छता : दिन में दो बार (सुबह और रात को सोने से पहले) ब्रश अवश्य करें।
परहेज : अत्यधिक ठंडी, गर्म, मीठी या अम्लीय चीजों के सेवन से बचें।
नियमित जांच : हर छह महीने में दंत चिकित्सक से परामर्श लें।
चेतावनी : छालों के लिए खुद डॉक्टर न बनें, लंबे समय तक दिक्कत होने पर तुरंत अस्पताल जाएं।
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टौणी देवी अस्पताल में रोजाना 30 से 35 मरीज दांतों की समस्याओं को लेकर पहुंच रहे हैं। इनमें सबसे चिंताजनक मामला मुंह के छालों का है। दंत चिकित्सक डॉ. कविश ने बताया कि महीने में एक से दो मरीज ऐसे आ रहे हैं, जिनके छालों की गहन जांच (बायोप्सी) करवानी पड़ रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं ये मुंह के कैंसर के लक्षण तो नहीं हैं।
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आयरन, कैल्शियम और पोषक तत्वों की कमी के कारण छाले ठीक होने का नाम नहीं ले रहे हैं। बदलते मौसम और अत्यधिक ठंडी-गर्म चीजों के सेवन से दांतों में झनझनाहट और जबड़े के दर्द के रोगियों का ग्राफ बढ़ा है। चिकित्सक के अनुसार, दांतों में कीड़ा लगना (कैविटी) केवल दर्द ही नहीं देता, बल्कि समय पर इलाज न होने पर यह गंभीर संक्रमण का रूप ले सकता है। ठंड के कारण दांतों के 'तड़कने' की शिकायतें भी सामने आ रही हैं, जो इनेमल की संवेदनशीलता को दर्शाता है।
दांतों को न करें नजरअंदाज
दांतों में कीड़े लगने से संक्रमण फैल सकता है, जिससे दांत निकालने तक की नौबत आ जाती है। यदि मुंह के छाले लंबे समय तक बने रहें तो यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकते हैं। संतुलित आहार लें और लापरवाही न बरतें। -डॉ. कविश, दंत चिकित्सक, टौणी देवी अस्पताल।
दांतों और मुंह की सेहत के लिए अपनाएं ये टिप्स
खानपान में सुधार : हरी सब्जियां, फल और दूध का सेवन बढ़ाएं, ताकि आयरन और कैल्शियम की कमी पूरी हो सके।
स्वच्छता : दिन में दो बार (सुबह और रात को सोने से पहले) ब्रश अवश्य करें।
परहेज : अत्यधिक ठंडी, गर्म, मीठी या अम्लीय चीजों के सेवन से बचें।
नियमित जांच : हर छह महीने में दंत चिकित्सक से परामर्श लें।
चेतावनी : छालों के लिए खुद डॉक्टर न बनें, लंबे समय तक दिक्कत होने पर तुरंत अस्पताल जाएं।