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Hamirpur (Himachal) News: शोध से स्टार्टअप तक का रास्ता दिखाएगा एनआईटी
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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रोपड़ के प्रोफेसर आहूजा को स्मृति चिन्ह भेंट करते एनआईटी
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हमीरपुर। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) हमीरपुर में सोमवार से शोध को प्रयोगशाला से बाजार तक पहुंचाने और नवाचार को स्टार्टअप में बदलने पर केंद्रित एक सप्ताह का राष्ट्रीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) शुरू हुआ।
17 जुलाई तक चलने वाले इस कार्यक्रम में देशभर के तकनीकी संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों और पॉलिटेक्निक संस्थानों से 55 से अधिक शिक्षक, शोधकर्ता और नवाचार से जुड़े प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। विशेषज्ञ उन्हें शोध को व्यावसायिक उत्पाद और सफल उद्यम में बदलने की प्रक्रिया से रूबरू कराएंगे।
कार्यक्रम का उद्घाटन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रोपड़ के प्रोफेसर आहूजा ने किया। उन्होंने कहा कि प्रयोगशालाओं में होने वाला शोध तभी सार्थक माना जाएगा, जब वह समाज और उद्योग की जरूरतों को पूरा करने वाले उत्पादों का रूप ले। इसके लिए शिक्षण संस्थानों और उद्योग जगत के बीच मजबूत समन्वय जरूरी है। उन्होंने कार्यक्रम की संयोजक डॉ. पमिता अवस्थी की पहल की सराहना करते हुए इसे विद्यार्थियों और शिक्षकों में उद्यमिता की सोच विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
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संस्थान के निदेशक ने कहा कि एनआईटी हमीरपुर में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए इन्क्यूबेशन, मेंटरिंग और उद्योगों के साथ साझेदारी को लगातार मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने संस्थान के प्रौद्योगिकी व्यवसाय इन्क्यूबेटर (आई-टीबीआई) की भूमिका की भी सराहना की।
कार्यक्रम की संयोजक एवं उत्तिष्ठति फाउंडेशन-आई-टीबीआई-एनआईटी हमीरपुर की संस्थापक निदेशक डॉ. पमिता अवस्थी ने बताया कि एफडीपी का उद्देश्य शिक्षकों, शोधकर्ताओं और नवाचारकर्ताओं को शोध के परिणामों को बाजार के अनुरूप तकनीक, स्टार्टअप और व्यावसायिक उद्यमों में बदलने के लिए आवश्यक कौशल और व्यावहारिक समझ प्रदान करना है। कार्यक्रम के दौरान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की प्रयोगशालाओं और विभिन्न उद्योगों के विशेषज्ञ व्याख्यान देंगे।
योजनाओं की दी जाएगी जानकारी
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के सहयोग से आयोजित इस एफडीपी में प्रतिभागियों को स्टार्टअप इंडिया, मेक इन इंडिया और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम जैसी योजनाओं की भी जानकारी दी जाएगी, ताकि युवा रोजगार तलाशने के बजाय रोजगार सृजित करने की दिशा में आगे बढ़ सकें। उद्घाटन सत्र में संस्थान की रजिस्ट्रार डॉ. अर्चना नानोटी, डीन (अनुसंधान एवं परामर्श), फैकल्टी सदस्य और प्रतिभागी मौजूद रहे।
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17 जुलाई तक चलने वाले इस कार्यक्रम में देशभर के तकनीकी संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों और पॉलिटेक्निक संस्थानों से 55 से अधिक शिक्षक, शोधकर्ता और नवाचार से जुड़े प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। विशेषज्ञ उन्हें शोध को व्यावसायिक उत्पाद और सफल उद्यम में बदलने की प्रक्रिया से रूबरू कराएंगे।
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कार्यक्रम का उद्घाटन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रोपड़ के प्रोफेसर आहूजा ने किया। उन्होंने कहा कि प्रयोगशालाओं में होने वाला शोध तभी सार्थक माना जाएगा, जब वह समाज और उद्योग की जरूरतों को पूरा करने वाले उत्पादों का रूप ले। इसके लिए शिक्षण संस्थानों और उद्योग जगत के बीच मजबूत समन्वय जरूरी है। उन्होंने कार्यक्रम की संयोजक डॉ. पमिता अवस्थी की पहल की सराहना करते हुए इसे विद्यार्थियों और शिक्षकों में उद्यमिता की सोच विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
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संस्थान के निदेशक ने कहा कि एनआईटी हमीरपुर में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए इन्क्यूबेशन, मेंटरिंग और उद्योगों के साथ साझेदारी को लगातार मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने संस्थान के प्रौद्योगिकी व्यवसाय इन्क्यूबेटर (आई-टीबीआई) की भूमिका की भी सराहना की।
कार्यक्रम की संयोजक एवं उत्तिष्ठति फाउंडेशन-आई-टीबीआई-एनआईटी हमीरपुर की संस्थापक निदेशक डॉ. पमिता अवस्थी ने बताया कि एफडीपी का उद्देश्य शिक्षकों, शोधकर्ताओं और नवाचारकर्ताओं को शोध के परिणामों को बाजार के अनुरूप तकनीक, स्टार्टअप और व्यावसायिक उद्यमों में बदलने के लिए आवश्यक कौशल और व्यावहारिक समझ प्रदान करना है। कार्यक्रम के दौरान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की प्रयोगशालाओं और विभिन्न उद्योगों के विशेषज्ञ व्याख्यान देंगे।
योजनाओं की दी जाएगी जानकारी
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के सहयोग से आयोजित इस एफडीपी में प्रतिभागियों को स्टार्टअप इंडिया, मेक इन इंडिया और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम जैसी योजनाओं की भी जानकारी दी जाएगी, ताकि युवा रोजगार तलाशने के बजाय रोजगार सृजित करने की दिशा में आगे बढ़ सकें। उद्घाटन सत्र में संस्थान की रजिस्ट्रार डॉ. अर्चना नानोटी, डीन (अनुसंधान एवं परामर्श), फैकल्टी सदस्य और प्रतिभागी मौजूद रहे।