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Hamirpur (Himachal) News: जीवित प्रमाणपत्र की नई व्यवस्था का पेंशनर्स संघ ने किया विरोध
Mon, 13 Jul 2026 01:44 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Mon, 13 Jul 2026 01:44 AM IST
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हमीरपुर। हिम-आंचल पेंशनर्स संघ ने जीवित प्रमाणपत्र जमा करने की नई व्यवस्था पर कड़ी आपत्ति जताई है। संघ के प्रदेशाध्यक्ष केसी गौतम ने कहा कि निदेशक, कोषागार, लेखा एवं लॉटरी, शिमला की ओर से एक जुलाई को जारी आदेशों के अनुसार अब केवल चिकित्सकीय रूप से अक्षम पेंशनरों को ही मैन्युअल फार्म के माध्यम से जीवित प्रमाणपत्र जमा करने की अनुमति होगी।
इसके लिए भी संबंधित चिकित्सक से प्रमाणित करवाना अनिवार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि जीवन प्रमाण ऐप का उद्देश्य पेंशनरों को सुविधा देना था, लेकिन नए निर्देशों से बुजुर्ग, बीमार, चलने-फिरने में असमर्थ और कम पढ़े-लिखे पेंशनरों की परेशानी बढ़ जाएगी।
पहले ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर पेंशनर अधिकृत अधिकारी से फार्म सत्यापित करवाकर किसी भी व्यक्ति के माध्यम से कोषागार कार्यालय में जमा करवा सकते थे, लेकिन अब उन्हें अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ेंगे।
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केसी गौतम ने कहा कि पूर्व की तरह मैन्युअल फार्म के माध्यम से जीवित प्रमाणपत्र जमा करने की व्यवस्था अधिक सरल और सुविधाजनक है। इसी मांग को लेकर संघ ने 10 जुलाई को मुख्य सचिव, हिमाचल प्रदेश सरकार को ईमेल और डाक के माध्यम से पत्र भेजकर पुराने नियम बहाल करने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि संघ वर्ष 2016 से जीवन प्रमाण की ऑनलाइन व्यवस्था को बढ़ावा देने के साथ जरूरतमंद पेंशनरों के घर-घर जाकर निःशुल्क जीवित प्रमाणपत्र बनाने की सुविधा भी उपलब्ध करा रहा है। ऐसे में पुराने नियमों को बहाल किया जाना चाहिए।
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इसके लिए भी संबंधित चिकित्सक से प्रमाणित करवाना अनिवार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि जीवन प्रमाण ऐप का उद्देश्य पेंशनरों को सुविधा देना था, लेकिन नए निर्देशों से बुजुर्ग, बीमार, चलने-फिरने में असमर्थ और कम पढ़े-लिखे पेंशनरों की परेशानी बढ़ जाएगी।
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पहले ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर पेंशनर अधिकृत अधिकारी से फार्म सत्यापित करवाकर किसी भी व्यक्ति के माध्यम से कोषागार कार्यालय में जमा करवा सकते थे, लेकिन अब उन्हें अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ेंगे।
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केसी गौतम ने कहा कि पूर्व की तरह मैन्युअल फार्म के माध्यम से जीवित प्रमाणपत्र जमा करने की व्यवस्था अधिक सरल और सुविधाजनक है। इसी मांग को लेकर संघ ने 10 जुलाई को मुख्य सचिव, हिमाचल प्रदेश सरकार को ईमेल और डाक के माध्यम से पत्र भेजकर पुराने नियम बहाल करने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि संघ वर्ष 2016 से जीवन प्रमाण की ऑनलाइन व्यवस्था को बढ़ावा देने के साथ जरूरतमंद पेंशनरों के घर-घर जाकर निःशुल्क जीवित प्रमाणपत्र बनाने की सुविधा भी उपलब्ध करा रहा है। ऐसे में पुराने नियमों को बहाल किया जाना चाहिए।