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Hamirpur (Himachal) News: रीतिका ने पापड़ और बड़ियों से बदली तकदीर, बनीं आत्मनिर्भर
Sun, 02 Aug 2026 12:47 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sun, 02 Aug 2026 12:47 AM IST
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चौरी की रीतिका घर पर बढ़ियां बनाते हुए। संवाद
- फोटो : 1
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संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। चौरी क्षेत्र की रीतिका घर के कामकाज के साथ चावल के पापड़ और दालों की बड़ियां बनाने का लघु कारोबार शुरू कर आत्मनिर्भर बनी हैं। यह कारोबार अब धीरे-धीरे पहचान बना रहा है।
रीतिका अपने बनाए उत्पाद गांव के साथ-साथ आसपास की दुकानों तक पहुंचा रही हैं और हर माह 8 से 10 हजार रुपये की आमदनी अर्जित कर रही हैं। शुरुआत में उन्होंने घर पर ही प्रयोग के तौर पर चावल के पापड़ और दालों की बड़ियां बनानी शुरू की थीं।
परिवार और आसपास के लोगों को उनके बनाए उत्पाद पसंद आए, जिसके बाद उन्होंने इसे नियमित कारोबार के रूप में शुरू करने का निर्णय लिया। धीरे-धीरे उत्पादों की मांग बढ़ने लगी और रीतिका का आत्मविश्वास भी बढ़ता गया।
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अब उनके बनाए पापड़ और बड़ियां आसपास की दुकानों में भी उपलब्ध हैं। वह नियमित रूप से दुकानों में इनकी सप्लाई कर रही हैं और कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं।
कारोबार बढ़ने के बाद रीतिका ने गांव की दो अन्य महिलाओं को भी अपने साथ जोड़ा है। अब ये महिलाएं भी पापड़ और बड़ियां तैयार करने में सहयोग कर रही हैं, जिससे उन्हें रोजगार का अवसर मिला है।
रीतिका की तीन बेटियां हैं, जो सरकारी स्कूल में पढ़ाई करती हैं, जबकि उनके पति किराने की दुकान चलाते हैं। रीतिका ने मेहनत और आत्मनिर्भर बनने के जज्बे से अपनी अलग पहचान बनाई है।
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हमीरपुर। चौरी क्षेत्र की रीतिका घर के कामकाज के साथ चावल के पापड़ और दालों की बड़ियां बनाने का लघु कारोबार शुरू कर आत्मनिर्भर बनी हैं। यह कारोबार अब धीरे-धीरे पहचान बना रहा है।
रीतिका अपने बनाए उत्पाद गांव के साथ-साथ आसपास की दुकानों तक पहुंचा रही हैं और हर माह 8 से 10 हजार रुपये की आमदनी अर्जित कर रही हैं। शुरुआत में उन्होंने घर पर ही प्रयोग के तौर पर चावल के पापड़ और दालों की बड़ियां बनानी शुरू की थीं।
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परिवार और आसपास के लोगों को उनके बनाए उत्पाद पसंद आए, जिसके बाद उन्होंने इसे नियमित कारोबार के रूप में शुरू करने का निर्णय लिया। धीरे-धीरे उत्पादों की मांग बढ़ने लगी और रीतिका का आत्मविश्वास भी बढ़ता गया।
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अब उनके बनाए पापड़ और बड़ियां आसपास की दुकानों में भी उपलब्ध हैं। वह नियमित रूप से दुकानों में इनकी सप्लाई कर रही हैं और कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं।
कारोबार बढ़ने के बाद रीतिका ने गांव की दो अन्य महिलाओं को भी अपने साथ जोड़ा है। अब ये महिलाएं भी पापड़ और बड़ियां तैयार करने में सहयोग कर रही हैं, जिससे उन्हें रोजगार का अवसर मिला है।
रीतिका की तीन बेटियां हैं, जो सरकारी स्कूल में पढ़ाई करती हैं, जबकि उनके पति किराने की दुकान चलाते हैं। रीतिका ने मेहनत और आत्मनिर्भर बनने के जज्बे से अपनी अलग पहचान बनाई है।

चौरी की रीतिका घर पर बढ़ियां बनाते हुए। संवाद- फोटो : 1