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Hamirpur (Himachal) News: प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट सात माह से ठप, कचरे के लगे ढेर
Thu, 23 Jul 2026 12:04 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Thu, 23 Jul 2026 12:04 PM IST
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बिझड़ी (हमीरपुर)। स्वच्छ भारत मिशन के तहत 12 पंचायतों के सहयोग से धंगोटा पंचायत के झोरघाट में स्थापित प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट सात माह से बंद है। कर्मचारियों के मानदेय के लिए धन नहीं मिलने और पंचायतों के कार्यकाल समाप्त होने के बाद व्यवस्था कमजोर पड़ने से यूनिट में करीब दो हजार किलो प्लास्टिक जमा हो गया है, जबकि पंचायतों में प्लास्टिक संग्रहण भी लगातार घट रहा है।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्राम पंचायत धंगोटा के झोरघाट में स्थापित प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट के लिए स्थानीय व्यक्ति ने जमीन दान में दी थी, जबकि 12 पंचायतों ने निर्माण के लिए धनराशि उपलब्ध कराई थी। योजना के तहत प्रत्येक पंचायत से हर महीने प्लास्टिक कचरा एकत्र कर यूनिट तक पहुंचाया जाना था, जहां उसकी छंटाई, पैकेजिंग और रीसाइक्लिंग के लिए आगे भेजने की व्यवस्था बनाई गई थी।
वर्तमान में पंचायतों से हर माह की 20 तारीख को प्लास्टिक यूनिट तक तो पहुंच रहा है लेकिन सात महीनों से उसकी छंटाई और प्रोसेसिंग पूरी तरह बंद है। इसका मुख्य कारण कर्मचारियों के मानदेय के लिए धन की कमी बताया जा रहा है। समय पर भुगतान न मिलने के कारण कर्मचारियों ने काम छोड़ दिया।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि पंचायत चुनावों के दौरान विभागीय अधिकारी अन्य कार्यों में व्यस्त रहे, जबकि पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रतिनिधियों की सक्रियता भी कम हो गई। इसका सीधा असर यूनिट के संचालन पर पड़ा।
यूनिट परिसर में करीब दो हजार किलो प्लास्टिक जमा हो चुका है। इसकी प्रोसेसिंग कर बेचने से आय भी अर्जित की जा सकती है लेकिन कर्मचारियों के अभाव में यह संभव नहीं हो पा रहा है।
शुरुआत में प्रत्येक पंचायत से हर माह करीब 50 किलो प्लास्टिक एकत्र होता था, जो अब घटकर पांच से 10 किलो रह गया है। लोगों का कहना है कि नियमित उठान नहीं होने से कई स्थानों पर प्लास्टिक खुले में फेंका जा रहा है, जिससे पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
पंचायत स्तर पर प्लास्टिक कचरे के निपटान की अच्छी शुरुआत हुई थी लेकिन बाद में व्यवस्था ठप हो गई। इसे दोबारा सुचारू किया जाए तो सफाई व्यवस्था मजबूत होगी। -सुरेंद्र ठाकुर, स्थानीय निवासी
कूड़े के निपटान को लेकर किरायेदारों को ज्यादा परेशानी होती है। पंचायत को यूनिट दोबारा शुरू करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। -प्रदीप कुमार, किरायेदार, बिझड़ी
पंचायत प्रतिनिधियों के न होने से यूनिट संचालन प्रभावित हुआ। अब नई पंचायतों का गठन हो चुका है और कर निर्धारण के लिए ग्राम सभाएं हो रही हैं। जल्द ही यूनिट की व्यवस्था पटरी पर आ जाएगी। -सतीश शर्मा, ब्लॉक कोऑर्डिनेटर, स्वच्छ भारत मिशन, बिझड़ी
यूनिट के संचालन के लिए 12 पंचायतों का क्लस्टर बनाया गया था। पंचायतों के भंग होने से कुछ दिक्कतें आईं लेकिन अब व्यवस्था दोबारा सुचारू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। -राजेश कुमार, बीडीओ, बिझड़ी
यह यूनिट मेरी पंचायत में स्थापित है। इसे व्यवस्थित ढंग से चलाने के प्रयास शुरू हो चुके हैं। भविष्य में यहां प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट के साथ गीले कचरे के प्रबंधन की भी व्यवस्था की जाएगी। -अजय राणा, प्रधान, ग्राम पंचायत धंगोटा
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स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्राम पंचायत धंगोटा के झोरघाट में स्थापित प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट के लिए स्थानीय व्यक्ति ने जमीन दान में दी थी, जबकि 12 पंचायतों ने निर्माण के लिए धनराशि उपलब्ध कराई थी। योजना के तहत प्रत्येक पंचायत से हर महीने प्लास्टिक कचरा एकत्र कर यूनिट तक पहुंचाया जाना था, जहां उसकी छंटाई, पैकेजिंग और रीसाइक्लिंग के लिए आगे भेजने की व्यवस्था बनाई गई थी।
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वर्तमान में पंचायतों से हर माह की 20 तारीख को प्लास्टिक यूनिट तक तो पहुंच रहा है लेकिन सात महीनों से उसकी छंटाई और प्रोसेसिंग पूरी तरह बंद है। इसका मुख्य कारण कर्मचारियों के मानदेय के लिए धन की कमी बताया जा रहा है। समय पर भुगतान न मिलने के कारण कर्मचारियों ने काम छोड़ दिया।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि पंचायत चुनावों के दौरान विभागीय अधिकारी अन्य कार्यों में व्यस्त रहे, जबकि पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रतिनिधियों की सक्रियता भी कम हो गई। इसका सीधा असर यूनिट के संचालन पर पड़ा।
यूनिट परिसर में करीब दो हजार किलो प्लास्टिक जमा हो चुका है। इसकी प्रोसेसिंग कर बेचने से आय भी अर्जित की जा सकती है लेकिन कर्मचारियों के अभाव में यह संभव नहीं हो पा रहा है।
शुरुआत में प्रत्येक पंचायत से हर माह करीब 50 किलो प्लास्टिक एकत्र होता था, जो अब घटकर पांच से 10 किलो रह गया है। लोगों का कहना है कि नियमित उठान नहीं होने से कई स्थानों पर प्लास्टिक खुले में फेंका जा रहा है, जिससे पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
पंचायत स्तर पर प्लास्टिक कचरे के निपटान की अच्छी शुरुआत हुई थी लेकिन बाद में व्यवस्था ठप हो गई। इसे दोबारा सुचारू किया जाए तो सफाई व्यवस्था मजबूत होगी। -सुरेंद्र ठाकुर, स्थानीय निवासी
कूड़े के निपटान को लेकर किरायेदारों को ज्यादा परेशानी होती है। पंचायत को यूनिट दोबारा शुरू करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। -प्रदीप कुमार, किरायेदार, बिझड़ी
पंचायत प्रतिनिधियों के न होने से यूनिट संचालन प्रभावित हुआ। अब नई पंचायतों का गठन हो चुका है और कर निर्धारण के लिए ग्राम सभाएं हो रही हैं। जल्द ही यूनिट की व्यवस्था पटरी पर आ जाएगी। -सतीश शर्मा, ब्लॉक कोऑर्डिनेटर, स्वच्छ भारत मिशन, बिझड़ी
यूनिट के संचालन के लिए 12 पंचायतों का क्लस्टर बनाया गया था। पंचायतों के भंग होने से कुछ दिक्कतें आईं लेकिन अब व्यवस्था दोबारा सुचारू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। -राजेश कुमार, बीडीओ, बिझड़ी
यह यूनिट मेरी पंचायत में स्थापित है। इसे व्यवस्थित ढंग से चलाने के प्रयास शुरू हो चुके हैं। भविष्य में यहां प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट के साथ गीले कचरे के प्रबंधन की भी व्यवस्था की जाएगी। -अजय राणा, प्रधान, ग्राम पंचायत धंगोटा